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न्यूबर्ग के पैनल में शामिल विशेषज्ञों के अनुसार, डेल्टा और ओमीक्रोन दोनों वेरिएंट एक साथ फैल सकते हैं
15 जनवरी, 2022: न्यूबर्ग डायग्नोस्टिक्स के पैनल में वायरोलॉजिस्ट और स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने इस वायरस के ‘वैरिएंट्स, टीके तथा आम लोगों’ पर चर्चा की, साथ ही उन्होंने बच्चों के टीकाकरण, पहले लिए गए टीके की बूस्टर डोज़ और RT-PCR जाँच की अहमियत के बारे में भी बताया। विशेषज्ञों ने कहा कि, फिलहाल इस बात की संभावना नहीं दिखाई दे रही है कि हम जल्द ही कोविड से पहले की स्थिति में वापस लौट आएंगे। इसके बजाय, आने वाले समय में डेल्टा और ओमीक्रोन वेरिएंट के एक साथ फैलने की संभावना अधिक है। सभी विशेषज्ञों ने एक सुर में कहा कि ये दोनों वेरिएंट एक साथ फैलना जारी रखेंगे।
ICMR के सेंटर ऑफ़ एडवांस्ड रिसर्च इन वायरोलॉजी के पूर्व निदेशक, तथा सीएमसी वेल्लोर में सेवानिवृत्त प्रोफेसर और क्लिनिकल वायरोलॉजी एवं माइक्रोबायोलॉजी विभाग के प्रमुख, डॉ. टी. जैकब जॉन ने वायरस को फैलने से रोकने तथा नए वेरिएंट के म्यूटेशन से सामने आने वाले खतरे को कम करने के लिए बच्चों के जल्द-से-जल्द टीकाकरण पर ज़ोर दिया। डॉ. टी जैकब जॉन, पूर्व प्रोफेसर और सीएमसी वेल्लोर में क्लिनिकल वायरोलॉजी एवं माइक्रोबायोलॉजी विभाग के प्रमुख तथा ICMR के सेंटर ऑफ़ एडवांस्ड रिसर्च इन वायरोलॉजी के निदेशक ने बच्चों के टीकाकरण पर ज़ोर देते हुए कहा, “मैं बच्चों के टीकाकरण का पुरजोर समर्थन करता हूँ। उन्हें कोवैक्सिन की तरह सुरक्षित एवं असरदार टीके लगाए जाने चाहिए। सामान्य बच्चों में भी बीमारी/मृत्यु का ख़तरा पूरी तरह ख़त्म नहीं होता है, बल्कि यह ख़तरा काफी हद तक कम हो जाता है। संक्रमण के बाद उन्हें मल्टी-सिस्टम इंफ्लेमेटरी सिंड्रोम (MIS) और डायबिटीज होने का ख़तरा होता है। इसके अलावा, पहले से किसी गंभीर बीमारी से पीड़ित बच्चों को ही कोविड का ख़तरा अधिक होता है। इन सभी को टीकाकरण से रोका जा सकता है। अगर बच्चों को टीका नहीं लगाया जाता है, तो वे वायरस के भंडार की तरह काम करेंगे, और हमें यह भी मालूम है कि ओमीक्रोन बच्चों को बड़ी आसानी से संक्रमित करता है।”
उन्होंने आगे कहा, “ओमीक्रोन की दो सबसे बड़ी खासियत है। पहला, इसमें बड़ी तेजी से फैलने की क्षमता है, जो डेल्टा की तुलना में कहीं अधिक है, साथ ही यह वेरिएंट पहले हुए संक्रमण और टीकाकरण के बाद हासिल की गई इम्यूनिटी को चकमा देकर बच निकलने में भी सक्षम है। इसके स्पाइक प्रोटीन जीन पर बड़ी संख्या में म्यूटेशन की वजह से ही इस वेरिएंट में यह गुण आया है।
डेल्टा में स्पाइक प्रोटीन के रिसेप्टर-बाइंडिंग डोमेन पर दो म्यूटेशन हैं, जबकि ओमीक्रोन में ऐसे म्यूटेशन की संख्या 15 है। इसी वजह से यह एंटीबॉडी बाइंडिंग से बच निकलने में सक्षम है, जो शरीर की सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी है। फिलहाल उपलब्ध सभी टीके (mRNA या एडेनोवायरस-वेक्टर्ड)) के खिलाफ बेअसर हैं, क्योंकि मूल वायरस के स्पाइक प्रोटीन इन टीकों से हासिल की गई एंटीबॉडी को निष्क्रिय बना देते हैं। हालांकि, हाल के अनुभव से यह बात सामने आई है कि बूस्टर डोज़ की वजह से शरीर में बनने वाली एंटीबॉडी हमें उच्च स्तर की सुरक्षा प्रदान करने में सक्षम है, और इसके बाद बीमारी के गंभीर होने और अस्पताल में भर्ती होने की संभावना काफी कम हो जाती है।”
