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4 अगस्त से शुरू होगी नीट-यूजी काउंसलिंग, एमबीबीएस के साथ आयुष पाठ्यक्रमों में भी हैं बेहतर करियर अवसर : डॉ. ए.के. द्विवेदी
इंदौर। नीट-यूजी 2027 की ऑल इंडिया कोटा काउंसलिंग 4 अगस्त से प्रारंभ हो रही है तथा नया शैक्षणिक सत्र 8 सितंबर से शुरू होगा। ऐसे में विद्यार्थियों के लिए यह समय अपने करियर का सही चुनाव करने का है। केंद्रीय होम्योपैथी अनुसंधान परिषद (CCRH), आयुष मंत्रालय, भारत सरकार के सदस्य, देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इंदौर की कार्य परिषद के सदस्य तथा एस.के.आर.पी. गुजराती होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज के प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष (फिजियोलॉजी) डॉ. ए.के. द्विवेदी ने कहा कि नीट केवल एमबीबीएस में प्रवेश का माध्यम नहीं है, बल्कि बीएचएमएस (होम्योपैथी), बीएएमएस (आयुर्वेद), बीएनवाईएस (योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा), बीयूएमएस तथा अन्य आयुष पाठ्यक्रमों में प्रवेश का भी प्रमुख आधार है।
डॉ. द्विवेदी ने कहा कि जिन विद्यार्थियों को एमबीबीएस में प्रवेश नहीं मिल पाता, उन्हें निराश होने की आवश्यकता नहीं है। आयुष चिकित्सा शिक्षा आज तेजी से विकसित हो रही है और इसमें उत्कृष्ट चिकित्सकीय करियर, उच्च शिक्षा, शोध, अध्यापन तथा सरकारी एवं निजी स्वास्थ्य सेवाओं में व्यापक अवसर उपलब्ध हैं।
उन्होंने बताया कि वर्ष 2014 के बाद आयुष क्षेत्र में उल्लेखनीय विस्तार हुआ है। आयुष मंत्रालय की स्थापना, राष्ट्रीय आयुष मिशन, अनुसंधान को प्रोत्साहन, नए शिक्षण संस्थानों एवं अस्पतालों का विकास तथा बढ़ते जनविश्वास के कारण आयुष चिकित्सा पद्धतियां देश की स्वास्थ्य व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी हैं।
डॉ. द्विवेदी ने कहा कि बीएचएमएस, बीएएमएस, बीएनवाईएस एवं अन्य आयुष पाठ्यक्रमों के स्नातकों के लिए एमडी/एमएस, क्लिनिकल प्रैक्टिस, मेडिकल कॉलेजों में अध्यापन, अनुसंधान, आयुष वेलनेस सेंटर, राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रम तथा सरकारी सेवाओं में निरंतर अवसर बढ़ रहे हैं। समग्र (Holistic) एवं इंटीग्रेटिव हेल्थकेयर की वैश्विक मांग ने भी आयुष चिकित्सकों के लिए नए आयाम खोले हैं।
उन्होंने विद्यार्थियों एवं अभिभावकों से अपील की कि वे काउंसलिंग के दौरान केवल एमबीबीएस तक ही अपनी पसंद सीमित न रखें, बल्कि अपनी रुचि, योग्यता एवं भविष्य की संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए आयुष पाठ्यक्रमों का भी गंभीरता से चयन करें।
“नीट केवल एमबीबीएस का प्रवेश द्वार नहीं, बल्कि आयुष के माध्यम से सेवा, सम्मान और सफल चिकित्सकीय करियर का भी सशक्त अवसर है।”
— डॉ. ए.के. द्विवेदी


