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ऑक्सीजन सिलेण्डर से नहीं पौधों से ही मिलता है
वृक्ष एक, लाभ अनेक – डाॅ. ए.के. द्विवेदी
विश्व स्वास्थ्य दिवस पर किया औषधीय पौधों का रोपण
इन्दौर। विश्व स्वास्थ्य दिवस पर इन्दौर भ्रमण पर आये श्रीकृष्णाय देसी गौ रक्षा शाला, हरिद्वार के संचालक स्वामी ऋषभ देवानन्द व स्वामी हरिओमानन्द ने एडवांस योग एण्ड नेचुरोपैथी हाॅस्पिटल परिसर में स्थित प्राकृतिक उद्यान में औषधीय पौधों का रोपण किया। स्वामीजी ने बताया कि, ऑक्सीजन की आपूर्ति से लेकर औषधियों के निर्माण तक में इन पौधों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
डाॅ. ए.के. द्विवेदी ने बताया कि, प्राचीन सभ्यताओं में भारत औषधीय पौधों के समृद्ध भंडार के रूप में जाना जाता है। भारतीय वनों में औषधीय और सुगंधित पौधों का प्रमुख भंडार है, जिन्हें बड़े पैमाने पर दवाओं और सुगंधित उत्पादों के निर्माण के लिए कच्चे माल के रूप में एकत्र किया जाता है। भारत में आयुष प्रणालियों में लगभग 8,000 हर्बल उपचारों को संहिताबद्ध किया गया है। आयुर्वेद, यूनानी, सिद्ध और लोक (आदिवासी) औषधियाँ स्वदेशी औषधियों की प्रमुख प्रणालियाँ हैं। इन पद्धतियों में आयुर्वेद और यूनानी चिकित्सा भारत में सबसे अधिक विकसित और व्यापक रूप से प्रचलित हैं।
हाल ही में, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने अनुमान लगाया कि दुनिया भर में 80 प्रतिशत लोग अपनी प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल की जरूरतों के लिए हर्बल दवाओं पर निर्भर हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, लगभग 21,000 पौधों की प्रजातियों में औषधीय पौधों के रूप में उपयोग किए जाने की क्षमता है।
उक्त अवसर पर शहर के वरिष्ठ होम्योपैथिक चिकित्सक व केन्द्रीय होम्योपैथिक अनुसन्धान परिषद्, आयुष मंत्रालय (भारत सरकार) में वैज्ञानिक सलाहकार बोर्ड के सदस्य डाॅ. ए.के. द्विवेदी ने बताया कि, ऑक्सीजन सिलेण्डर से नहीं बल्कि इन पेड़-पौधों से मिलती है, जो सृष्टि में विद्यमान समस्त प्राणियों के अस्तित्व का मूल कारण है। डाॅ. ए.के. द्विवेदी ने बताया कि, औषधीय पौधे कफ एवं वात का शमन करने, पीलिया, आँव, हैजा, फेफड़ा, अण्डकोष, तंत्रिका विकार, दीपन, पाचन, उन्माद, रक्त शोधक, ज्वर नाशक, स्मृति एवं बुद्धि का विकास करने, मधुमेह, मलेरिया एवं बलवर्धक, त्वचा रोगों एवं ज्वर आदि में लाभकारी होते हैं।


