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जो भी कर्म करों, प्रभु चरणों में अर्पित करो
नम आंखों ने दी जया किशोरी को विदाई
इंदौर. संसार में जो भी होता है प्रभु की इच्छा से होता है लेकिन ज्ञान के अभाव में मनुष्य जो भी कर रहा है वह मन की कर रहा है और होता वो है जो प्रभु की इच्छा होती है, जो भी अच्छा या बुरा होता है व प्रभु इच्छा से अच्छे के लिए होता है अनेक हानि में लाभ होता है इसलिए व्यक्ति को चाहिए की वह जो भी करें वह प्रभु के चरणो में अर्पित कर, फल की इच्छा ईश्वर पर छोड दे अपेक्षा के बिना किया कर्म ज्यादा प्रभावशील होता है.
यह विचार बाणेश्वर कुण्ड पर श्रीमद् भागवत के समापन पर सोमवार को स्वर कोकिला सुश्री जया किशोरी जी ने व्यक्त किए, सोमवार को बाणेश्वर कुंड के विशाल मैदान पर विराट पांडाल में 70 हजार से ज्यादा श्रद्धालु कथा श्रवण करने पहुंचे. संजय शुक्ला मित्र मंडल की व्यवस्थाओं के साथ आयोजन में हर एक श्रद्धालु भाव विभोर हो गया, भजन और गीत संगीत की अनुपम शैली की ज्ञाता सुश्री जया किशेारी जी ने कथा की शुरूआत से हीं श्रद्धालुओं का दिल छू लिया, समापन दिवस पर प्रत्येक श्रद्धालु के मन में यही आशा रही कि कथा और आगे भी चलती रहे. इस अवसर संजय अंजलि शुक्ला ने स्वर कोकिला जया किशोरी को रजत और हीरे जडित मनोहारी मुकुट और उनके पिता शिवश्ंाकर शर्मा को रजत का मनमोहक छतर प्रदान किया जो पूरा पांडाल करतल ध्वनियों से गुंजायमान हो गया. वहीं वल्र्ड बुक आफ रिकार्डस् लंदन कि ओर से कथा के शुभारंभ पर निकली 5 किलोमीटर लंबी कलश यात्रा मार्ग पर बिछाए गए कारपेट एंव 1 लाख 11 हजार साडियां के वितरण को वल्र्ड बुक आफ रिकार्ड में शामिल किया गया. आयोजन स्थल पर संस्था के इंदौर प्रतिनिधि विरेन्द्र शर्मा एवं संस्था वल्र्ड बुक आफ रिकार्ड के अध्यक्ष संतोष शुक्ला ने दो अलग अलग प्रशस्ति पत्र संजय अंजलि शुक्ला को प्रदान किया.
नजरिया बदलों, किसी का निरादर मत करों
सुश्री जया किशोरी जी ने कहा कि प्रत्येक मनुष्य को सहीं और गलत का आभास होता है लेकिन वह मोह, लोभ और आचरण वश गलत संगत में बुरा कर बैठता है, मनुष्य को चाहिए कि वह मन की सुने और सीधी और सरल बात करें, वास्तव में व्यक्ति को अपना नजरिया बदलना होगा, क्योंकि व्यक्ति नहीं उससे परिस्थितियां न चाहते हुए भी गलत करवाती है इसके पीछे का कारण जानना चाहिए किसी भी बात के निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले उसके सहीं गलत दोनों पहलूओं पर नजर रखना चाहिए इसलिए कहा गया है कि किसी को दोषी कहने से पहले हजार बार विचार करों। अपना नजरिया बदलोगे तो संसार में सबसे से रह पाओंगे।
बरसाने की याद आई, जमकर खेली फूलों की होली
कथा समापन पर बरसाने की याद को विराट पाण्डाल में ताजा हो गई चंपा चमेली, गुलाब, नवरंग के पफूलों की पंखुडीयों से होली का दृश्य देखते ही बन रहा था; भक्त ही भक्तों पर पफूल बरसा रहे थे वही हर कोई श्रीकृष्ण भक्ति में लीन न जर आ रहा था।


