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कम हड्डी में भी लग सकेंगे स्थायी दांत, एआई और डिजिटल प्लानिंग से बढ़ी इंप्लांट की सटीकता
ISOI मिड टर्म कॉन्फ्रेंस एवं प्रथम पीजी कन्वेंशन का आगाज, 19 जुलाई तक चलेगा तीन दिवसीय आयोजन
इंदौर। दांतों की हड्डी कम होने पर भी अब स्थायी दांत लगाना पहले की तुलना में ज्यादा आसान और सटीक हो गया है। डिजिटल प्लानिंग, एआई आधारित विश्लेषण और सर्जिकल गाइड जैसी नई तकनीकें ऐसे मरीजों के लिए उम्मीद बन रही हैं, जिन्हें पहले इंप्लांट कराना मुश्किल माना जाता था। यही नई तकनीकें शुक्रवार को ISOI मिड टर्म कॉन्फ्रेंस एवं प्रथम पीजी कन्वेंशन के पहले दिन चर्चा का केंद्र रहीं। होटल एसेंशियल में शुरू हुई तीन दिवसीय कॉन्फ्रेंस में देशभर से करीब 500 डेंटल विशेषज्ञ, पोस्ट ग्रेजुएट विद्यार्थी और डॉक्टर शामिल हुए।
वर्कशॉप के दौरान इंप्लांटोलॉजी विशेषज्ञ डॉ. मयूर खेरनार और डॉ. अभिषेक कुमार दुबे ने बताया कि इंप्लांटोलॉजी कोई नई शाखा नहीं है, बल्कि करीब 40 वर्षों से स्थापित विज्ञान है। लगातार हो रहे शोधों और तकनीकी सुधारों ने इसे पहले से ज्यादा सुरक्षित, आसान और सटीक बना दिया है। उन्होंने बताया कि अब कम हड्डी वाले मरीजों में भी बची हुई हड्डी का बेहतर उपयोग कर इंप्लांट लगाए जा रहे हैं।
केवल बुजुर्गों के लिए नहीं है इंप्लांट
डॉ. मयूर खेरनार ने कहा कि भारतीय मरीजों में उम्र बढ़ने के साथ जबड़े की हड्डी अपेक्षाकृत कम होना सामान्य बात है। यह कोई बीमारी नहीं है। नई तकनीकों की मदद से ऐसी स्थिति में भी इंप्लांट सफलतापूर्वक लगाए जा सकते हैं। उन्होंने बताया कि डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर के मरीज भी यदि उनकी बीमारी नियंत्रित है, तो इंप्लांट करा सकते हैं। ऐसे मरीजों के लिए अच्छे दांत और बेहतर चबाने की क्षमता संतुलित पोषण बनाए रखने में और भी महत्वपूर्ण हो जाती है।
विशेषज्ञों ने बताया कि इंप्लांट केवल बुजुर्गों के लिए नहीं हैं। यदि 16 से 18 वर्ष की उम्र के बाद किसी दुर्घटना में स्थायी दांत टूट जाए, तो उसका भी इंप्लांट से सफलतापूर्वक प्रतिस्थापन किया जा सकता है। हालांकि दूध के दांतों की जगह इंप्लांट नहीं लगाए जाते।
एआई बताएगा कहां सबसे मजबूत है हड्डी
वर्कशॉप में डिजिटल इंप्लांट प्लानिंग पर भी विस्तार से जानकारी दी गई। डिजिटल विशेषज्ञ सुदीप पॉल ने बताया कि अब कंप्यूटर आधारित प्लानिंग और एआई टूल्स यह विश्लेषण कर सकते हैं कि जबड़े में हड्डी कहां सबसे मजबूत है और किस स्थान पर इंप्लांट लगाने से सबसे बेहतर परिणाम मिलेंगे। इसके आधार पर सर्जिकल गाइड तैयार की जाती है, जिससे इंप्लांट बिल्कुल तय स्थान पर लगाया जा सकता है। इससे कम अनुभव वाले डॉक्टरों को भी अधिक सटीकता मिलती है और मरीजों के लिए प्रक्रिया सुरक्षित होती है।
आधुनिक तकनीकों पर होंगे वैज्ञानिक सत्र
ऑर्गेनाइजिंग सेक्रेटरी डॉ. गगन जायसवाल ने कहा कि अगले दो दिनों में आधुनिक इंप्लांट तकनीकों पर वैज्ञानिक व्याख्यान, केस डिस्कशन, लाइव डेमोंस्ट्रेशन, पोस्टर प्रेजेंटेशन और विशेष सत्र होंगे। कॉन्फ्रेंस के ऑर्गेनाइजिंग चेयरमैन डॉ. मनीष वर्मा ने बताया कि सम्मेलन का उद्देश्य दंत चिकित्सकों को नवीनतम तकनीकों से जोड़ना है। डॉ दीपक अग्रवाल ने बताया कि सम्मेलन में ISOI के अध्यक्ष डॉ. शरद शेट्टी, अंतरराष्ट्रीय वक्ता डॉ. कोमल मजूमदार सहित कुल 14 विशेषज्ञ अपने अनुभव साझा करेंगे। ट्रेजरार डॉ. राजीव श्रीवास्तव और साइंटिफिक चेयरपर्सन डॉ. शालीन खेत्रपाल ने बताया कि यह आयोजन प्रदेश के डॉक्टरों और पोस्ट ग्रेजुएट विद्यार्थियों को राष्ट्रीय स्तर के विशेषज्ञों से सीखने का महत्वपूर्ण अवसर देगा।


