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शरीर के बाहर भी मिनटों में पानी फि़ल्टर कर देती है किडनी
बच्चों ने देखा लाइव किडनी ट्रांसप्लांट
इंदौर. एक हॉल में बैठे सैकड़ों बच्चे, चुपचाप समय बीतने का इंतज़ार करते हुए, यह जानने के लिए कि फि़लहाल सर्जन ने 52 वर्षीय माँ से जो किडनी 28 वर्षीय बेटे को लगाने के लिए निकाली है वो ठीक काम कर भी रही है या नहीं. शरीर से किडनी निकालकर एक घंटा तक बाहर रखने के बावजूद उससे मरीज के शरीर में लगाते ही मिनटों में काम करना शुरू कर देती है. इसी तकनीक के तहत जब मरीज को किडनी लगाई गई तो मरीज ने एक घंटे में यूरिन पास करके किडनी के स्वस्थ होने का प्रमाण दे दिया.
इन रोचक और दिल थाम देने वाले क्षणों के गवाह बने शहर के सैकड़ों बायो स्टूडेंट्स, जो चोइथराम हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर द्वारा 39वें स्थापना दिवस पर आयोजित स्टूडेंट्स लर्निंग प्रोग्राम में शामिल होने पहुचें थे. जैसे ही किडनी ने यूरिन बाहर फेंका ऑपरेशन थिएटर में मौजूद डॉक्टर्स के साथ ही ऑडिटोरियम में बैठ कर लाइव किडनी ट्रांसप्लांट देख रहे इन बच्चों में भी ख़ुशी की लहर दौड़ गई.
तीन घंटे तक चले इस ऑपरेशन को चार सर्जन्स की टीम ने किया, जिनमें डॉ. सी.एस. चिमनिया, डॉ. सुशील भाटिया, डॉ. युसूफ सैफी और डॉ. नीला ओझा शामिल थी. एनेस्थीशिया टीम में डॉ. दीपक खेतान और नितिन शर्मा थे. वहीं हॉल में बच्चों के सवालों का जवाब दे रहे थे डॉ जय कृपलानी और डॉ पी सालगिया. दोनों ही डॉक्टर्स ने बच्चों के साधारण से लेकर वैज्ञानिक स्तर के सभी प्रश्नों के जवाब बेहद रोचक ढंग से दिए. इस दौरान रोचक प्रश्न पूछने वाले बच्चों को पुरस्कृत भी किया गया.
अब तक हुए 1100 किडनी ट्रांसप्लांट
डेप्युटी डायरेक्टर डॉ. अमित भट्ट ने बच्चों को बताया कि 1984 से अब तक चोइथराम हॉस्पिटल में 1100 किडनी ट्रांसप्लांट किए जा चुके हैं. ग्रीन कॉरिडोर के तहत 9 लीवर ट्रांसप्लांट भी किए गए हैं. हॉस्पिटल में बोन मैरो ट्रांसप्लांट यूनिट तैयार है जल्द ही बोनमैरो ट्रांसप्लांट और हार्ट ट्रांसप्लांट भी किये जायेंगे.


