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पीलिया को नजरअंदाज करना पड़ सकता है भारी; समय पर जांच और इलाज बड़ा बचाव – डॉ. हरि प्रसाद यादव
गेस्ट्रो अपडेट 2.0 एवं आईएसजी इंदौर 2026 की वार्षिक बैठक का दूसरा दिन
• लिवर ट्रांसप्लांट की जरूरत वाले मरीजों की तुलना में डोनर्स बेहद कम, अंगदान के प्रति जागरूकता बढ़ाने का आह्वान
• विशेषज्ञों ने संतुलित आहार लेने, नियमित व्यायाम करने, पर्याप्त पानी पीने, स्वच्छ भोजन करने तथा बिना चिकित्सकीय सलाह के दवाओं का सेवन न करने की अपील की
इंदौर, 2 अगस्त 2026। दो दिवसीय “गैस्ट्रो अपडेट 2.0 एवं आईएसजी इंदौर 2026 की वार्षिक बैठक” के दूसरे एवं अंतिम दिन पीलिया, लिवर रोग, पेट एवं पाचन तंत्र से जुड़ी बीमारियों के कारण, उनके बचाव तथा लिवर ट्रांसप्लांट जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विशेषज्ञों ने केस स्टडीज प्रस्तुत की और चर्चा की। बदलती जीवनशैली, असंतुलित खानपान और देर से जांच कराना आज पेट एवं लिवर संबंधी बीमारियों के प्रमुख कारण हैं। समय पर जांच, स्वस्थ जीवनशैली और आधुनिक उपचार पद्धतियों के माध्यम से अधिकांश गंभीर बीमारियों का सफल उपचार संभव है।
मेदांता हॉस्पिटल इंदौर के गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग एवं गट क्लब इंदौर द्वारा आयोजित इस सम्मेलन के ऑर्गेनाइजिंग चेयरमैन डॉ. हरि प्रसाद यादव ने कहा, “अक्सर लोग पीलिया को एक सामान्य बीमारी समझकर घरेलू उपचार या झाड़-फूंक जैसी अप्रमाणित पद्धतियों का सहारा लेने लगते हैं, जबकि पीलिया कई बार लिवर, पित्त नली या वायरल संक्रमण से जुड़ी गंभीर बीमारी का संकेत हो सकता है। आंखों और त्वचा का पीला पड़ना, गहरे रंग का पेशाब, लगातार थकान, भूख कम लगना, उल्टी या बुखार जैसे लक्षण दिखाई देने पर बिना देरी किए विशेषज्ञ चिकित्सक से जांच करानी चाहिए। सही समय पर उपचार शुरू होने से लिवर को गंभीर क्षति से बचाया जा सकता है।”
फैटी लिवर के बारे में डॉ यादव ने कहा कि “आज फैटी लिवर तेजी से उभरती हुई स्वास्थ्य समस्या है। मोटापा, अनियंत्रित मधुमेह, अत्यधिक शराब का सेवन, जंक फूड, शारीरिक गतिविधियों की कमी और बढ़ता तनाव इसके प्रमुख कारण हैं। यदि समय रहते जीवनशैली में सुधार नहीं किया जाए तो फैटी लिवर आगे चलकर सिरोसिस और लिवर फेल्योर जैसी गंभीर स्थितियों में बदल सकता है।”
डॉ. यादव ने बताया कि “पेट एवं पाचन तंत्र से जुड़ी अधिकांश समस्याओं की जड़ हमारी दैनिक आदतों में छिपी होती है। अनियमित भोजन, अधिक तला-भुना एवं मसालेदार भोजन, दूषित पानी, धूम्रपान, शराब, लंबे समय तक दर्द निवारक दवाओं का अनियंत्रित सेवन तथा मानसिक तनाव गैस, एसिडिटी, अपच, पेट फूलना और अल्सर जैसी समस्याओं को बढ़ावा देते हैं। उन्होंने लोगों से संतुलित आहार लेने, नियमित व्यायाम करने, पर्याप्त पानी पीने, स्वच्छ भोजन करने तथा बिना चिकित्सकीय सलाह के दवाओं का सेवन न करने की अपील की।”
