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शोधों का लाभ किसानों को नहीं मिला: डॉ. गुरनानी
कृषि विज्ञान पर व्याख्यान
इंदौर. सनातन काल से आज तक देश दो ही संस्कृति से जाना जाता हैं, ऋषि और कृषि संस्कृति. औद्योगिक क्रांति के बाद आज भी देश की अर्थव्यवस्था कृषि पर ही निर्भर हैं. कृषि के स्तर को सुधरने के लिए पिछले वर्षों मैं कई शोध हुए लेकिन इसका लाभ किसानों को नहीं मिला. आज भी किसान सही जानकारी के अभाव में हैं.
यह बात डॉ. दिनेश गुरनानी ने मेडीकैप्स विश्विद्यालय में अपने व्याख्यान के दौरान कही. वे कृषि विज्ञान पर आधारित एक दिवसीय विशेषज्ञ व्यख्यान में छात्रों को सम्बोधित कर रहे थे. अपने व्याख्यान के दौरान डॉ गुरनानी ने छात्रों को कृषि कृषि में आने वाली समस्याओं और उनके समाधान पर चर्चा की. साथ ही खेती की नयी तकनीक, पारम्परिक मिश्रित खेती, जैविक खेती, ड्रिप सिंचाई, सस्टेनेबल डेवलपमेंट, जीन अल्ट्रेशन के बारे में जानकारी दी.
उन्होंने बताया कि सस्टेनेबल डेवलपमेंट वर्तमान पीढ़ी की आवश्यकताओं के साथ ही भावी पीढ़ी की आवश्यकताओं को भी पूरी करेगा. साथ ही छात्रों ने किसानो के साथ संवाद, खेती से सम्बंधित स्टार्टअप, किसानो को सुविधा और निरंतर जानकारी मुहैय्या करने जैसी योजनाओं पर चर्चा की. इस अवसर पर विश्वविद्यालय के विज्ञान संकाय की डीन डॉ. प्रीति जैन, डॉ. राम श्रीवास्तव, कृषि विज्ञान संकाय के शिक्षक और विद्यार्थी उपस्थित थे ।


