शैल्बी हॉस्पिटल के डॉक्टरों ने की दुर्लभ सर्जरी

130 डिग्री टेढ़ी रीढ़, पैरों में लकवा, 13 घंटे की सर्जरी के बाद फिर चलने लगा बच्चा

इंदौर, 31 जुलाई 2026। बच्चों में रीढ़ की हड्डी का टेढ़ापन अक्सर शुरुआत में सामान्य समस्या समझकर नजरअंदाज कर दिया जाता है, लेकिन समय रहते इलाज न मिलने पर यही परेशानी गंभीर रूप ले सकती है। ऐसी ही एक दुर्लभ और बेहद चुनौतीपूर्ण स्थिति का सफल उपचार शैल्बी मल्टी स्पेशलिटी हॉस्पिटल के स्पाइन सर्जरी विभाग में किया गया, जहां 130 डिग्री तक टेढ़ी हो चुकी रीढ़ वाले एक बच्चे की करीब 13 घंटे चली कठिन सर्जरी के बाद उसे फिर से चलने लायक बनाया गया।

शैल्बी मल्टी स्पेशलिटी हॉस्पिटल इंदौर के स्पाइन सर्जन डॉ. प्रणव कुमार के अनुसार, “बच्चे को इडियोपैथिक स्कोलियोसिस था, जो स्कोलियोसिस का सबसे सामान्य प्रकार माना जाता है। आम तौर पर 50 डिग्री से अधिक रीढ़ के टेढ़ेपन को गंभीर श्रेणी में रखा जाता है, जबकि इस बच्चे की रीढ़ लगभग 130 डिग्री तक मुड़ चुकी थी। एक्स-रे और सीटी स्कैन में स्थिति बेहद गंभीर मिली। शुरुआत में सर्जरी का जोखिम काफी अधिक था, इसलिए डॉक्टरों ने पूरी सावधानी के साथ इलाज की योजना बनाई। इसी दौरान बच्चे के पैरों में लकवे के लक्षण आने लगे और उसे पेशाब करने में भी परेशानी होने लगी। हालत बिगड़ने पर विशेषज्ञों की टीम ने विस्तृत योजना बनाकर ऑपरेशन करने का निर्णय लिया।”

सर्जरी सुबह करीब 10 से 11 बजे के बीच शुरू हुई और रात लगभग 11 बजे तक चली। पहले चरण में रीढ़ की हड्डी को सामने की ओर से, हृदय के नीचे वाले हिस्से के पास पहुंचकर मुक्त किया गया। इसके बाद पीछे की ओर से स्क्रू लगाकर रीढ़ को सीधा करने का प्रयास किया गया। जब इससे भी अपेक्षित सुधार नहीं हो सका तो रीढ़ की कुछ हड्डियों को नियंत्रित तरीके से काटकर उनका दोबारा संतुलन बनाया गया। कई चरणों में चली इस कठिन प्रक्रिया के बाद डॉक्टर रीढ़ को संतुलित स्थिति में लाने में सफल रहे। सर्जरी के बाद बच्चे की हालत लगातार सुधर रही है। ऑपरेशन के चार दिन बाद ही उसके पैरों में संवेदनाएं लौट आईं और वह पैरों को चलाने लगा है।

आगे डॉ. कुमार ने कहा, “बच्चों की रीढ़ में दिखाई देने वाले किसी भी तरह के टेढ़ेपन को सामान्य समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। यदि शुरुआती अवस्था में इसकी पहचान हो जाए तो कई मामलों में व्यायाम और नियमित उपचार से स्थिति को बढ़ने से रोका जा सकता है। विशेष रूप से 5 से 7 वर्ष और 12 से 15 वर्ष की उम्र के दौरान बच्चों की हड्डियों की वृद्धि तेज होती है, इसलिए इस समय स्कोलियोसिस तेजी से बढ़ सकता है। इस बच्चे के मामले में भी बीमारी लगातार बढ़ती रही और आख़िरकार उसके पैरों में लकवे जैसी स्थिति उत्पन्न हो गई। समय पर जांच और उपचार से ऐसी गंभीर परिस्थितियों से बचा जा सकता है।”

शैल्बी मल्टी स्पेशलिटी हॉस्पिटल इंदौर के सीओओ श्री वेंकटेश्वर, डिप्टी सीएओ श्री अभिषेक चौरसिया एवं मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. विवेक जोशी ने कहा, “शैल्बी हॉस्पिटल में हमारा प्रयास प्रत्येक मरीज को समय पर, सुरक्षित और विश्वस्तरीय चिकित्सा सुविधा प्रदान करना है। इस तरह की चुनौतीपूर्ण सर्जरी हमारे विशेषज्ञ डॉक्टरों, अत्याधुनिक तकनीक और समर्पित मेडिकल टीम के सामूहिक प्रयास का परिणाम है। भविष्य में भी हम ऐसे कठिन मामलों के सफल उपचार के माध्यम से मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध रहेंगे।”

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