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दीपावली पूजन की विधि और मुहूर्त
डॉ श्रद्धा सोनी

दीपावली 2018 : 7 नवंबर
लक्ष्मी पूजा मुहूर्त : शाम 5.57 बजे से 7.53 बजे तक
अवधि : 1 घंटा 55 मिनट
प्रदोष काल : शाम 5.27 बजे से शाम 8.06 बजे
वृषभ काल : शाम 5.57 बजे से शाम 7.53 बजे
अमावस्या तिथि आरंभ : रात 10.27 बजे से (6 नवंबर)
अमावस्या तिथि समाप्त : शाम 9.31 (7 नवंबर)
लक्ष्मी पूजन के बारे में
शास्त्रों के अनुसार धन की प्राप्ति के लिए महालक्ष्मी की प्रसन्नता जरूरी है। जिन भक्तों पर महालक्ष्मी की कृपा रहती है उन्हें जीवन में कभी भी धन संबंधी परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ता। देवी को प्रसन्न करने के लिए प्रतिदिन इनका विधिवत पूजन करना चाहिए। धन से जुड़ी परेशानियों को दूर करने के लिए महालक्ष्मी के साथ भगवान विष्णु का पूजन करना श्रेष्ठ है। देवी लक्ष्मी भगवान विष्णु की पत्नी हैं और इसी वजह से विष्णु की पूजा करने से भक्तों पर भी धन की देवी की विशेष कृपा रहती है।
दिवाली पूजन की विधि
1. सुबह स्नानादि से निवृत्त हो स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
2. दिनभर उपवास रखें।
3. दिन में पकवान बनाएं और घर सजाएं।
4. शाम में फिर से स्नान करें।
5. महालक्ष्मी के स्वागत की तैयारी में घर की सफाई कर लक्ष्मीजी का चित्र लगायें।
6. भोजन में स्वादिष्ट व्यंजन और मिठाइयां बनाएं।
7. लक्ष्मीजी की तस्वीर के सामने एक चौकी रखकर उस पर मौली बांधें और उसपर गणेशजी की मिट्टी की मूर्ति स्थापित करें और तिलक कर पूजा करें।
8. चौकी पर छः चौमुखे व 26 छोटे दीपक रख तेल-बत्ती डालकर जलाएं और जल, मौली, चावल, फल, गुड़, अबीर, गुलाल, धूप आदि से विधिवत पूजन करें।
9. पूजा के बाद एक-एक दीपक घर के कोनों में जलाकर रखें।
10. एक छोटा तथा एक चौमुखा दीपक रखकर लक्ष्मीजी का पूजन करें और इसके बाद तिजोरी में गणेशजी तथा लक्ष्मीजी की मूर्ति रखकर विधिवत पूजा करें।
11. लक्ष्मी पूजन रात के बारह बजे करने का विशेष महत्व है। इसके लिए एक पाट पर लाल कपड़ा बिछाकर उस पर लक्ष्मी-गणेश की मूर्ति रखें और पास में एक सौ रुपए, सवा सेर चावल, गुड़, चार केले, मूली, हरी ग्वार की फली तथा पांच लड्डू रखकर पूजन करें और उन्हें लड्डुओं का भोग लगाएं।


