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जन्म से मूक-बधिर बच्चों को भी मिल सकती है आवाज
बच्चों ने देखा कॉक्लियर इम्प्लांट
इंदौर, 19 जुलाई. चोइथराम हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर से 39 वे स्थापना दिवस पर आयोजित पांच दिनी कार्यक्रम के तहत 6 स्कूलों के 220 बच्चों ने गुरुवार को कॉक्लियर इम्प्लांट की लाइव सर्जरी देखी।
यह सर्जरी भोपाल के डॉ एसपी दुबे, शहर के डॉ समीर निवासकर और डॉ अभीक सिकदारने की. एनेस्थीशियन थे डॉ दीपक खेतान. बच्चों को डेप्युटी डायरेक्टर अमित भट्ट ने बताया कि जन्मजात या किसी दुर्घटना में गूंगे-बहरे हुए बच्चों की जिंदगी सामान्य बनाने में कॉक्लियर इम्प्लांट अहम भूमिका निभाते हैं। हालांकि यह सर्जरी काफी महंगी होती है पर अब सरकारी सहायता से यह शहर के कई अस्पतालों में होने लगी है. डायरेक्टर डॉ सुनील चांदीवाल ने कहा कि बच्चों को लाइव सर्जरी दिखाने के पीछे हमारा उद्देश्य यह है कि बच्चे इस पेशे के महत्व को समझे और देश सेवा करने के लिए आगे आए.
कई रोचक सवालों के मिले जवाब
सर्जरी के दौरान बच्चों ने कई रोचक सवाल पूछे, जिनके जवाब विशेषज्ञों ने दिए। बच्चों ने पूछा कि क्या कॉकलियर इम्प्लांट किसी लेफ्ट हेंडर को राइट साइड में लगाया जाएगा? जवाब में एक्सपर्ट्स ने बताया कि इसे लगाने के लिए लेफ्ट साइड ही सही है इसलिए इस बात से फर्क नहीं पड़ता कि बच्चा लेफ्टी है या राइट हैंडर। कॉकलियर इम्प्लांट से माइग्रेन के दर्द पर होने वाले प्रभाव पर सवाल के जवाब में डॉक्टर्स ने बताया कि इम्प्लांट बचपन में लगाया जाता है जबकि माइग्रेन बड़ों की बीमारी है। इम्प्लांट की वर्किंग के बारे में डॉक्टर्स ने बताया कि कॉकलियर इम्प्लांट होने के बाद बटन दबाते ही यह काम करना शुरू कर देता है पर इसकी ट्रेनिंग एक-दो साल तक चलती है। डेमेज होने पर इसे बदला जा सकता है अन्यथा सिर्फ 15 सालों में इसकी बैटरी बदलने की जरुरत होती है।


