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शारदीय नवरात्र इस बार आठ दिनों के, डोली पर सवार होकर आएगी मां
इंदौर. शारदीय नवरात्र इस बार आठ दिनों के होंगे. नवरात्रि में माँ डोली पर सवार हो आएगी व जाएगी. गुरुवार से गुरुवार तक साधना होगी. चतुर्थी तिथि का क्षय इस बार क्षय है. माँ चन्द्रघंटा व कुष्मांडा का एक ही दिन पूजन होगा. चित्रा नक्षत्र व वैधृति योग में शुरुआत होगी. घट स्थापना ब्रह्म व अभिजीत मुहूर्त में शुभ रहेगी. तिथि, वार व नक्षत्र के अनुसार देवी को भोग अर्पित करें. नवदुर्गा स्वरूप नौ कन्याओं के पूजन से मनोकामनाएं पूर्ण होगी.
यह बात मध्यप्रदेश ज्योतिष व विद्वत परिषद के अध्यक्ष आचार्य पण्डित रामचन्द्र शर्मा वैदिक ने कही. उन्होंने जानकारी देते हुए बताया कि 7 अक्टूबर से शारदीय नवरात्र का आरम्भ होगा. माँ डोली पर सवार हो पधार रही है. देवी भागवत व ज्योतिर्ग्रन्थों की माने तो शनिवार व मङ्गल वार से नवरात्र आरम्भ हो तो माँ का वाहन अश्व होता है. सोमवार व रविवार को हो तो हाथी, गुरु वार व शुक्रवार को नवरात्रि का आरम्भ हो तो माँ डोली पर सवार हो आती है. पुराणादि धर्मशास्त्रों की माने तो जब माँ डोली पर सवार हो आती है तो यह अच्छा शगुन माना जाता है. इस वर्ष नवरात्रि चित्रा नक्षत्र व वैघृति योग में शुरू हो रही है जो देश की अर्थव्यवस्था के लिहाज से शुभ नहीं है.
देश की अर्थ व्यवस्था कमजोर बनी रहेगी. छत्र भंग योग, राजनीतिक उठापटक, प्राकृतिक आपदा, नई-नई असाध्य बीमारियों व महामारी का भयआदि रहेगा. इस वर्ष नवरात्र आठ दिनों की होगी तृतीया व चतुर्थी दोनों एक ही दिन 9 अक्टूबर शनिवार को प्रातः 7.48 बजे तक तृतीया है बाद में चतुर्थी प्रारम्भ होगी. 15 को अपरान्ह में दशमी है अतः दशहरा शमी पूजन शुक्रवार को मनाया जाएगा. चित्रा नक्षत्र व वैधृति योग के चलते घटस्थापना ब्रह्ममुहूर्त अथवा अभिजीत मुहूर्त में ही शुभ रहेगी. अतः शुभ मुहूर्त में ही अपनी-अपनी कुल परम्परानुसार घटस्थापना करें.
आचार्य शर्मा वैदिक ने बताया कि शारदीय नवरात्रि इस वर्ष आठ दिनों की है. नवरात्र की तिथियों का घटना व श्राद्ध की तिथयों का बढ़ना अशुभ है,,अच्छा संकेत नही है. शारदीय नवरात्र में माँ की साधना, उपासना व विविध कामना पूर्ति हेतु नव कन्याओं को नवदुर्गा के स्वरूप में तिथि, वार व नक्षत्र अनुसार नैवेद्य अर्पण करने से वांछित फल की प्राप्ति के साथ माँ की कृपा बनी रहती है. नवरात्र में अभ्यंग स्नान, घट स्थापना, ज्वारे का रोपण,प्रतिमा पूजा,चंडी पाठ, उपवास व हवन पूजन का ही विशेष महत्व है.


