- Triptii Dimri, Priyanka Chopra to Pooja Hegde: Promising Actresses Whose Upcoming Films We Can’t Wait to Watch
- Pooja Hegde Onboarded Jana Nayagan Because It’s Thalapathy Vijay’s Last Theatrical Release - Sources
- आईवीएफ को लेकर झिझक छोड़ें, सही समय पर इलाज से माता-पिता बनने का सपना हो सकता है पूरा: डॉ. पायल जैसवाल
- Badlapur, October to Border 2: 7 Films that Highlight Varun Dhawan’s Range as a Dynamic Actor
- Bollywood & Indie Songs That Feel Like the Perfect Monsoon Playlist - Dhvani Bhanushali’s Vaaste to Jasleen Royal’s Heeriye
पार्थिव गणेश विसर्जन प्रातः 9.38 के पहले करेंः आचार्य शर्मा
अनन्त चतुर्दशी के साथ पूर्णिमा का संयोग है. श्रीकृष्ण ने युधिष्ठिर व द्रौपदी को अनन्त व्रत का उपदेश दिया था। अनन्त सूत्र धारण करने से सर्वविध रक्षा होती है। पार्थिव गणेश विसर्जन प्रातः 9.38 के पहले करें।
यह जानकारी मध्यप्रदेश ज्योतिष एवं विद्वत परिषद के अध्यक्ष आचार्य पण्डित रामचंद्र शर्मा वैदिक ने दी। उन्होंने बताया कि श्री गणेश चतुर्थी को स्थापित पार्थिव (काली मिट्टी,बालू के ) गणेश जी का एक सितम्बर अनन्त चतुर्दशी को सविधि पूजा के पश्चात शुद्धता व पवित्रता के साथ विसर्जन करना चाहिए।
आप घरों में भी पानी के टब, कुंड,बगीचे की क्यारी में विसर्जन कर सकते है।चतुर्दशी तिथि प्रातः 9 बजकर 38 मिनिट तक रहेगी।बाद में सोलह श्राद्ध प्रारम्भ हो जाएंगे।अतः श्री गणेश विसर्जन शुभ समय मे ही विधि,,विधान से कर उनका आशीर्वाद प्राप्त करें।
अनन्त चतुर्दशी की पूजा विधि
अनन्त चतुर्दशी को अनन्त भगवान की पूजा का विधान है ।अनन्त से तातपर्य शेषशायी भगवान विष्णु से है। इस व्रत में सूर्योदय व्यापिनी चतुर्दर्शी का महत्व है।यदि इसमें पूर्णिमा का संयोग हो तो अत्यंत शुभ माना जाता है। प्रातः 9.38 के बाद पूर्णिमा तिथि भी लग रही है।
श्रीकृष्ण भगवान ने अनन्त व्रत का उपदेश दिया था
युधिष्ठिर अपने भाइयों एवम द्रोपदी के साथ वनवास के दौरान अनेक कष्ट भोग रहे थे।उस समय योगेश्वर भगवान श्रीकृष्ण ने उन्हें कष्ट से मुक्ति दिलाने के लिए अनन्त व्रत करने का उपदेश दिया था।साथ ही कौण्डिन्य मुनि जिसने इस व्रत का अनादर किया था उसे भी बताया था।
आचार्य शर्मा वैदिक ने बताया कि अनन्त व्रत में चौदह गाँठ वाले सूत्र का महत्व है। कौण्डिन्य मुनि ने अपनी पत्नी शिला (सुमन्तु मुनि की कन्या ) की भुजा में बंधे अनन्त सूत्र को क्रोध में आकर फेंक दिया था जिसके प्रभाव से उसका सब कुछ नष्ट हो गया।
आचार्य पण्डित रामचन्द्र शर्मा वैदिक ने यह रहस्योद्घाटन किया कि दोष मार्जन के लिए वन में अनन्त भगवान की सविधि पूजा कर स्वयं व पत्नी को पुनः अनन्त सूत्र बांधा। अनन्त भगवान की खोज में वन वन भटकते कौण्डिन्य को वृद्ध ब्राह्मण ने सहारा दिया। उन्हें गुफा ले जाकर अनन्त भगवान के दर्शन करवाये। भगवान ने उसे अनन्तसूत्र के तिरस्कार के मार्जन का उपाय बताया। चौदह वर्ष तक अनन्त व्रत का पालन कर कौण्डिन्य ने अनन्त सूत्र की विधिवत पूजा अर्चना कर अनन्त सूत्र स्वयं व अपनी पत्नी शिला को बांधा।
आचार्य शर्मा वैदिक ने बताया कि इस अनन्त व्रत की कथा का सार यह है कि भगवान अनन्त व सर्व व्यापक है।अनन्तचतुर्दशी को पूजित सूत्र,,भगवान अनन्त की कृपा का प्रसाद है।जीवन मे मनुष्य को कभी भी क्रोध व अभिमान नही करना चाहिए।ये दोनों मनुष्य को खा जाते है। अनन्त सूत्र के धारण करने से भुक्ति व मुक्ति दोनों की ही प्राप्ति होती है।
अनन्त संसार महासमुद्रे, मग्नान सम्भ्युद्धर वासुदेव।
अनन्त रुपे विनियोजितात्मा, ह्यनन्त रूपा य नमो नमस्ते।।


