निखिल द्विवेदी की सफ्रॉन मैजिकवर्क्स को बड़ी कानूनी राहत, बॉम्बे हाई कोर्ट ने IMPPA का अवॉर्ड किया निरस्त

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फिल्म निर्माता निखिल द्विवेदी की प्रोडक्शन कंपनी सफ्रॉन मैजिकवर्क्स को एक महत्वपूर्ण कानूनी राहत देते हुए बॉम्बे हाई कोर्ट ने इंडियन मोशन पिक्चर प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन (IMPPA) द्वारा 3 जुलाई, 2026 को पारित अवॉर्ड को निरस्त कर दिया है। न्यायालय का यह निर्णय उक्त अवॉर्ड से जुड़े विवाद में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम है। इसके साथ ही न्यायालय के समक्ष लंबित वाद की कार्यवाही का निस्तारण कर दिया गया है। हालांकि, कानून के तहत दोनों पक्षों के अधिकारों, दावों और उपलब्ध कानूनी उपायों पर विचार करने की गुंजाइश बरकरार रखी गई है।
बॉम्बे हाई कोर्ट का आदेश

सफ्रॉन मैजिकवर्क्स की ओर से जारी बयान के अनुसार, बॉम्बे हाई कोर्ट ने IMPPA की विवाद निवारण समिति (Dispute Resolution Committee यानी DRC) द्वारा पारित अवॉर्ड को निरस्त कर दिया। न्यायालय ने वाद का भी निस्तारण करते हुए स्पष्ट किया कि लंबित आवेदनों पर विचार के लिए अब कोई अन्य मुद्दा शेष नहीं है।

यह आदेश 9 सितंबर, 2026 को न्यायमूर्ति अरिफ एस. डॉक्टर द्वारा पारित अंतरिम आदेश के बाद आया है। उस अंतरिम आदेश के तहत IMPPA को विवादित अवॉर्ड के आधार पर सफ्रॉन मैजिकवर्क्स को डिफॉल्टर घोषित करने से रोक दिया गया था। इससे पहले की सुनवाई के दौरान प्रतिवादी संख्या 2 की ओर से पेश अधिवक्ता ने भी न्यायालय को आश्वस्त किया था कि संबंधित पक्ष विवादित अवॉर्ड के आधार पर कोई कार्रवाई नहीं करेगा।

सफ्रॉन मैजिकवर्क्स ने IMPPA के उक्त अवॉर्ड को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट का रुख किया था। कंपनी ने अवॉर्ड के क्रियान्वयन से उत्पन्न होने वाले संभावित प्रतिकूल परिणामों से संरक्षण प्रदान किए जाने की मांग भी की थी।
न्यायालय के निर्णय का महत्व

23 अक्टूबर, 2026 को पारित अपने नवीनतम आदेश में न्यायमूर्ति अरिफ एस. डॉक्टर ने मामले में IMPPA की स्थिति पर विचार करते हुए टिप्पणी की कि एसोसिएशन की अपनी ही समिति द्वारा पारित अवॉर्ड को निरस्त किए जाने पर वह स्वयं को इससे पीड़ित पक्ष के रूप में प्रस्तुत नहीं कर सकती। न्यायालय ने यह भी दर्ज किया कि नोटिस की तामील होने के बावजूद IMPPA कार्यवाही के दौरान न्यायालय के समक्ष उपस्थित नहीं हुई।

यह घटनाक्रम सफ्रॉन मैजिकवर्क्स और IMPPA के बीच न्यायालय के पूर्व निर्देशों की व्याख्या और उनके सार्वजनिक प्रस्तुतीकरण को लेकर जारी मतभेदों के बीच सामने आया है। सफ्रॉन मैजिकवर्क्स ने कार्यवाही के संबंध में IMPPA द्वारा दिए गए बयानों पर आपत्ति जताई थी। विशेष रूप से, इस बात को लेकर सवाल उठाए गए थे कि क्या न्यायालय ने एसोसिएशन को किसी कार्रवाई से प्रतिबंधित किया था।

प्रोडक्शन हाउस का कहना था कि 9 सितंबर के आदेश में स्पष्ट रूप से IMPPA को 3 जुलाई, 2026 के अवॉर्ड के आधार पर उसे डिफॉल्टर घोषित करने से प्रतिबंधित किया गया था।
कानूनी पक्ष और आगे की कार्यवाही

यह विवाद मूल अवॉर्ड तक सीमित न रहकर न्यायालय के निर्देशों की व्याख्या और उनके सार्वजनिक संप्रेषण से जुड़े पहलुओं तक पहुंच गया है। अब अवॉर्ड निरस्त किए जाने के बाद, यह आदेश सफ्रॉन मैजिकवर्क्स द्वारा IMPPA की विवाद निवारण प्रक्रिया के तहत शुरू की गई कार्यवाही को चुनौती देने के मामले में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है।

न्यायालय ने वाद और लंबित आवेदनों का निस्तारण कर दिया है। हालांकि, दोनों पक्षों के अधिकारों, दावों, आपत्तियों और कानून के तहत उपलब्ध कानूनी उपायों को भविष्य में विचार के लिए खुला रखा गया है।

इस मामले में सफ्रॉन मैजिकवर्क्स की ओर से अधिवक्ता रश्मिन खंडेकर, ध्रुव गांधी, मधु गडोदिया, विवेक द्विवेदी, विनिता दांडेकर और आर्यन गर्ग ने पैरवी की। उन्हें आनंद एंड नाइक द्वारा निर्देशित किया गया था। सफ्रॉन मैजिकवर्क्स के मुख्य विधि अधिकारी (Chief Legal Officer) कार्तिकेय देसाई भी कार्यवाही के दौरान उपस्थित थे।

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