लिवर ट्रांसप्लांट पर आयोजित एक सत्र में वरिष्ठ पेट एवं लिवर रोग विशेषज्ञ डॉ. अजय जैन ने बताया कि भारत में हर वर्ष हजारों मरीजों को लिवर प्रत्यारोपण की आवश्यकता होती है, लेकिन उपलब्ध डोनर्स की संख्या उसकी तुलना में बेहद कम है। डोनर और रिसीवर की संख्या के बीच यही बड़ा अंतर अनेक मरीजों के लिए जीवन और मृत्यु का प्रश्न बन जाता है। उन्होंने कहा कि मृतक अंगदान के प्रति समाज में अभी भी पर्याप्त जागरूकता नहीं है। यदि अधिक से अधिक लोग अंगदान का संकल्प लें तो हजारों मरीजों को नया जीवन मिल सकता है। उन्होंने आम जनता के लिए संदेश दिया कि अंगदान एक सुरक्षित, वैज्ञानिक और समाजहित का कार्य है, जिसे लेकर लोगों में फैली भ्रांतियों को दूर करने की आवश्यकता है।
भोपाल से आए गैस्ट्रोएंटरोलॉजिस्ट डॉ. शैलेन्द्र जैन ने अल्सरेटिव कोलाइटिस के उपचार में नई दवा के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि टैबलेट और इन्जेक्शन के रूप में उपलब्ध यह दवा मरीजों को जल्दी राहत देने के साथ‑साथ लंबे समय तक बीमारी पर नियंत्रण बनाए रखने में सहायक होगी। इन पर बड़े पैमाने पर रिसर्च हुई है और ये प्रभावी होने के साथ साथ सुरक्षित हैं।
ऑर्गेनाइजिंग सेक्रेटरी डॉ. अरुण एस. भदौरिया ने बताया कि “दूसरे दिन के वैज्ञानिक सत्रों में पीलिया की सही पहचान, फैटी लिवर के नवीनतम उपचार, क्रोनिक हेपेटाइटिस-बी के प्रबंधन, लिवर ट्रांसप्लांट की वर्तमान चुनौतियों, गैस एवं अपच के वैज्ञानिक कारणों, प्रोटॉन पंप इनहिबिटर्स (पीपीआई) के विवेकपूर्ण उपयोग, अल्सरेटिव कोलाइटिस के आधुनिक उपचार, एक्यूट पैंक्रियाटाइटिस में मेडिकल इंटरवेंशन, कोलैंजियोस्कोपी तथा एंडोस्कोपिक अल्ट्रासाउंड (ईयूएस) की बदलती भूमिका जैसे विषयों पर विस्तृत व्याख्यान और इंटरएक्टिव केस डिस्कशन आयोजित किए गए। विशेषज्ञों ने जटिल मरीजों के उपचार से जुड़े अपने अनुभव भी साझा किए।”
दो दिवसीय सम्मेलन के समापन अवसर पर विशेषज्ञों ने गैस्ट्रोएंटरोलॉजी एवं हेपेटोलॉजी के क्षेत्र में शोध, नवाचार और आधुनिक तकनीकों को मरीजों तक पहुंचाने की प्रतिबद्धता दोहराई। वैलेडिक्टरी सेरेमनी एवं लंच के साथ सम्मेलन का सफल समापन हुआ। डॉ हरिप्रसाद यादव ने गट क्लब इंदौर के प्रेसिडेंट डॉ. अतुल शेंडे, सेक्रेटरी डॉ. सोहिनी सरकार, प्रतिभागियों, टीम, एवं सहयोगियों का आभार प्रकट किया। विभिन्न शहरों से विशेषज्ञ चिकित्सकों, युवा डॉक्टरों एवं मेडिकल प्रोफेशनल्स ने सहभागिता की।


