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विश्वविद्यालय की साख से समझौता नहीं, अनुशासनहीनता पर होगी सख्त कार्रवाई : डॉ. ए.के. द्विवेदी
कार्यपरिषद में विद्यार्थियों के लिए संकल्प पत्र, मानसिक स्वास्थ्य हेतु साइकोलॉजिस्ट नियुक्ति, सुरक्षा व्यवस्था सुदृढ़ करने और ऑनलाइन परीक्षा प्रणाली लागू करने पर सहमति
इंदौर। देवी अहिल्या विश्वविद्यालय की कार्यपरिषद की बैठक में विश्वविद्यालय की गरिमा, अनुशासन, सुरक्षा, मानसिक स्वास्थ्य एवं विद्यार्थियों के व्यक्तित्व निर्माण से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। कार्यपरिषद सदस्य डॉ. ए.के. द्विवेदी ने स्पष्ट कहा कि विश्वविद्यालय की साख एवं प्रतिष्ठा से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा तथा विश्वविद्यालय की छवि को नुकसान पहुंचाने वाले छात्रों अथवा शिक्षकों के विरुद्ध आवश्यकतानुसार सख्त कदम उठाए जाएंगे।
बैठक में पिछले माह एवं इस माह विश्वविद्यालय के दो विभागों में घटित अप्रिय घटनाओं पर गंभीर चिंता व्यक्त की गई। डॉ. द्विवेदी ने कहा कि ऐसी घटनाएं विश्वविद्यालय की प्रतिष्ठा को प्रभावित करती हैं और इनके प्रति शून्य सहिष्णुता की नीति अपनाई जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल ज्ञान प्रदान करना नहीं, बल्कि चरित्र, संस्कार और उत्तरदायित्व का विकास करना भी है।
इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए डॉ. द्विवेदी ने आगामी शैक्षणिक सत्र से प्रत्येक विद्यार्थी एवं उसके अभिभावक से प्रवेश के समय “देवी अहिल्या विद्यार्थी संकल्प पत्र” भरवाने का प्रस्ताव रखा। इस संकल्प पत्र में विद्यार्थियों द्वारा अनुशासन, नैतिकता, महिला सम्मान, सामाजिक समरसता, पर्यावरण संरक्षण, नशामुक्ति, डिजिटल तकनीक के सदुपयोग तथा विश्वविद्यालय की गरिमा बनाए रखने के लिए प्रतिबद्धता व्यक्त की जाएगी। कुलगुरु सहित कार्यपरिषद के सभी सदस्यों ने इस अभिनव पहल का स्वागत करते हुए इसकी सराहना की।
डॉ. द्विवेदी ने बैठक में कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के वर्तमान युग में तकनीकी दक्षता के साथ-साथ मानवीय मूल्यों, नैतिकता एवं सामाजिक उत्तरदायित्व का विकास भी अत्यंत आवश्यक है। विश्वविद्यालय केवल डिग्री प्रदान करने का संस्थान नहीं, बल्कि राष्ट्र के भावी नागरिकों के चरित्र निर्माण का केंद्र भी है। उन्होंने कहा कि पुण्यश्लोक देवी अहिल्याबाई होलकर के नाम पर स्थापित विश्वविद्यालय से ऐसे विद्यार्थी निकलने चाहिए जो सफल पेशेवर होने के साथ-साथ आदर्श, संवेदनशील और उत्तरदायी नागरिक भी बनें।
बैठक में विद्यार्थियों एवं शिक्षकों के मानसिक स्वास्थ्य संवर्धन तथा नशामुक्ति जागरूकता के लिए विश्वविद्यालय में एक योग्य साइकोलॉजिस्ट नियुक्त करने पर भी सहमति बनी। यह विशेषज्ञ विद्यार्थियों एवं शिक्षकों के लिए मानसिक स्वास्थ्य परामर्श, तनाव प्रबंधन, व्यक्तित्व विकास, नशामुक्ति जागरूकता, व्यवहार सुधार एवं अन्य मनोवैज्ञानिक सहायता कार्यक्रम संचालित करेगा। इस प्रस्ताव को भी सभी सदस्यों ने समयानुकूल एवं अत्यंत आवश्यक कदम बताया।
विश्वविद्यालय परिसर की सुरक्षा को और अधिक मजबूत बनाने के लिए विश्वविद्यालय की बाउंड्री वॉल की ऊंचाई बढ़ाने तथा सुरक्षा व्यवस्था में तैनात कर्मचारियों की संख्या बढ़ाने का निर्णय भी लिया गया। कार्यपरिषद ने माना कि सुरक्षित एवं अनुशासित शैक्षणिक वातावरण विद्यार्थियों के समग्र विकास के लिए आवश्यक है।
बैठक में परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी, तकनीक-सक्षम एवं प्रभावी बनाने के उद्देश्य से भविष्य में परीक्षा संबंधी संपूर्ण प्रक्रिया को ऑनलाइन प्रणाली से संचालित करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। इससे विद्यार्थियों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी तथा प्रशासनिक कार्यों में दक्षता एवं पारदर्शिता बढ़ेगी।
कार्यपरिषद में लिए गए इन निर्णयों को विश्वविद्यालय में संस्कार, उत्तरदायित्व, अनुशासन, मानसिक स्वास्थ्य संवर्धन, सुरक्षा एवं आधुनिक तकनीक आधारित प्रशासन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। सदस्यों ने विश्वास व्यक्त किया कि इन पहलों से देवी अहिल्या विश्वविद्यालय की प्रतिष्ठा और अधिक सुदृढ़ होगी तथा विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास को नई दिशा मिलेगी।
“शिक्षा के साथ संस्कार, ज्ञान के साथ उत्तरदायित्व”
आगामी सत्र से प्रस्तावित देवी अहिल्या विद्यार्थी संकल्प पत्र के माध्यम से विद्यार्थियों को अनुशासन, महिला सम्मान, नशामुक्ति, पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक उत्तरदायित्व, मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता और राष्ट्र निर्माण के मूल्यों से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा। यह पहल विश्वविद्यालय की नई पहचान बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।


