राष्ट्रीय स्तर पर डॉ. ए.के. द्विवेदी की बड़ी उपलब्धि, विश्वविद्यालय कार्यपरिषद बैठक में किया गया सम्मान

इंदौर। भारत सरकार के आयुष मंत्रालय द्वारा शिलांग स्थित पूर्वोत्तर आयुर्वेद एवं होम्योपैथी संस्थान (NEIAH) की वैज्ञानिक सलाहकार समिति में सदस्य (होम्योपैथी विशेषज्ञ) के रूप में नामित किए जाने पर डॉ. ए. के. द्विवेदी को देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इंदौर की कार्यपरिषद बैठक में सम्मानित किया गया। यह उपलब्धि इंदौर सहित पूरे होम्योपैथी शिक्षा एवं चिकित्सा जगत के लिए गर्व का विषय मानी जा रही है।

कार्यपरिषद की बैठक में NEIAH, शिलांग द्वारा जारी पत्र के संदर्भ में डॉ. ए. के. द्विवेदी को इस विशिष्ट उपलब्धि के लिए सम्मान प्रदान किया गया। इस अवसर पर कुलगुरु श्री राकेश सिंघई, कुलसचिव श्री प्रज्ज्वल खरे तथा कार्यपरिषद के सभी सम्माननीय सदस्यगण उपस्थित रहे। विशेष रूप से श्री ओ. पी. शर्मा, श्री अनंत पवार, डॉ. वैशाली वायकर, श्रीमती मोनिका गौड़ सहित अन्य सभी सदस्यों ने डॉ. ए. के. द्विवेदी का स्वागत एवं सम्मान किया।

बैठक में सभी सदस्यों ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए विश्वास जताया कि डॉ. ए. के. द्विवेदी अपने दायित्वों का पूर्ण निष्ठा, समर्पण एवं दक्षता के साथ निर्वहन करेंगे तथा देश में आयुष पद्धति के विकास एवं विस्तार में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहेंगे।

बैठक के दौरान विश्वविद्यालय से संबंधित महत्वपूर्ण विषयों पर भी चर्चा की गई। इसमें विश्वविद्यालय में मानसिक स्वास्थ्य तंत्र को और अधिक सुदृढ़ करने, शिक्षकों, कर्मचारियों एवं विद्यार्थियों के लिए संस्थागत मानसिक स्वास्थ्य सहायता प्रणाली विकसित करने तथा पूर्णकालिक मनोचिकित्सक एवं क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट की उपलब्धता सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर बल दिया गया।

इसके अतिरिक्त विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों एवं परिसरों को प्राप्त अनुदानों की स्थिति, व्यय विवरण, शेष राशि तथा लैप्स होने की स्थिति में पहुंच रही राशि की अद्यतन जानकारी कार्यपरिषद के समक्ष प्रस्तुत किए जाने की आवश्यकता भी रेखांकित की गई, जिससे प्रशासनिक पारदर्शिता एवं वित्तीय उत्तरदायित्व सुनिश्चित हो सके।

साथ ही CCRH एवं आयुष मंत्रालय से प्राप्त पत्रों पर चर्चा करते हुए यह निर्णय लिया गया कि विश्वविद्यालय में होम्योपैथी अनुसंधान केंद्र स्थापित किया जाएगा। इस आशय का प्रस्ताव/पत्र कार्यपरिषद द्वारा स्वीकृत किया गया। विश्वविद्यालय द्वारा केंद्रीय होम्योपैथी अनुसंधान परिषद को इस संबंध में औपचारिक पत्र जारी किया जाएगा।

डॉ. ए. के. द्विवेदी की इस राष्ट्रीय उपलब्धि को विश्वविद्यालय एवं चिकित्सा जगत ने सम्मान एवं गर्व के साथ स्वीकार किया है तथा इसे आयुष चिकित्सा पद्धति की बढ़ती वैश्विक एवं राष्ट्रीय स्वीकार्यता का सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।

Leave a Comment