प्लेसमेंट से परफॉर्मिंग आर्ट्स तक: डॉ. ए.के. द्विवेदी की पहल से DAVV में बदलाव की नई दिशा

इंदौर। देवी अहिल्या विश्वविद्यालय की कार्यपरिषद में सदस्य के रूप में डॉ. ए.के. द्विवेदी ने विद्यार्थियों के रोजगार, शोध, आधुनिक शिक्षा, मानसिक स्वास्थ्य, नशामुक्ति, स्वास्थ्य जागरूकता और भारतीय कला-संस्कृति से जुड़े कई विषयों को लगातार प्रमुखता से उठाया। उनके सुझावों के आधार पर विश्वविद्यालय में कई महत्वपूर्ण पहल आगे बढ़ी हैं।

डॉ. द्विवेदी ने कार्यपरिषद में प्लेसमेंट को प्रमुख एजेंडा बनाने पर जोर दिया। उनका कहना था कि केवल प्लेसमेंट की संख्या नहीं, बल्कि विद्यार्थियों को बेहतर पैकेज और गुणवत्तापूर्ण रोजगार मिलना चाहिए। उनके सुझाव के बाद कार्यपरिषद की बैठक में पहली बार विश्वविद्यालय के प्लेसमेंट पर विस्तृत प्रस्तुतीकरण किया गया, जिसमें विभागवार प्लेसमेंट, कंपनियों और रोजगार की स्थिति की जानकारी रखी गई।

छात्राओं के लिए अलग प्लेसमेंट ड्राइव शुरू करने का सुझाव भी उन्होंने दिया। इसके बाद छात्राओं के लिए विशेष प्लेसमेंट ड्राइव आयोजित की गई और कंपनियों को आमंत्रित कर अधिक रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने का प्रयास हुआ।

रिसर्च की गुणवत्ता पर भी जोर

डॉ. द्विवेदी ने विश्वविद्यालय में शोध की गुणवत्ता और उसके प्रभाव को बढ़ाने की जरूरत उठाई। इसके बाद विभिन्न विभागों में प्रकाशित रिसर्च पेपर, उनके प्रकाशन तथा इंडेक्स वैल्यू की जानकारी कार्यपरिषद में प्रस्तुत की गई। उनका जोर इस बात पर रहा कि विश्वविद्यालय में ऐसा शोध हो, जिसका लाभ समाज और विद्यार्थियों को मिल सके।

समय के अनुरूप नए कोर्स और स्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर

विद्यार्थियों की बदलती जरूरतों और रोजगार की संभावनाओं को देखते हुए डिमांड बेस्ड नए पाठ्यक्रम शुरू करने, अधिक मांग वाले पाठ्यक्रमों में सीटें बढ़ाने और स्मार्ट क्लासरूम विकसित करने की दिशा में भी उन्होंने सुझाव दिए। AI एवं Machine Learning Lab, EMRC के लिए आधुनिक ऑडियो-विजुअल उपकरण और सर्वर जैसी तकनीकी सुविधाओं के प्रस्तावों को भी आगे बढ़ाया गया।

उन्होंने विश्वविद्यालय में आधुनिक Central Library की स्थापना का विषय भी उठाया, जिस पर योजना बनाई जा रही है। साथ ही विश्वविद्यालय में School of AYUSH की स्थापना की आवश्यकता भी कार्यपरिषद में रखी।

School of Performing Arts: कला-संस्कृति को नई पीढ़ी से जोड़ने की पहल

डॉ. द्विवेदी की प्रमुख पहलों में School of Performing Arts की स्थापना भी शामिल है। उन्होंने इसकी संकल्पना से लेकर प्रस्ताव और पाठ्यक्रम निर्माण तक विश्वविद्यालय प्रशासन के समक्ष लगातार विषय रखा।

अब शैक्षणिक सत्र 2026-27 से चार वर्षीय एकीकृत BPA पाठ्यक्रम शुरू हो रहा है। इसमें विद्यार्थियों को शास्त्रीय नृत्य, हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत, गायन, वादन, नाट्य सहित भारतीय कला परंपराओं का सैद्धांतिक और व्यावहारिक अध्ययन कराया जाएगा। इंटर्नशिप और आधुनिक कला माध्यमों के माध्यम से विद्यार्थियों के लिए रोजगार एवं रचनात्मक करियर की संभावनाएं भी विकसित होंगी।

डॉ. द्विवेदी के अनुसार, यह केवल एक नया विभाग नहीं, बल्कि भारतीय कला एवं सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी से जोड़ने और उसके संरक्षण-संवर्धन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

मानसिक स्वास्थ्य और नशामुक्ति को भी बनाया एजेंडा

विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर उन्होंने विश्वविद्यालय में मनोवैज्ञानिक की आवश्यकता का विषय उठाया। इसके बाद विश्वविद्यालय में Psychologist की नियुक्ति की गई। वहीं विद्यार्थियों को नशे से दूर रखने के लिए नशामुक्ति जागरूकता अभियान चलाने का सुझाव भी उन्होंने दिया, जिसे विश्वविद्यालय ने अपनाया।

DAVV कैंपस से एनीमिया जागरूकता अभियान की शुरुआत

डॉ. द्विवेदी द्वारा विश्वविद्यालय परिसर से एनीमिया जागरूकता अभियान की शुरुआत भी की गई। अभियान के माध्यम से विद्यार्थियों और शिक्षकों को एनीमिया, पोषण एवं स्वास्थ्य के प्रति जागरूक किया गया।

विद्यार्थी-केंद्रित विकास पर जोर

डॉ. द्विवेदी का कहना है कि विश्वविद्यालय का विकास केवल भवन और संसाधनों के विस्तार से नहीं, बल्कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, रोजगारपरक पाठ्यक्रम, शोध, नवाचार, मानसिक स्वास्थ्य, भारतीय कला-संस्कृति और विद्यार्थियों के लिए नए अवसरों के विस्तार से होना चाहिए।

कार्यपरिषद में उनके कार्यकाल के दौरान प्लेसमेंट, रिसर्च, नए पाठ्यक्रम, सीट वृद्धि, स्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर, Central Library, School of AYUSH, School of Performing Arts, मानसिक स्वास्थ्य, नशामुक्ति और एनीमिया जागरूकता जैसे विषय लगातार चर्चा के केंद्र में रहे।

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