गर्भावस्था के नौ महीने अब होंगे और सहज, इंदौर में लॉन्च हुए ‘गर्भ सहेली’ और ‘गीता सखी’

इंदौर, 10 अगस्त, 2026: गर्भावस्था के दौरान हर महिला के मन में कई छोटे-बड़े सवाल आते हैं। क्या खाना चाहिए, क्या नहीं करना चाहिए, बेचैनी होने पर क्या करें, मन की बात किससे कहें या दिनभर की छोटी-छोटी चिंताओं को कैसे संभालें। ऐसे ही सवालों के बीच सही जानकारी और भरोसेमंद साथ मिल जाए, तो यह सफर काफी आसान हो सकता है। इसी सोच के साथ इंदौर में ‘गर्भ सहेली’ और ‘गीता सखी’ नाम के दो वेब ऐप लॉन्च किए गए हैं। इनकी शुरुआत मनोविज्ञान विशेषज्ञ श्रीमती शैला राव ने की है, जो पिछले लगभग पाँच दशकों से गर्भवती महिलाओं की काउंसलिंग कर रही हैं।
मनोविज्ञान विशेषज्ञ श्रीमती शैला राव ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा, “गर्भावस्था सिर्फ माँ बनने की तैयारी नहीं, बल्कि भावनात्मक रूप से भी बहुत महत्वपूर्ण समय होता है। हमारा प्रयास है कि हर महिला इस पूरे सफर में खुद को अकेला महसूस न करे। गर्भावस्था में महिलाओं को सलाह देने वाले बहुत लोग मिल जाते हैं, लेकिन धैर्य से उनकी बात सुनने वाला और बिना डर पैदा किए सही दिशा दिखाने वाला साथ कम मिलता है। इसी अनुभव को हमने तकनीक के साथ जोड़कर ‘गर्भ सहेली’ के रूप में तैयार किया है, ताकि अधिक से अधिक महिलाएँ घर बैठे इसका लाभ उठा सकें।”
‘गर्भ सहेली’ गर्भ संस्कार की परंपरा पर आधारित एक निःशुल्क वेब ऐप है, जिसे गर्भावस्था के नौ महीनों को सहज और सकारात्मक बनाने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। इसमें सप्ताह-दर-सप्ताह चलने वाली ‘यात्रा’ दी गई है, जिसमें हर दिन तीन छोटे और आसान अभ्यास सुझाए जाते हैं। इन्हें किसी नियम या दबाव की तरह नहीं रखा गया है, बल्कि हर महिला अपनी सुविधा और जरूरत के अनुसार अपना सकती है।
इसमें ‘सहेली’ नाम का एआई आधारित डिजिटल असिस्टेंस भी है, जिससे महिलाएँ हिंदी, हिंग्लिश या अंग्रेज़ी में आसानी से बातचीत कर सकती हैं। मन में कोई सवाल हो, घबराहट महसूस हो, नींद को लेकर चिंता हो या सिर्फ किसी से बात करने का मन हो, तो यह सुविधा हर समय उनके साथ रहती है।
इसके ‘संग्रह’ में गर्भ संस्कार से जुड़े 24 चुने हुए अभ्यास शामिल किए गए हैं। इनमें राग, महाभारत और पुराणों की कहानियां पढ़ने और सुनने की सुविधा, सात्विक आहार से जुड़ी जानकारी, अनुलोम-विलोम और भ्रामरी जैसे सुरक्षित श्वास अभ्यास, साथ ही ॐ और गायत्री मंत्र जैसे पाठ भी दिए गए हैं। इनका उद्देश्य गर्भवती महिला को पूरे सफर के दौरान मानसिक रूप से शांत, सकारात्मक और आत्मविश्वास से भरपूर बनाए रखना है।
‘गर्भ सहेली’ की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें महिलाओं की सुरक्षा को सबसे अधिक महत्व दिया गया है। यह डॉक्टर की सलाह का विकल्प नहीं है। न यह दवा बताती है, न किसी बीमारी की पहचान करती है और न ही इलाज की सलाह देती है। यदि किसी महिला को गर्भावस्था के दौरान खून आना, तेज दर्द, बुखार या शिशु की हलचल कम महसूस होने जैसी स्थिति होती है, तो यह तुरंत डॉक्टर से संपर्क करने की सलाह देती है। इसी तरह इसमें केवल वही श्वास अभ्यास शामिल किए गए हैं, जिन्हें गर्भावस्था के दौरान सुरक्षित माना जाता है। कपालभाति, भस्त्रिका या लंबे समय तक सांस रोकने जैसे अभ्यास जानबूझकर इसमें शामिल नहीं किए गए हैं। सोलहवें सप्ताह के बाद पीठ के बल लेटने से बचने की सलाह भी इसमें दी जाती है।
गर्भवती महिलाओं के लिए ‘गर्भ सहेली’ तैयार करने के साथ ही, आम लोगों की रोजमर्रा की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए ‘गीता सखी’ की भी शुरुआत की गई है। यह भगवद्गीता पर आधारित एक वॉइस-बेस्ड एआई असिस्टेंट है, जो जीवन की छोटी-बड़ी उलझनों और रोजमर्रा के सवालों पर गीता के श्लोकों के माध्यम से सहज भाषा में मार्गदर्शन देने का प्रयास करता है। इसका उद्देश्य केवल श्लोक सुनाना नहीं, बल्कि उनकी सरल व्याख्या के जरिए लोगों को सकारात्मक सोच और संतुलित दृष्टिकोण अपनाने में मदद करना है। जब मन किसी निर्णय को लेकर उलझन में हो, तनाव महसूस हो या जीवन से जुड़ा कोई सवाल सामने हो, तब ‘गीता सखी’ बातचीत के माध्यम से गीता की सीख को आज के जीवन से जोड़ने का प्रयास करती है।
ऐप तैयार करते समय महिलाओं की निजता का भी पूरा ध्यान रखा गया है। बातचीत कहीं रिकॉर्ड नहीं होती। दोनों वेब ऐप किसी भी स्मार्टफोन, टैबलेट या कम्प्यूटर के ब्राउज़र पर बिना डाउनलोड किए आसानी से उपयोग किए जा सकते हैं। ‘गर्भ सहेली’ garbhsaheli.com और ‘गीता सखी’ geetasakhi.com पर निःशुल्क उपलब्ध हैं।

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