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मस्क्युलर डिस्ट्रॉफी के विरुद्ध स्टेम सेल थेरेपी एक नई उम्मीद
इंदौर. मस्क्युलर डिस्ट्रॉफी के विरुद्ध स्टेम सेल थेरेपी एक नई उम्मीद है. मध्य प्रदेश के मस्क्युलर डिस्ट्रॉफी के मरीज मयंक तिवारी को अपने पैरों पर खड़ा होने और वापस स्कूल जाने में स्टेम सेल थेरेपी से सफलता मिली है.
यह कहना है न्यूरोजेन ब्रेन एंड स्पाइन इंस्टीट्यूट की सर्जिकल सेवाओं की प्रमुख डॉ. रिचा बनसोड का. रिचा ने पत्रकारों से चर्चा करते हुए बताया कि मस्क्युलर डिस्ट्रॉफी एक प्रगतिशील हालत है, जो गंभीर रूप से दुर्बल कर देती है और व्यक्तियों के जीवनकाल और जीवन की गुणवत्ता को प्रभावित करती है. वास्तव में डचीन्न मस्क्युलर डिस्ट्रॉफी को एक ऐसी लाइलाज बीमारी करार दिया गया है जो युवा जीवन में कटौती करती है.
लाइलाज बीमारी मांसपेशियों के सतत अध:पतन की प्रक्रिया का कारण बनती है, जिसके परिणामस्वरूप गतिशीलता में कमी आती है, सांस की समस्या होती है, हार्ट फेल्योर और अंत में अकाल मृत्यु की स्थिति बनती है.
न्यूरोजेन बीएसआई की स्थापना सुरक्षित और प्रभावी तरीके से स्टेम सेल थेरेपी के जरिए असाध्य न्यूरोलॉजिकल विकारों से पीडि़त मरीजों की मदद के लिए, उनके लक्षण और शारीरिक विकलांगता से राहत प्रदान करने के लिए की गई है.
उन्होंने बताया कि न्यूरोजेन ब्रेन एंड स्पाइन इंस्टीट्यूट मध्य प्रदेश में रहने वाले न्यूरोलॉजिकल विकारों से पीडि़त सभी मरीजों के लिए 21 अक्टूबर, 2018 को भोपाल में एक नि:शुल्क कार्यशाला और ओपीडी परामर्श शिविर का आयोजन कर रहा है. ताकि उन्हें सिर्फ परामर्श के उद्देश्य से मुंबई तक की यात्रा ने करना पड़े.
चित्र- स्टेम सेल.


