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फेमिना ने वर्किंग मिलेनियल मदर पर एक रिसर्च रिपोर्ट जारी की
~ फेमिना की ओर से “ऑल अबाउट वीमन” शीर्षक से जारी रिसर्च रिपोर्ट में नौकरी करने वाली मिलेनियल मदर्स के जीवन के हर पहलू, जैसे जीवनशैली, कामकाजी और निजी जीवन में संतुलन बनाने, संबंधों, आदतों पर रोशनी डाली गई है ~
भारत में महिलाओं के प्रमुख ब्रांड फेमिना को हमेशा से लेडीज की सभी जरूरतों को पूरा करने के लिए फाइनल डेस्टिनेशन के रूप में जाना जाता है। विशेषज्ञों ने भारतीय महिलाओं पर “ऑल अबाउट वीमन” शीर्षक से रिपोर्ट जारी की है जिसमें मिलेनियल मदर्स पर फोकस किया गया है।
फेमिना द्वारा जारी की गई इस रिसर्च रिपोर्ट में आधुनिक कामकाजी माताओं की जिंदगी का गहराई से विश्लेषण किया गया है। रिपोर्ट में आधुनिक नौकरीपेशा माताओं के जीवन के कई पहलुओं, जैसे उपभोक्ता व्यवहार, जीवनशैली, आदतों, नया सामान खरीदने की ताकत और आपसी संबंधों समेत कई पक्षों की झलक पेश की गई है।
लीड कैंप वेंचर्स द्वार संचालित रिसर्च स्टडी और उसके नतीजे गहन मात्रात्मक और गुणात्मक शोध का नतीजा है। यह शोध कई महीनों तक देश के 10 बड़े शहरों या मेट्रो और छोटे शहरों में रहने वाली 1500 से ज्यादा शहरी महिलाओं पर किया गया। शोध के नतीजों ने भारतीय घरों में मातृत्व और अभिभावकों के बच्चों के पालन पोषण के बदलते तरीकों की झलक पेश की।
इन विषयों को परिवार के प्रकार के आधार पर विभाजित किया गया। इसके बाद इन विषयों को कई अन्य तरीकों से वर्गीकृत किया गया। इस वर्गीकरण में कामकाजी और निजी जीवन में संतुलन बनाना, बच्चों को प्राथमिकता देना, पति–पत्नी के बीच संबंध, खुद की देखभाल और डिजिटल कॉन्टेंट की खपत जैसे विषयों को शामिल किया गया।
मिलेनियल वर्किंग मदर्स की जीवन शैली
आधुनिक नौकरीपेशा कामकाजी महिलाओं की लाइफस्टाइल के दिलचस्प उदाहरण पेश करते हुए रिपोर्ट में खुद की देखभाल के प्रति महिलाओं की बढ़ती दिलचस्पी को भी उभारा गया है। रिपोर्ट में मुख्य रूप से यह बताया गया है कि टाइम की कमी, बिजी शेड्यूल और थकाने वाले डेली रूटीन के बावजूद इन महिलाओं ने स्वस्थ खान-पान की आदतों से कोई समझौता नहीं किया। रिपोर्ट के अनुसार कामकाजी माताएं अपने और अपने परिवार की सेहत के प्रति काफी जागरूक हैं।
कामकाजी और निजी जीवन में संतुलन
दफ्तर की जिंदगी और व्यक्तिगत जीवन में तालमेल के सवाल पर शोध में शामिल महिलाओं ने बताया कि वह अपने परिवार और सहयोगियों की सक्रिय मदद से नौकरीपेशा और निजी जिंदगी में संतुलन बनाने में कामयाब हो पाई हैं।
बच्चे सबसे पहले हैं
इसके अलावा मिलेनियल नौकरीपेशा माताओं के लिए उनके बच्चे पहली प्राथमिकता है। अपनी व्यस्तता में से समय निकालकर आधुनिक दौर के माता-पिता यह सुनिश्चित करते हैं कि कोई एक अभिभावक बच्चों की निगरानी के लिए उनके साथ हर समय मौजूद रहे।
वर्ल्ड वाइड मीडिया के सीईओ श्री दीपक लांबा ने ऑल अबाउट वीमन रिपोर्ट के बारे में विस्तार से बताते हुए कहा, “फेमिना ने एक ब्रांड के तौर पर हमेशा से भारतीय महिलाओं की नब्ज पहचानी है। यह रिसर्च रिपोर्ट इसका एक और सबूत है। “ऑल अबाउट वीमन” ब्रांड के सफर में नया अध्याय है, जहां हमने महिलाओं की जिंदगी के कई पहलुओं का गहराई से विश्लेषण करते हुए ट्रेंड्स की भविष्यवाणी के साथ रिपोर्ट तैयार की है। रिपोर्ट को तैयार करने में आधुनिक कामकाजी महिलाओं की जिंदगी से जुड़ाव बढ़ाने का अनुकूल नजरिया अपनाया गया है।”
फेमिना की संपादक और चीफ कम्युनिटी ऑफीसर तान्या चैतन्य ने कहा, “60 वर्षों की समृद्ध विरासत के साथ फेमिना नामक महिलाओं की पत्रिका दशकों से अपने पाठकों को लीक से हटकर बोल्ड पाठ्य सामग्री देने के मामले में पथप्रदर्शक रही है। रिपोर्ट के नतीजों ने महिलाओं को पढ़ने के लिए दशकों से प्रदान की जा रही पाठ्य सामग्री के चयन की हमारी रणनीति की पुष्टि की है और उसे सही ठहराया है। इस रिपोर्ट ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि भारतीय महिलाओं को जितनी अच्छी तरह से हम जानते हैं, उतनी अच्छी तरह से कोई भी नहीं जानता।”
फेमिना के जनवरी के अंक में शोध के नतीजों का गहराई से विश्लेषण और आकलन किया जाएगा। इससे आधुनिक कामकाजी माताओं के लिए तैयार हमारी पाठ्य सामग्री की भी पुष्टि होगी। यह अंक महिलाओं की जरूरतों को समझते हुए उनकी आवश्यकता अनुसार पाठ्य सामग्री चुनने पर केंद्रित हमारी रणनीति पर भी प्रकाश डालेगा।
- मिलेनियल मदर्स अपने बच्चों को वीकेंड को छोड़कर सप्ताह के बाकी दिनों में 66 मिनट का समय स्क्रीन के सामने बिताने की इजाजत देती है। वीकेंड में वह अपने बच्चों को 97 मिनट का समय टीवी, कंप्यूटर या मोबाइल स्क्रीन के सामने बिताने की मंजूरी देती है।
- 67 फीसदी से ज्यादा मातायें यह सुनिश्चित करती हैं कि उनके बच्चों को पौष्टिक भोजन खाने को मिले।
- मिलेनियल मदर्स खुद की देखभाल के लिए भी पर्याप्त समय देती हैं। लगभग सभी महिलाएं ऑफिस जाते समय अपने साथ मेकअप का बेसिक सामान, जैसे पाउडर या क्रीम वगैरह ले जाती हैं।
- 85 फीसदी आधुनिक नौकरीपेशा माताओं ने कभी-कभार ही खाना बनाया है या घर पर कभी खाना नहीं बनाया।


