हर कमर दर्द को मस्कुलर न समझें, पेशाब-मल का कंट्रोल बिगड़े तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं

‘एंडोस्पाइनकॉन 2026’ के पहले दिन देश-विदेश के विशेषज्ञों ने साझा की एंडोस्कोपिक स्पाइन सर्जरी की आधुनिक तकनीकें

इंदौर। कमर दर्द के साथ पेशाब या मल का कंट्रोल बिगड़ना, पैर में सुन्नपन, झुनझुनी, जलन या कमजोरी जैसे लक्षण रीढ़ की गंभीर समस्या के संकेत हो सकते हैं। इन्हें नजरअंदाज करने पर स्थायी परेशानी या विकलांगता का खतरा हो सकता है। हर कमर दर्द को मस्कुलर मान लेना भी सही नहीं है। सामान्य दर्द 1-2 सप्ताह में ठीक नहीं हो रहा है तो विशेषज्ञ से जांच करानी चाहिए। यह जानकारी एंडोस्पाइनकॉन 2026 में इंदौर स्पाइन सर्जन एसोसिएशन के ऑर्गनाइजिंग सेक्रेटरी डॉ. प्रसाद पाटगाँवकर ने दी। इस वर्ष की थीम ‘फ्रॉम लर्निंग कर्व टू ग्लोबल एक्सीलेंस’ है। इस सम्मेलन में 120 से अधिक डेलीगेट्स हिस्सा लिया है।

उन्होंने बताया कि उनकी ओपीडी में कमर दर्द के 100 मरीजों में करीब 10-15 मरीजों को ही सर्जरी की जरूरत पड़ती है। शुरुआती 10-12 दिन में, अगर कोई रेड फ्लैग साइन नहीं है, तो दवा, फिजियोथैरेपी और सामान्य उपाय किए जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि स्लिप डिस्क की एक डिस्क खराब होने से दूसरी डिस्क अपने आप खराब नहीं होती। वजन, गलत पोश्चर और रोजमर्रा की गतिविधियों में गलत तरीके समस्या को आगे बढ़ा सकते हैं।

रोबोट खुद फैसला नहीं लेता, सर्जन तय करता है टारगेट और दिशा

एंडोस्कोपिक स्पाइन सर्जरी की शुरुआत के मुकाबले अब इसकी स्वीकार्यता काफी बढ़ी है। 2010 में जब डॉ. गिरीश दातार ने एंडोस्कोपी शुरू की थी, तब भारत में यह तकनीक नई थी और डॉक्टरों के बीच भी इसे लेकर स्वीकार्यता कम थी। अब मरीज खुद डॉक्टर से एंडोस्कोपिक सर्जरी के बारे में पूछ रहे हैं। उन्होंने बताया कि इस तकनीक में लंबा लर्निंग कर्व है और केवल एक-दो सर्जरी देखकर या उपकरण खरीदकर इसे शुरू नहीं किया जा सकता। सर्जन के लिए 3-डी स्पेशियल ओरिएंटेशन की समझ जरूरी है, क्योंकि एंडोस्कोप से मिलने वाली 2-डी तस्वीर के आधार पर शरीर के अंदर 3-डी दिशा का अनुमान लगाना होता है। एंडोस्कोपी सीखने वालों में 30% से भी कम लोग ही इसे नियमित रूप से करने में सक्षम हो पाते हैं। तकनीक में अब फुल एचडी कैमरा, बेहतर ऑप्टिक्स और नेविगेशन सिस्टम जैसी सुविधाएं आ रही हैं, जो सर्जरी की सटीकता में मदद करेंगी। हालांकि, रोबोट खुद फैसला नहीं लेता उसे सही टारगेट और दिशा सर्जन को ही तय करनी होती है।

तेजी से बढ़ रहे हैं कम उम्र में स्पाइन की समस्या के मामले

उज्बेकिस्तान से आए स्पाइन सर्जन डॉ अखरोर याकूबोव कहते हैं कि आज एंडोस्कोपी से कई तरह की स्पाइन की समस्याओं का इलाज किया जा सकता है। बुजुर्ग मरीजों के लिए भी यह उपयोगी है, क्योंकि ओपन सर्जरी के मुकाबले रिकवरी आसान हो सकती है। मोटापे वाले मरीजों में भी इसका फायदा है, क्योंकि छोटे चीरे की वजह से घाव भरने में परेशानी अपेक्षाकृत कम होती है। मेरे देश में भी अब करीब 60-70% स्पाइन की सर्जरी एंडोस्कोपी से की जा रही हैं। मैंने 6 साल पहले ओपन स्पाइन सर्जरी करना पूरी तरह बंद कर दिया और अब सभी तरह की स्पाइन पैथोलॉजी का इलाज एंडोस्कोपी से करता हूं।
हालांकि हर स्लिप डिस्क या स्पाइन की समस्या में सर्जरी की जरूरत नहीं होती। अगर एमआरआई में ज्यादा दबाव नहीं है और लक्षण गंभीर नहीं हैं तो दवा और एक्सरसाइज से भी इलाज किया जा सकता है। आज दुनिया भर में स्पाइन की समस्याएं बढ़ने का एक बड़ा कारण कम एक्टिव लाइफस्टाइल और मोटापा है। उज्बेकिस्तान और भारत में भी कम उम्र में स्पाइन की समस्या के मामले बढ़ रहे हैं। मैंने 15 साल के एक मरीज की भी स्पाइन सर्जरी की है। इसलिए मैं मरीजों को नियमित एक्सरसाइज करने और वजन नियंत्रित रखने की सलाह देता हूं।

एंडोस्कोपिक सर्जरी में 10 एमएल से भी कम ब्लड लॉस

गोयलखंड मेडिकल कॉलेज, बरेली के ऑर्थोपेडिक्स प्रोफेसर प्रो. वरुण अग्रवाल ने बताया कि एंडोस्कोपिक स्पाइन सर्जरी में बहुत छोटे चीरे से दूरबीन की मदद से नसों पर दबाव को हटाया जा सकता है। कुछ चयनित मामलों में लोकल एनेस्थीसिया में भी प्रक्रिया की जा सकती है। उन्होंने बताया कि इसमें ब्लड लॉस 10 एमएल से भी कम हो सकता है और मरीज ऑपरेशन के करीब 4 घंटे बाद घर जा सकता है। एंडोस्कोपिक सर्जरी के बाद कई मरीज अगले दिन से सामान्य काम भी कर सकते हैं, हालांकि डॉक्टर की बताई सावधानियां 2-3 महीने तक रखनी होती हैं।

रीढ़ को स्वस्थ रखने के लिए एक्सपर्ट की टिप्स

  • हर 30-45 मिनट में 5 मिनट का ब्रेक लें।
  • ऑफिस में लंबर बैकगार्ड वाली कुर्सी इस्तेमाल करें।
  • आर्म सपोर्ट वाली घूमने वाली कुर्सी रखें।
  • कीबोर्ड और माउस पर काम करते समय हाथों को सपोर्ट दें।
  • कंप्यूटर स्क्रीन आंखों के स्तर पर रखें।
  • काम करते समय गर्दन को ज्यादा न झुकाएं, अधिकतम 10° तक ही झुकाव रखें।
  • रोज करीब 20 मिनट गर्दन, कमर और कोर मसल्स की एक्सरसाइज करें।
  • एक्सरसाइज या योग धीरे-धीरे बढ़ाएं, अचानक ज्यादा न करें।

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