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दुनियाभर में सर्वश्रेष्ठ स्मार्ट रिंग कंपनी के रुप में पहचानी जाने वाली औरा (ŌURA) रिंग अब भारत में भी उपलब्ध
भरतीयों की बिगड़ती नींद की आदतों पर रिपोर्ट में चौंकाने वाले खुलासे
भारतीय बाजार में प्रवेश करते ही औरा (ŌURA)ने देशवासियों की नींद की आदतों पर एक विस्तृत रिपोर्ट पेश की है। इस रिपोर्ट के अनुसार, नींद की गलत आदतों के कारण भारतीयों की आँखो की पुतलियों की तेज हलचल और नींद कम हो रही है और वे गहरी नींद से वंचित हो रहे हैं
इंदौर, मार्च 2026: दुनिया की सबसे विश्वसनीय स्मार्ट रिंग बनाने वाली कंपनी औरा (ŌURA) ने आज अधिकारिक रुप से भारतीय बाजार में प्रवेश करने की घोषणा की। अब तकनीक-प्रेमी भारतीय ग्राहक औरा रिंग 4 खरीद सकेंगे। यह रिंग क्रोमा स्टोर्स और अमेज़न पर उपलब्ध होगी। उन्नत तकनीक और वैज्ञानिक आधार पर स्वास्थ्य से जुड़ी सटीक जानकारी देने वाली यह स्मार्ट रिंग रोज़मर्रा के उपयोग के लिए डिज़ाइन की गई है। इसका डिज़ाइन हल्का और उपयोग में आसान है, जिससे इसे पूरे दिन पहना जा सकता है। यह स्मार्ट रिंग खास तौर पर भारतीय टेक-सैवी ग्राहकों को ध्यान में रखकर तैयार की गई है।
इसी के साथ औरा (ŌURA) ने ‘इंडिया द स्टेट ऑफ स्लीप 2026’ रिपोर्ट भी जारी की है। यह रिपोर्ट औरा (ŌURA) स्मार्ट रिंग का उपयोग करने वाले लाखों भारतीय सदस्यों की नींद के पैटर्न और आदतों के गहन अध्ययन पर आधारित है।
यह रिपोर्ट पर जानकारी देते हुए, औरा (ŌURA) के चीफ मार्केटिंग ऑफिसर डग स्विनी ने कहा, “हमने यह रिपोर्ट यह समझाने के लिए तैयार की है कि भारतीयों की जीवनशैली में सुधार लाने के लिए औरा (ŌURA) किस प्रकार सहायक हो सकती है। रिपोर्ट के आँकड़ें बताते हैं कि बेहतर स्वास्थ्य के लिए पर्याप्त नींद अनिवार्य है, लेकिन भारतीयों की व्यस्त और तेज़ जीवनशैली उनकी नींद में खलल डाल रही है। औरा (ŌURA) रिंग ग्राहकों को उनके स्वास्थ के प्रति जागरिक कर सकारात्मक जीवनशैली अपनाने में मदद करती है। भारत हर क्षेत्र में अपना लोहा मनवा रहा है और ऐसे देश के ग्राहकों को अपनी सेवाएँ देते हुए हमें बेहद खुशी हो रही है।”
भारतीयों की नींद की आदतें: कम विश्राम का स्वास्थ्य पर असर
औरा (ŌURA) की रिपोर्ट में भारतीय ग्राहकों की तुलना वैश्विक ग्राहकों से की गई है। आँकड़ों के अनुसार, भारत दुनिया के उन देशों में शामिल हैं जहाँ लोग सबसे कम सोते हैं। भारतीय ग्राहक औसतन हर रात केवळ 6 घंटे 28 मिनिट की नींद लेते हैं, जो कि सबसे अधिक सोने वाले देशों की तुलना में लगभग 40 मिनिट कम है।
विशषज्ञों के अनुसार, एक स्वस्थ वयस्क के 7 से 9 घंटे की नींद लेनी चाहिए। लेकिन अंतर्राष्ट्रीय कार्य समय, देर रात की मीटिंग्स और सोशल मीडिया पर सक्रिय रहने की आदतों के कारण भारतीयों को पर्याप्त नींद नहीं मिल पा रही है। इसका सीधा असर उनकी नींद पर हो रहा है, जो हर हफ्ते एक घंटे से भी अधिक कम हो रही है। आँखो की पुतलियों की तेज हलचल भावनाओं को संतुलित करने, याद्दाश्त सुधारने और निर्णय लेने की क्षमता बढ़ाने के लिए आवश्यक है। नींद की कमी के कारण अधिकांश भारतीय सुबह उठने पर खुद को तरोताजा महसून नहीं करते।


