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खून की जांच को कुंडली मिलान से ज्यादा महत्व देंगे तभी हम रोक सकेंगे अगली पीढ़ी में जाने से बीमारी को : सांसद लालवानी
नेशनल होम्योपैथिक कॉन्फ्रेंस-2023 का हुआ आयोजन
इंदौर। “एडवांस्ड होम्योपैथिक मेडिकल रिसर्च एवं वेलफेयर सोसायटी” एवं “आयुष मेडिकल वेलफेयर फाउंडेशन” द्वारा आज शनिवार को इंदौर में “होम्योपैथिक ट्रीटमेंट फ़ॉर इंक्यूरबल डीसीसेस” विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन सांसद श्री शंकर लालवानी के मुख्य आतिथ्य में किया गया। संगोष्ठी की अध्यक्षता वरिष्ठ होम्योपैथिक चिकित्सक एवं केंद्रीय होम्योपैथिक अनुसंधान परिषद, आयुष मंत्रालय भारत सरकार में वैज्ञानिक सलाहकार बोर्ड के सदस्य और प्रसिद्ध होम्योपैथिक चिकित्सक डॉ. एके द्विवेदी ने की।
संगोष्ठी को संबोधित करते हुए सांसद लालवानी ने कहा व्यक्ति स्वस्थ होगा तो समाज स्वस्थ होगा और ये दोनों स्वस्थ होंगे तो देश स्वस्थ होगा। लेकिन आज की लाइफस्टाइल के चलते युवा ज्यादा अस्वस्थ हो रहा है। 30 से 50 वर्ष की आयु वर्ग के लोग के बीच किए गए सर्वे में ये बात सामने आई है। जिसमें देखने को मिला कि वैसे तो व्यक्ति स्वस्थ है और देखने पर उसे कोई बीमारी नजर नहीं आती लेकिन जांच रिपोर्ट में कुछ कॉमन बीमारियों के शुरुवाती लक्षण दिखाई दिए। ऐसे में युवा पीढ़ी को चाहिए कि वो अपनी लाइफस्टाइल में व्यायाम को शामिल करें।
इसके अलावा एक बात जो सबसे महत्वपूर्ण है वो है रक्त की बीमारियों को लेकर जिसके लिए हमें जागरूक होना पड़ेगा। इसके लिए हम शादी से पहले जैसे जन्मपत्री का मिलान करते है वैसे ही अब हमें खून की जांच करने को भी प्राथमिकता पर रखना होगा। तभी हम आने वाली पीढ़ी में जाने से इन बीमारियों को रोक सकेंगे। सांसद ने आगे कहा कि शादी से पहले खून की बीमारियों की
जांच जरूरी की जाए ये बात मैं, लोकसभा पटल पर रखूंगा।
कोरोना काल के बाद ब्रिटेन में बढ़ा, होम्योपैथी पर विश्वास
नेशनल होम्योपैथिक कॉन्फ्रेंस में बतौर मुख्य वक्ता ऑनलाइन जुड़े ब्रिटेन के मशहूर डॉ. शशिमोहन शर्मा ने कहा इंग्लैंड में कोरोना काल के बाद वैकल्पिक चिकित्सा के रूप में होम्योपैथी पर लोगों का विश्वास बढ़ा है। अब आम से लेकर खास वर्ग तक इसकी सहज स्वीकार्यता है। जिसके चलते मैंने खुद 900 से ज्यादा कोरोना मरीजों का इलाज किया और अधिकाँश स्वस्थ होकर नॉर्मल लाइफ एंजॉय कर रहे हैं।
डॉ. शर्मा ने कहा कि जब असाध्य रोग से ग्रस्त कोई मरीज स्वस्थ होता है तो इसका जिक्र उसके पूरे सर्कल में होता है। इस तरह की माउथ पल्बिसिटी ने इंग्लैंड में होम्योपैथी को लोकप्रिय बनाने में अहम भूमिका निभाई है। इंग्लैंड की ही डॉ. पद्मप्रिया नायर ने कहा कि होम्योपैथी ट्रीटमेंट से शरीर की प्रतिरोधक क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होती है, जिससे मरीज बड़ी से बड़ी बीमारी को भी सफलतापूर्वक मात देने के योग्य बन जाता है।

नाउम्मीदी में रोशन, उम्मीद की किरण
“महिला एवं बाल विकास विभाग इंदौर संभाग” तथा मासिक पत्रिका “सेहत एवं सूरत” के सहयोग से आयोजित सम्मेलन का मुख्य आकर्षण भारत सरकार के आयुष मंत्रालय की वैज्ञानिक सलाहकार समिति के सदस्य डॉ. ए.के. द्विवेदी थे। उन्होंने होम्योपैथी के जरिए जानलेवा बीमारी एप्लास्टिक एनीमिया से बचाव के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि होम्योपैथी असाध्य रोगों से पीड़ित मरीजों के लिए उम्मीद की रोशन किरण साबित हो रही है। वही अप्लास्टिक एनीमिया, सिकल सेल, थेलेसिमिया जैसी बीमारियों का स्थायी इलाज भी होम्योपैथी में संभव है।
डॉ. द्विवेदी ने बताया कि गंभीर बीमारियों के इलाज में कारगर होम्योपैथी से जुड़ी जानकारियाँ वो राष्ट्रपति, राज्यपाल और वित्तमंत्री समेत देश की अनेक महत्वपूर्ण हस्तियों से भी साझा कर चुके हैं और हालिया केंद्रीय बजट में सिकलसेल, एप्लास्टिक एनीमिया समेत अनेक गंभीर बीमारियों को आने वाले 25 सालों में पूरी तरह खत्म करने का लक्ष्य तय किया गया है।
असाध्य रोगों के इलाज में कारगर, होम्योपैथी
कार्यक्रम में कोकिला बेन धीरूभाई अंबानी हॉस्पिटल इंदौर के कंसलटेंट मनोचिकित्सक डॉ. वैभव चतुर्वेदी ने कहा कि जब लोग जटिल असाध्य बीमारी से पीड़ित होते हैं तो मरीज के साथ-साथ उसके घर वाले भी आर्थिक एवं मानसिक रूप से परेशान होते हैं इसलिए इस तरह के मरीजों व उनके परिजनों को मनोचिकित्सा से मिलकर उनकी सलाह लेनी चाहिए।
डॉ. चतुर्वेदी ने साइकिएट्रिक ट्रीटमेंट के बारे में विस्तार से जानकारी दी। वहीं गुजरात के डॉ. जयेश पटेल, लखनऊ की डॉ. लुम्बा कमाल, प्रयागराज के डॉ. प्रिंस कुमार मिश्रा और दिल्ली की डॉ. नीरज गुप्ता ने असाध्य रोगों पर कारगर साबित हुए होम्योपैथी ट्रीटमेंट के अपने रोचक एवं उपयोगी अनुभव साझा किए। वक्ताओं ने कहा जिन बीमारियों पर कोई एक चिकित्सा पद्धति प्रभावी सिद्ध नहीं हो रही है उनके समग्र निदान के लिए तमाम चिकित्सा पद्धतियों को एक मंच पर लाया जाना आवश्यक है। बीजेपी प्रवक्ता दीपक जैन भी प्रोग्राम में शामिल हुए।