NIMHANS में न्यूरोवायरोलॉजी के पूर्व प्रोफेसर तथा कर्नाटक सरकार में SARS-CoV-2 जीनोमिक पुष्टिकरण के नोडल अधिकारी, डॉ. वी. रवि ने कहा, “सेल्फ-टेस्टिंग किट, यानी एंटीजन टेस्ट बीमारी के लक्षण वाले मरीजों में विश्वसनीय परिणाम देते हैं; लेकिन इसके मामलों की बढ़ती संख्या को देखते हुए जिन मरीजों में बीमारी के लक्षण नहीं हो, उन्हें RT-PCR टेस्ट करवाना चाहिए।“ उन्होंने आगे कहा कि मौजूदा आँकड़ों से पता चलता है कि, वैक्सीन की दोनों डोज़ लेने वाले लोगों में ओमीक्रोन का संक्रमण अधिक नजर आ रहा है। लिहाजा, भलाई इसी में है कि हम अपने बचाव के उपायों में किसी तरह की कमी नहीं आने दें।
उन्होंने आगे कहा, “हमें यह उम्मीद नहीं करनी चाहिए कि, कोविड-19 का वैक्सीन हमें वायरस को ख़त्म करने वाली इम्युनिटी और सुरक्षा प्रदान करेगा। उनका प्राथमिक काम तो गंभीर बीमारी और मौतों को रोकना है। नाक के जरिए दिए जाने वाले टीके भी इसमें बेहद कारगर साबित हो सकते हैं। मुझे पूरा यकीन है कि, बाज़ार में उपलब्ध होने के बाद ये टीके लोगों को पर्याप्त सुरक्षा प्रदान करेंगे।”
दो अलग-अलग टीकों को मिलाकर लगाए जाने के बारे में उन्होंने कहा, “भारत में टीकों के मिश्रण के बारे में स्पष्ट तौर पर कोई आँकड़े उपलब्ध नहीं हैं। लिहाजा, बूस्टर डोज़ के रूप में पहले लिए गए टीके का उपयोग करने की हमारी मौजूदा नीति हम सभी के हित में है।”
डॉ. वी. रामसुब्रमण्यम, कंसल्टेंट, इंफेक्शियस डिजीज एंड ट्रॉपिकल मेडिसिन, अपोलो हॉस्पिटल्स, ने कहा, “डेल्टा वेरिएंट की तुलना में तेज बुख़ार के साथ इलाज के लिए आने वाले युवाओं की संख्या में काफी वृद्धि हुई है, जहां संक्रमित होने वाले मरीजों की आयु सीमा पहले ही काफी कम थी। अब ऐसे मरीजों की आयु सीमा और घटाकर 5 से 6 वर्ष तक पहुंच गई है, जिसमें उनके शरीर का तापमान 102 से 103 डिग्री दर्ज किया गया है। दिलचस्प बात यह है कि, उनका बुख़ार या तो 24 घंटे में या फिर 4 से 5 दिनों के भीतर ठीक हो जाता है। इन सभी मामलों में बीमारी के लक्षण दिखाई देते हैं, और उन पर इलाज का असर भी होता हैं। ऐसे मरीज बुख़ार के अलावा गले में तेज दर्द की शिकायत करते हैं। उनमें से ज्यादातर तो खाना निगलने तक की हालत में नहीं होते हैं। हमने देखा है कि पिछले कुछ हफ्तों में तेज बुख़ार और गले में दर्द की वजह से एंटीबायोटिक दवाओं का सेवन काफी बढ़ गया है।”
डॉ. सरन्या नारायण, तकनीकी निदेशक और मुख्य माइक्रोबायोलॉजिस्ट, न्यूबर्ग डायग्नोस्टिक्स, ने कहा, “चेन्नई में मौजूद अपने लैब में, हमने 28 दिसंबर, 2021 के बाद से टेस्ट पॉजिटिविटी रेट (TPR) में वृद्धि देखी है। 25 दिसंबर से 10 जनवरी के बीच, कोविड -19 के 19,558 टेस्ट में TPR 27.2% था। पॉजिटिव नतीजे वाले मरीजों में से 11% की उम्र 18 साल से कम थी। अब तो 1 से 10 साल के आयु वर्ग में भी संक्रमण के मामले सामने आ रहे हैं। एक साल से कम उम्र के शिशुओं में, 2 की जाँच के नतीजे पॉजिटिव आए हैं।
बेंगलुरु में मौजूद हमारे लैब में साप्ताहिक TPR 5.3% से बढ़कर 20.6% तक पहुंच गया है। चेन्नई स्थित हमारे लैब में 28 दिसंबर से 11 जनवरी के बीच साप्ताहिक TPR 11.1% से बढ़कर 34.7% हो गया है। इसी तरह, केरल स्थित हमारे लैब में पिछले कुछ दिनों में दैनिक TPR में बढ़ोतरी के बाद साप्ताहिक TPR लगभग 8.41% हो गया है। हैदराबाद में, दैनिक TPR लगभग 45% है जबकि मुंबई (महाराष्ट्र) में यह लगभग 40% है।
ओमीक्रोन) की पॉजिटिविटी के बारे में उन्होंने कहा, “कर्नाटक में पॉजिटिविटी का अनुपात 50%, मुंबई में 40%, हैदराबाद में 45% और तमिलनाडु में 80-85% है।”
सभी विशेषज्ञों ने इस बात पर बल दिया कि, लोगों को इस बीमारी से बचाव के लिए व्यक्तिगत उपायों का सख़्ती से पालन करना चाहिए, जिसमें दो मास्क पहनना, हाथों को नियमित तौर पर साफ़ करना, घर के भीतर वेंटिलेशन को बनाए रखना, तथा भीड़-भाड़ में जाने से बचना और अनावश्यक यात्रा से परहेज करना शामिल है।


