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रीढ़ की कई समस्याओं का इलाज अब 7–10 मिलीमीटर के छोटे चीरे से संभव
इंदौर में 25 से 27 सितंबर तक होगा ‘एंडोस्पाइनकॉन 2026’, देश-विदेश के विशेषज्ञ साझा करेंगे एंडोस्कोपिक स्पाइन सर्जरी की आधुनिक तकनीकें
इंदौर। रीढ़ की हड्डी से जुड़ी कई समस्याओं के इलाज में आधुनिक एंडोस्कोपिक स्पाइन सर्जरी तेजी से महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। इस तकनीक में छोटे से चीरे के माध्यम से हाई-डेफिनिशन कैमरे की मदद से रीढ़ की नसों और आसपास की संरचनाओं को स्पष्ट रूप से देखकर सर्जरी की जाती है। चयनित मरीजों में कम ऊतक क्षति, कम दर्द और अपेक्षाकृत जल्दी सामान्य गतिविधियों में लौटने जैसे लाभ मिल सकते हैं।
इसी आधुनिक तकनीक, सर्जिकल प्रशिक्षण और चिकित्सा शिक्षा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से ‘एंडोस्पाइनकॉन 2026’ का आयोजन 25 से 27 सितंबर तक इंदौर में किया जा रहा है। सम्मेलन का आयोजन इंदौर स्पाइनल वेलफेयर सोसाइटी एवं इंदौर स्पाइन सर्जन एसोसिएशन द्वारा किया जा रहा है। इस वर्ष सम्मेलन की थीम “From Learning Curve to Global Excellence” रखी गई है।
कॉन्फ्रेंस के ऑर्गनाइजिंग सेक्रेटरी डॉ. प्रसाद पाटगाँवकर ने बताया कि सम्मेलन में देश-विदेश से विशेषज्ञ फैकल्टी और 100 से अधिक डेलीगेट्स हिस्सा लेंगे। विभिन्न सत्रों में एंडोस्कोपिक स्पाइन सर्जरी की शुरुआती तकनीकों से लेकर एडवांस सर्जिकल प्रक्रियाओं तक के व्यावहारिक पहलुओं पर चर्चा की जाएगी।
7–10 मिलीमीटर के छोटे चीरे से सर्जरी
डॉ. पाटगाँवकर ने बताया कि एंडोस्कोपिक स्पाइन सर्जरी एक मिनिमली इनवेसिव तकनीक है, जिसमें एक छोटे से चीरे के माध्यम से एंडोस्कोप को शरीर के अंदर पहुंचाया जाता है। हाई-डेफिनिशन कैमरे की मदद से सर्जन को ऑपरेशन के क्षेत्र की संरचनाएं स्क्रीन पर स्पष्ट दिखाई देती हैं।
चयनित मामलों में केवल 7 से 10 मिलीमीटर के छोटे चीरे से रीढ़ की सर्जरी की जा सकती है। पारंपरिक ओपन सर्जरी की तुलना में इस तकनीक में आसपास की मांसपेशियों और ऊतकों को कम नुकसान पहुंचाने का उद्देश्य रहता है, जिसके कारण कई मरीजों में दर्द कम होने और रिकवरी तेजी से होने जैसे लाभ देखे जाते हैं।
उन्होंने कहा कि हर मरीज और हर बीमारी के लिए एंडोस्कोपिक सर्जरी उपयुक्त नहीं होती। मरीज की बीमारी, उसकी गंभीरता और अन्य चिकित्सकीय परिस्थितियों के आधार पर सर्जरी की उपयुक्त तकनीक का चयन किया जाता है।
बेसिक से एडवांस एंडोस्कोपिक स्पाइन सर्जरी तक प्रशिक्षण
‘एंडोस्पाइनकॉन 2026’ में एंडोस्कोपिक स्पाइन सर्जरी के विभिन्न पहलुओं पर विशेष सत्र आयोजित किए जाएंगे। इनमें यूनिपोर्टल एवं यूबीई (Unilateral Biportal Endoscopy) सर्जरी, लम्बर डिकम्प्रेशन एवं फ्यूजन, सर्वाइकल यूनिपोर्टल एवं बाइपोर्टल एंडोस्कोपी सहित विभिन्न आधुनिक तकनीकों पर चर्चा होगी।
सम्मेलन का उद्देश्य केवल तकनीक की जानकारी देना ही नहीं, बल्कि सर्जनों को उसके सही मरीज चयन, सर्जिकल प्लानिंग, तकनीकी बारीकियों और संभावित जटिलताओं को समझने का अवसर प्रदान करना भी है।
27 सितंबर को विशेष हैंड्स-ऑन कैडेवरिक वर्कशॉप
कॉन्फ्रेंस का एक प्रमुख आकर्षण 27 सितंबर को आयोजित पोस्ट-कैडेवरिक हैंड्स-ऑन कैडेवरिक वर्कशॉप होगी। इसमें प्रतिभागियों को कैडेवर पर एंडोस्कोपिक स्पाइन सर्जरी की विभिन्न तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा।
डॉ. पाटगाँवकर ने बताया कि इस तरह के हैंड्स-ऑन प्रशिक्षण से सर्जनों को ऑपरेशन थिएटर में तकनीक अपनाने से पहले उसकी बारीकियों और विभिन्न सर्जिकल परिस्थितियों को बेहतर ढंग से समझने का अवसर मिलता है।
देश-विदेश के विशेषज्ञ होंगे शामिल
सम्मेलन में भारत के विभिन्न राज्यों के साथ-साथ विदेशों से भी विशेषज्ञ फैकल्टी हिस्सा लेंगी। एंडोस्कोपिक स्पाइन सर्जरी के क्षेत्र में कार्य कर रहे विशेषज्ञों में महाराष्ट्र से डॉ. गिरीश दातार, डॉ. केतन देशपांडे, डॉ. साई दिलीप विश्वनाथ तथा उज्बेकिस्तान से डॉ. अख्रोर याकूबोव सहित देश के विभिन्न हिस्सों से कई प्रतिष्ठित स्पाइन सर्जन शामिल होंगे।
सम्मेलन में लगभग 31 राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय फैकल्टी और 100 से अधिक डेलीगेट्स के शामिल होने की उम्मीद है।
डॉ. पाटगाँवकर ने कहा कि, “एंडोस्पाइनकॉन 2026 का उद्देश्य केवल नई तकनीकों को प्रदर्शित करना नहीं, बल्कि सर्जिकल शिक्षा, अनुभव और ज्ञान के आदान-प्रदान के माध्यम से एंडोस्कोपिक स्पाइन सर्जरी के मानकों को और बेहतर बनाना है। ‘From Learning Curve to Global Excellence’ की हमारी थीम इसी सोच को दर्शाती है।


