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प्रणायाम से तन, सत्संग से मन स्वस्थ होता है: संत रामप्रसाद
इन्दौर. रामचरणजी महाराज एक महान संत ही नहीं वरन् एक बहुत बड़े वैज्ञानिक भी थे क्योंकि उन्होंने पांच बार दण्डवत प्रणाम का विधान बताया जिससे सूर्य नमस्कार के 12 में से 7 आसान आसानी पूर्वक हो जाते हैं. इससे शरीर की नाडिय़ां खुल जाती है. उन्होंने श्वास से राम नाम सुमिरन की विधि भी बताई जिससे प्राणायाम हो जाता है. प्रणायाम से तन व सत्संग से मन स्वस्थ हो जाता है. इसलिए व्यक्ति के जीवन में एक संत, एक ग्रंथ, एक मंत्र, एक पंथ होना अति आवश्यक है। स्वस्थ शरीर में ही देवता का वास होता है.
उक्त विचार बड़ोदा से आए संत रामप्रसादजी महाराज ने छत्रीबाग स्थित श्रीरामद्वारा में चल रहे अंतर्राष्ट्रीय रामस्नेही संप्रदाय के मूलआचार्य रामचरण महाराज का त्रिशताब्दी प्राकट्य महोत्सव के छठे दिन सभी भक्तों को संबोधित करते हुए व्यक्त किए. वहीं कथा में रामप्रसादजी महाराज के शिष्य बाल संत श्री ज्ञानीरामजी ने सत्संग के दौरान अपने मधुर भजनों से सभी श्रद्धालुओं को मंत्र मुग्ध कर दिया. श्रीरामद्वारा छत्रीबाग से जुड़े देवेंद्र मुछाल, रामसहाय विजयवर्गीय, रामनिवास मोढ़, एवं गीरधर गोपाल नेमा ने जानकारी देते हुए बताया कि अंतर्राष्ट्रीय रामस्नेही संप्रदाय के मूलआचार्य रामचरणजी महाराज का त्रिशताब्दी प्राकट्य महोत्सव महोत्सव का आयोजन 5 से 11 मई तक आयोजित किया जा रहा है. इसमें बड़ोदा से आए संत रामप्रसादजी महाराज भक्तों को श्रीमद्भागवत के 11वें स्कंध के राजा जनक एवं नव योगेश्वर के संवाद को मुख्य केंद्र में रखकर कथा का रसपान करा रहे हैं. वहीं रामद्वारा छत्रीबाग में अंतर्राष्ट्रीय श्री रामस्नेही संप्रदाय के मूलआचार्य श्री रामचरणजी महाराज का त्रिशताब्दी प्राकट्य महोत्सव का समापन 11 मई को होगा. इसमें हजारों की संख्या में मातृशक्तियां शामिल होंगी। समापन अवसर पर शुक्रवार को संत रामप्रसादजी महाराज भक्तों को प्रतिदिन सुबह 8.30 से 9.30 बजे तक कथा का रसपान करा रहे हैं.


