- Netizens hail Varun Dhawan’s acting in Hai Jawani Toh Ishq Hona Hai call it a ‘Paisa Vasool Entertainer'
- June Calls for a Laugh: The Best Comedy Titles to Stream on Netflix
- एका मोबिलिटी ने पुणे प्लांट से 1,000वें एससीवी को हरी झंडी दिखाई
- मोटोरोला ने लॉन्च किया edge 70 pro+, जो 2026 का सबसे स्टाइलिश फ्लैगशिप किलर स्मार्टफोन है
- जावेद जाफरी ने सरोज खान को दिया श्रेय, कहा उन्होंने सिखाया कि डांस में एक्सप्रेशन कितनी अहम है
एलएनसीटी मेडिकल कॉलेज के एमबीबीएस के प्रथम वर्ष के छात्र-छात्राओं ने जानी-समझी आयुष चिकित्सा पद्धतियों की विशेषताएं
इम्पोर्टेंस ऑफ अल्टरनेट हेल्थ केयर सिस्टम (होम्योपैथी) का महत्व विषय पर एमबीबीएस के छात्र-छात्राओं को डॉ. द्विवेदी ने दिया व्याख्यान
इंदौर। एलएनसीटी मेडिकल कॉलेज के एमबीबीएस प्रथम वर्ष के विद्यार्थियों के लिए फाउंडेशन कोर्स के अंतर्गत शुक्रवार को एक विशेष व्याख्यान आयोजित किया गया। इम्पोर्टेंस ऑफ अल्टरनेट हेल्थ केयर सिस्टम (होम्योपैथी) इन हेल्थ का महत्व विषय पर आयोजित इस व्याख्यान के वक्ता वैज्ञानिक सलाहाकर बोर्ड, केंद्रीय होम्योपैथिक अनुसंधान परिषद, आयुष मंत्रालय भारत सरकार के सदस्य एवं सुप्रसिद्ध होम्योपैथिक चिकित्सक डॉ. एके द्विवेदी थे।
डॉ. द्विवेदी ने अपने संबोधन में कहा कि चिकित्सकीय विद्यार्थियों के लिए जिस तरह से मेडिकल के विभिन्न विषयों की जानकारी होना आवश्यक है उसी तरह से उन्हें विभिन्न चिकित्सा पद्धतियों की भी जानकारी होना अति आवश्यक है। एक परिपक्व चिकित्सक को यह समझ होना जरूरी है कि उनके सामने बैठा मरीज किस चिकित्सा पद्धति से जल्दी से ठीक हो सकता है। साथ ही मरीज के साथ बातचीत ऐसे करना चाहिए कि वो आपको डॉक्टर कम दोस्त व अपना हमदर्द समझे। ऐसा करने से मरीज आपको निसंकोच होकर उसकी बीमारी से संबंधित हर बात साझा करेगा।

डॉ. द्विवेदी ने बताया कि मेडिकल के क्षेत्र में सभी चिकित्सा पद्धतियों का अपना-अपना महत्व है और उनसे ठीक होने की अपनी-अपनी समय सीमा है। इसके अलावा सभी चिकित्सा पद्धतियों के गुण एवं दोष भी है। वहीं बात आयुष चिकित्सा की करे तो आयुष का अभिप्रया आयुर्वेद, योगा, यूनानी, सिद्ध एवं होम्योपैथी से हैं। आयुष मंत्रालय इन सभी स्वास्थ्य प्रणालियों के संवर्द्धन एवं विकास, इन प्रणालियों के माध्यम से आमजन को स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करना तथा इनसे संबंधित चिकित्सा शिक्षा के संचालन का कार्य देखता है। डॉ. द्विवेदी ने बताया कि योग और आयुर्वेद हमारे भारत की प्राचीनत चिकित्सा पद्धति है। इन्हें अपनाने से हम लंबे समय तक निरोगी रह सकते हैं। हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ती है। वहीं एलोपैथी के साथ होम्योपैथिक एवं फिजियोथैरेपी अपनाने से हम शीघ्र ही स्वस्थ हो सकते हैं। कार्यक्रम का संचालन एवं स्वागत मेडिकल कॉलेज की डीन डॉ. साधना सावंतसरकर ने किया।
होम्योपैथिक चिकित्सा व होम्योपैथिक दवा बनाने का तरीका बताया
डॉ. द्विवेदी ने अपने संबोधन में बताया कि होम्योपैथिक चिकित्सा का अविष्कार क्रिश्चियन फ्राइडरिक सैम्युअल हैनिमेन ने किया था जो स्वयं एक एलोपैथी चिकित्सक थे। जिन्होंने मरीजों के शीघ्र स्वास्थ लाभ के लिए चिकित्सकों को समूल प्रयास करने की बात कही। डॉ. द्विवेदी ने बताया कि जहां होम्योपैथिक दवाई मीठी होने के कारण बच्चों को अति प्रिय लगती है वहीं शुगर के मरीजों को यही दवाइयां डिस्टिल वाटर में दी जाती है। डॉ. द्विवेदी ने होम्योपैथिक दवाइयां किस तरह बनाई जाती है तथा डेसिमल स्केल, सेंटिसिमल स्केल व 50 मिलिसिमल स्केल के बारे में छात्रा-छात्राओं को जानकारी दी। बताया कि होम्योपैथिक दवाइयां पोटेंटाइस होने की वजह से इसका कोई साइड इफेक्ट शरीर पर नहीं होता है।
डॉ. द्विवेदी ने स्वयं की लिखी पुस्तक मानव शरीर रचना विज्ञान डीन डॉ. सावंतसरकर को भेंट की
व्याख्यान के पश्चात डॉ. ए.के. द्विवेदी द्वारा हिंदी मानव शरीर रचना विज्ञान किताब लिखी गई पुस्तक कॉलेज की डीन डॉ. साधना सावंतसरकर को भेंट की। डॉ. सावंतसरकर ने पुस्तक देखने के बाद डॉ. द्विवेदी द्वारा मेडिकल के छात्र-छात्राओं के लिए हिंदी में लिखी पुस्तक की काफी प्रशंसा की। साथ ही डॉ. सावंतसरकर ने कहा कि डॉ. द्विवेदी द्वारा लिखी गई यह पुस्तक हिन्दी में एमबीबीएस की पढ़ाई करने वाले प्रथम छात्र-छात्राओं के लिए बहुत उपयोगी साबित होगी। इस अवसर पर कॉलेज के पीएसएम विभाग की डॉ. नीलामा शर्मा भी उपस्थित थीं।


