पाँच साल बाद पर्दे पर तनिशा मुखर्जी की वापसी, डायरेक्टर कपिल कौस्तुभ शर्मा की ‘ज़िंदगी फिर भी खूबसूरत है’ के साथ

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पाँच साल बाद तनिशा मुखर्जी बड़े पर्दे पर वापसी कर रही हैं और इस बार उनके साथ है फिल्ममेकर कपिल कौस्तुभ शर्मा की कहानी ज़िंदगी फिर भी खूबसूरत है। मार्गाओ फाइल्स की सफलता के बाद कपिल अब एक ऐसी कहानी लेकर आ रहे हैं, जो पूरी तरह ज़िंदगी के छोटे-बड़े पलों से जुड़ी है और कई दशकों का सफर तय करती है। यह फिल्म दिखाती है कि वक्त के साथ इंसान, रिश्ते और जज़्बात किस तरह बदलते जाते हैं।

मुंबई की पारसी कम्युनिटी की पृष्ठभूमि पर बनी यह फिल्म 1990 के दशक से लेकर 2025 तक का सफर तय करती है और इसमें रोमांस, ह्यूमर और इंसानी जज़्बात का खूबसूरत मेल देखने को मिलेगा। फिल्म के सेंटर में हैं तनिशा मुखर्जी, जिनका किरदार ज़िंदगी के अलग-अलग पड़ावों से गुजरता है। कपिल के लिए तनिशा को कास्ट करना सिर्फ किसी जाने-पहचाने चेहरे को दोबारा पर्दे पर लाने की बात नहीं थी, बल्कि ऐसे एक्टर की तलाश थी, जो अलग-अलग उम्र के पड़ावों में इस किरदार को पूरी ईमानदारी के साथ जी सके।

तनिशा की वापसी और फिल्म के बारे में बात करते हुए डायरेक्टर कपिल कौस्तुभ शर्मा कहते हैं, “तनिशा एक ऐसी एक्टर हैं जिनमें एक खास तरह की इमोशनल क्वालिटी है, जो इस किरदार के लिए बहुत जरूरी थी। कहानी ज़िंदगी के अलग-अलग पड़ावों से होकर गुजरती है और मैं चाहता था कि कोई ऐसा कलाकार हो, जो इस सफर में ईमानदारी और गहराई ला सके। ज़िंदगी फिर भी खूबसूरत है मेरे लिए एक बहुत पर्सनल फिल्म है। यह रिश्तों, बदलते वक्त और आम ज़िंदगी की खूबसूरती के बारे में है और मुझे लगता है कि तनिशा ने इस किरदार में एक बेहद खास संवेदनशीलता लाई है।”

फिल्म में कपिल की कोशिश सिर्फ कहानी सुनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि असली माहौल और असली लोकेशन्स को पर्दे पर उतारने की भी है। फिल्म के कई हिस्सों की शूटिंग साउथ मुंबई और दादर पारसी कॉलोनी के ऑथेंटिक पारसी घरों में की गई है। फिल्म को डेवलप करते वक्त कपिल ने पारसी कम्युनिटी के लोगों के साथ भी करीब से काम किया, ताकि फिल्म में उनकी संस्कृति, तौर-तरीके और बोलचाल का अंदाज़ पूरी तरह असली महसूस हो।

डिटेलिंग पर यह खास ध्यान कपिल के फिल्ममेकिंग अप्रोच का हिस्सा रहा है। अब तुम्हारे हवाले वतन साथियो से अपने डेब्यू से लेकर डन्नो वाय ना जाने क्यों, डन्नो वाय 2… लाइफ इज़ अ मोमेंट और लव इज़ लव जैसी फिल्मों तक, कपिल ने अलग-अलग विषयों और फॉर्मैट्स में कहानियां कही हैं। लेकिन उनकी कहानियों में इंसानी रिश्ते हमेशा एक अहम हिस्सा रहे हैं।

ज़िंदगी फिर भी खूबसूरत है में कपिल ने कई जिम्मेदारियां अपने कंधों पर ली हैं। फिल्म को लिखने और डायरेक्ट करने के साथ-साथ वह इसे प्रोड्यूस भी कर रहे हैं और इसमें एक्टिंग भी कर रहे हैं। वह फिल्म में एक पारसी किरदार निभा रहे हैं, जिसका सफर अलग-अलग उम्र के पड़ावों से होकर गुजरता है। इसी वजह से कहानी के बड़े उम्र वाले हिस्सों के लिए उन्हें फिजिकल ट्रांसफॉर्मेशन से भी गुजरना पड़ा है।

इस फिल्म के पीछे कपिल की अपनी सिनेमाई यादों का भी खास कनेक्शन है। ज़िंदगी फिर भी खूबसूरत है नाम 1978 की फिल्म खट्टा मीठा के मशहूर गाने से इंस्पायर है। यही वह फिल्म थी, जिसने कपिल को बचपन में पर्दे पर पारसी दुनिया से रूबरू कराया था। फिल्म की एन्सेम्बल कास्ट में तनिशा मुखर्जी के साथ सुष्मिता मुखर्जी, कितू गिडवानी, परवीन दस्तूर, डेलनाज़ ईरानी, तनाज़ ईरानी, शाहरुख सिरस ईरानी, डॉली ठाकोर और अनन्या दत्ता नजर आएंगी।

कपिल के लिए यह फिल्म एक ऐसी कहानी कहने का मौका है, जो शोर-शराबे से दूर थोड़ी शांत, ज्यादा इमोशनल और रिश्तों के करीब है। साथ ही, इसके जरिए मुंबई और उसकी पारसी कम्युनिटी की एक ऑथेंटिक झलक भी बड़े पर्दे पर देखने को मिलेगी। ज़िंदगी फिर भी खूबसूरत है को थिएट्रिकल रिलीज़ से पहले इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल सर्किट में भी ले जाने की तैयारी है।

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