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ओरिएंटल यूनिवर्सिटी की शोध-संस्कृति का प्रमाण: बी.टेक प्रथम वर्ष सीएसई विद्यार्थियों ने IIM इंदौर के अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में शोध पत्र प्रस्तुत किया
इंदौर। विद्यार्थियों में प्रारंभिक स्तर से ही अनुसंधान क्षमता विकसित करने और अकादमिक उत्कृष्टता को प्रोत्साहित करने की अपनी प्रतिबद्धता को सशक्त करते हुए Oriental University, Indore के बी.टेक प्रथम वर्ष कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग (CSE) के विद्यार्थियों ने Indian Institute of Management Indore में आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में शोध पत्र प्रस्तुत कर विश्वविद्यालय को गौरवान्वित किया।
विद्यार्थियों ने “Youth for Impact: Social Innovation and Inclusive Leadership – Empowering Youth, Transforming Futures” शीर्षक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में “Youth as Catalysts: Identity, Equity, and Ethics” उप-विषय के अंतर्गत अपना शोध प्रस्तुत किया। स्नातक के प्रथम वर्ष में होने के बावजूद विद्यार्थियों ने जिस आत्मविश्वास, विश्लेषणात्मक क्षमता और अकादमिक परिपक्वता का परिचय दिया, वह ओरिएंटल यूनिवर्सिटी की छात्र-केंद्रित एवं मार्गदर्शन-आधारित शिक्षा प्रणाली को दर्शाता है।
“Equity in Education: Examining the Digital Divide Among Urban and Rural Youth” शीर्षक शोध पत्र की लेखिका साक्षी मिश्रा रहीं, जबकि अश्वाई सिंह, शैलि सिंह और रेहान खान सह-लेखक रहे। यह सभी विद्यार्थी बी.टेक प्रथम वर्ष सीएसई के हैं। शोध में शहरी एवं ग्रामीण युवाओं के बीच डिजिटल संसाधनों की उपलब्धता में असमानता तथा उसके शैक्षणिक समान अवसरों पर पड़ने वाले प्रभाव का अध्ययन किया गया। इस अध्ययन में मिश्रित शोध पद्धति अपनाई गई, जिसमें PRISMA मॉडल को विश्लेषणात्मक आधार के रूप में प्रयोग किया गया।
इस उल्लेखनीय उपलब्धि के पीछे ओरिएंटल यूनिवर्सिटी के शिक्षकों का सतत मार्गदर्शन और सहयोग रहा। श्री अभिषेक वैष्णव ने शोध लेखन, APA फॉर्मेटिंग, प्लेज़रिज़्म सुधार, संरचना, संरेखण एवं मॉक प्रेज़ेंटेशन के माध्यम से विद्यार्थियों का निरंतर मार्गदर्शन किया। डॉ. शैलेन्द्र सिंह, डीन इंजीनियरिंग, ने शोध की आधारशिला को सुदृढ़ किया और नियमित रूप से प्रगति की समीक्षा की। डॉ. अतुल अग्रवाल, विभागाध्यक्ष सीएसई ने समस्या एवं समाधान खंड के विकास में मार्गदर्शन प्रदान किया, जबकि डॉ. ममता मीना, विभागाध्यक्ष सीएसए ने शोध की विश्लेषणात्मक स्पष्टता को और सशक्त किया। श्री विशाल अलपुरिया ने R प्रोग्रामिंग के माध्यम से PRISMA मॉडल के तकनीकी क्रियान्वयन में सहयोग दिया तथा सुश्री आस्था मैडम ने प्रस्तुति संरचना में मार्गदर्शन किया।
सम्मेलन के दौरान विद्यार्थियों ने अकादमिक सत्रों, राउंड-टेबल चर्चाओं तथा अंतरराष्ट्रीय विद्वानों के साथ संवाद में सक्रिय भागीदारी की। प्रस्तुति दिवस पर विद्यार्थियों की टीमवर्क, विषय की प्रासंगिकता एवं शोध पद्धति की स्पष्टता को निर्णायक मंडल द्वारा सराहा गया। वरिष्ठ शोधार्थियों एवं पीएचडी विद्वानों के साथ प्रमाणपत्र प्राप्त करना प्रथम वर्ष के विद्यार्थियों के लिए एक अत्यंत गौरवपूर्ण उपलब्धि रही।


