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40 वर्ष से कम उम्र वालों को भी हो रहा मल्टीपल माएलोमा
इंदौर. शरीर की में किसी भी प्रकार की अनियमितता आ रही हो जो कि रूटिन से हटकर हो और कुछ भी आसामान्य लगे तो तुरंत जांच करवाए. यह कैंसर के लक्षण हो सकते हैं. भारत में मल्टीपल माएलोमा (एमएम) के मामलों की बढ़ती संख्या चिंता का विषय है क्योंकि ऐसे ज्यादातर मामले 40 वर्ष से कम उम्र के लोगों में देखने को मिल रहे हैं.
यह बात शहर के मेडिकल ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. राकेश तारण ने पत्रकारों से चर्चा करते हुए कही. मल्टीपल माएलोमा के बार में डॉ. तारण ने बताया कि यह एक प्रकार का ब्लड कैंसर हैजो प्लाज़्मा कोशिकाओं को प्रभावित करता है. मल्टीपल माएलोमा बढऩे के साथ ही यह रक्त बनाने वाली अन्य कोशिकाओं के बनने की प्रक्रिया को प्रभावित करता है, जिसके परिणाम स्वरूप् ब्लड काउंट कम हो जाता है, प्रतिरोधक क्षमता घटती है, तंत्रिका तंत्र को नुकसान पहुंचता है और कई बार किडनी फेल होने का भी खतरा होता है.
बीमारी पर चिंता जताते हुए डॉ. तारण ने बताया कि हम अब भी समझना होगा कि क्यों लोगों को मल्टीपल माएलोमा होता है, भले ही उम्र, पारिवारिक इतिहास, मोटापा और अन्य प्लाज्मा सेल बीमारियों की उपस्थिति कुछ जोखिम के कारण हैं. एमएम से कई अन्य गंभीर परिस्थितियों का जोखिम बढ़ता है जिनमें से कुछ जीवन के लिए घातक भी होती हैं. मैं लोगों को यह समझाना चाहता हूं कि इस प्रकार के कैंसर का उपचार किया जा सकता है, खास तौर पर जब इसका पता समय से चल जाए.
मरीजों को उपचार के विकल्पों के बारे में जानने के लिए अपने डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए. डॉक्टर ने बताया कि स्वास्थ्य सेवा के समुचित बुनियादी ढांचे की कमी और प्रभावी दवाओं तक पहुंचन होने की वजह से भारत में एमएम का इलाज चुनौती पूर्ण है.
यह होते हैं लक्षण
उन्होंने लक्षण के बारे में बताते हुए कहा कि मल्टीपल माएलोमा के सामान्य लक्षणों में है लगातार हड्डियों में दर्द खास तौर पर पीठ या पसलिया में, अचानक वनज में कमी, बार-बार बुखार आना और संक्रमण, बार-बार पेशाब आना और प्यास लगना और लगातार कमजोरी या थकान महसूस होना. प्रयोगशालाओं के परीक्षण, इमेजिंग टेस्ट और बोन मैरोबायोप्सी के माध्यम से जांच की जाती है. उपचार मरीज की उम्र, चिकित्सकीय इतिहास, बीमारी के स्तर पर निर्भर करता है. उपचार में रेडिएषन, कीमोथेरेपी, टारगेटेड थेरेपी और स्टेम सेल प्रत्यारोपण शामिल होता़ है.


