- Netizens hail Varun Dhawan’s acting in Hai Jawani Toh Ishq Hona Hai call it a ‘Paisa Vasool Entertainer'
- June Calls for a Laugh: The Best Comedy Titles to Stream on Netflix
- एका मोबिलिटी ने पुणे प्लांट से 1,000वें एससीवी को हरी झंडी दिखाई
- मोटोरोला ने लॉन्च किया edge 70 pro+, जो 2026 का सबसे स्टाइलिश फ्लैगशिप किलर स्मार्टफोन है
- जावेद जाफरी ने सरोज खान को दिया श्रेय, कहा उन्होंने सिखाया कि डांस में एक्सप्रेशन कितनी अहम है
सोनी टीवी के “मेरे साईं” में महत्वपूर्ण रोल निभाएंगे मशहूर मराठी एक्टर संजय नार्वेकर
मुम्बई. सोनी एंटरटेनमेंट टेलीविजन के बहुचर्चित शो मेरे साईं – श्रद्धा और सबुरी के अगले अध्याय में एक महत्वपूर्ण रोल निभाने के लिए मशहूर मराठी एक्टर संजय नार्वेकर को चुना गया है। इस शो में एक्टर तुषार दल्वी, साईं का लीड रोल निभा रहे हैं। संजय नार्वेकर, मराठी के साथ-साथ हिंदी फिल्मों, थिएटर और टीवी शोज़ में काम कर चुके हैं और मराठी के मंच पर उन्हें सबसे लोकप्रिय कलाकारों में से एक माना जाता है। अब वे सोनी टीवी के मेरे साईं में नजर आएंगे।
इस शो के आगामी ट्रैक में संजय नार्वेकर एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। वो इसमें रामदास का किरदार निभाएंगे, जो दूसरों के प्रति सेवा भाव रखते हैं और अपनी सारी जिंदगी गरीबों और वंचितों का ख्याल रखने में लगा देते हैं, लेकिन इस दौरान वे खुद अपने स्वास्थ्य का ख्याल नहीं रख पाते। अब वे दिल से यह चाहते हैं कि उनकी बेटी का विवाह शिर्डी में साईं बाबा के आशीर्वाद की छत्रछाया में संपन्न हो।
अपने रोल के बारे में बताते हुए संजय नार्वेकर कहते हैं, “मुझे मेरे साईं के इतने महत्वपूर्ण ट्रैक का हिस्सा बनकर बेहद खुशी महसूस हो रही है। यह शो बड़े खास और ज्वलंत मुद्दे उठाता है, और इसके हर ट्रैक से दर्शकों को हमेशा कुछ ना कुछ सीख मिलती है। मुझे लगता है कि मेरे साईं भारतीय टेलीविजन के सबसे चर्चित शोज़ में से एक है, जो हमारे आसपाससकारात्मकता फैलाता है।
मैं फिल्मों और नाटकों में काम करता रहा हूं और हमेशा से टेलीविजन पर कुछ अनोखे शोज़ करना चाहता था। ऐसे में जब प्रोड्यूसर ने मुझे इस रोल के लिए अप्रोच किया, तो मैं इस प्रस्ताव को ना नहीं कह सका। मैं उम्मीद करता हूं कि दर्शकों को यह ट्रैक पसंद आएगा।“
इस शो के आगामी ट्रैक में साईं रामदास की बेटी का विवाह शिर्डी में संपन्न कराकर रामदास की इच्छा पूरी करते हैं और उसे स्वस्थ भी कर देते हैं, ताकि वो अपनी पुत्री के विवाह में शामिल हो सके। वे रामदास को यह सीख भी देते हैं कि स्वास्थ्य से बढ़कर कुछ नहीं होता।


