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विदेश जाने की जरूरत नहीं, अब भारत में भी मिल रहा हाईटेक डेंटल इंप्लांट इलाज
ISOI मिड टर्म कॉन्फ्रेंस एवं प्रथम पीजी कन्वेंशन का दूसरा दिन, इंदौर में 19 जुलाई तक चल रहा तीन दिवसीय आयोजन
इंदौर। अगर दांत टूटने या निकल जाने के बाद आपको लगता है कि विदेश जैसी आधुनिक सुविधा भारत में उपलब्ध नहीं है, तो यह धारणा अब बदल चुकी है। डिजिटल प्लानिंग, एआई और हाईटेक इंप्लांट तकनीकों की मदद से अब भारत में भी उसी स्तर का इलाज हो रहा है, जिसके लिए कुछ साल पहले तक लोग विदेश का रुख करते थे। यही जानकारी शनिवार को इंडियन सोसाइटी ऑफ ओरल इम्प्लांटोलॉजिस्ट (ISOI) की मिड टर्म कॉन्फ्रेंस एवं प्रथम पीजी कन्वेंशन के दूसरे दिन विशेषज्ञों ने साझा की।
विशेषज्ञों ने बताया कि पहले नई तकनीक भारत तक पहुंचने में कई साल लग जाते थे, लेकिन अब दुनिया में जहां नई तकनीक आती है, लगभग उसी समय भारतीय डॉक्टर भी उसे अपनाने लगते हैं। इसका सीधा फायदा मरीजों को मिल रहा है। अब विदेश जाने की जरूरत कम हो रही है, बल्कि दूसरे देशों के मरीज भी भारत आकर कम खर्च में विश्वस्तरीय इलाज करा रहे हैं। आयोजन का औपचारिक उद्घाटन संभागायुक्त डॉ.सुदाम खाडे के आतिथ्य में हुआ। इस मौके पे इंडियन सोसाइटी ऑफ ओरल इम्प्लांटोलॉजिस्ट के नेशनल प्रेसिडेंट डॉ शरद शेट्टी और
नेशनल सेक्रेट्री डॉ रिकीन गोगरी खासतौर पे उपस्थित थे। आयोजन में 350 डेलिगेट्स औरन 20 से ज्यादा स्पीकर्स ने हिस्सा लिया।
जागरूकता बढ़ेगी तो मेडिकल टूरिज्म भी बढ़ेगा
मुख्य अतिथि संभागायुक्त डॉ.सुदाम खाडे ने कहा कि ओरल हेल्थ को लेकर लोगों में अभी भी जागरूकता बढ़ाने की जरूरत है। भारत में दांतों का इलाज कई विकसित देशों की तुलना में काफी किफायती है और गुणवत्ता भी अंतरराष्ट्रीय स्तर की है। ऐसे में डेंटल और मेडिकल टूरिज्म को बढ़ावा देने की बड़ी संभावनाएं हैं। सही जानकारी लोगों तक पहुंचेगी तो वे समय रहते इलाज कराएंगे और गंभीर समस्याओं से बच सकेंगे।
इलाज ज्यादा सटीक, दर्द और जटिलताओं की आशंका कम
डॉ . शेट्टी ने बताया कि डिजिटल तकनीक और एआई की मदद से अब इंप्लांट लगाने से पहले पूरे जबड़े की कंप्यूटर पर प्लानिंग की जाती है। इससे डॉक्टर पहले ही तय कर लेते हैं कि इंप्लांट कहां और किस एंगल पर लगाया जाएगा। इस तकनीक से मानवीय गलती की संभावना कम होती है, इलाज ज्यादा सटीक होता है और मरीज को बेहतर परिणाम मिलते हैं।
40 साल से डॉक्टरों को अपडेट कर रही है ISOI
कॉन्फ्रेंस के ऑर्गेनाइजिंग सेक्रेटरी डॉ. गगन जायसवाल ने बताया कि इंडियन सोसाइटी ऑफ ओरल इम्प्लांटोलॉजिस्ट पिछले 40 वर्षों से देशभर के दंत चिकित्सकों को नई तकनीकों और शोध से लगातार अपडेट कर रही है। संस्था का उद्देश्य यही है कि आधुनिक इंप्लांट तकनीक सिर्फ बड़े शहरों तक सीमित न रहे, बल्कि देश के हर डॉक्टर तक पहुंचे और मरीजों को बेहतर उपचार मिल सके। ऐसे सम्मेलन युवा डॉक्टरों और पोस्ट ग्रेजुएट विद्यार्थियों को नई तकनीक सीखने का अवसर देते हैं। जब डॉक्टर शुरुआत से ही आधुनिक तकनीकों से प्रशिक्षित होंगे, तो मरीजों को भी बेहतर और सुरक्षित इलाज मिलेगा। ट्रेजरार डॉ. राजीव श्रीवास्तव ने बताया इंप्लांट्स डेंटल ट्रीटमेंट में क्रांति की तरह है ये असल दांतों के कमी को पूरा करते है यही वजह है कि डेंटल के साथ स्टूडेंट्स का भी कॉन्फ्रेंस में आछा रुझान दिख रहा है।
अच्छी मुस्कान सिर्फ इलाज से नहीं, सही आदतों से भी
कॉन्फ्रेंस के ऑर्गेनाइजिंग चेयरमैन डॉ. मनीष वर्मा ने कहा कि पहले की तुलना में अब लोग ओरल हेल्थ को लेकर ज्यादा जागरूक हुए हैं। दिन में दो बार ब्रश करना, सही ब्रशिंग तकनीक अपनाना, माउथवॉश का उपयोग और तंबाकू से दूरी जैसी आदतों के कारण मुंह की बीमारियां कम हो रही हैं। अच्छी मुस्कान सिर्फ महंगे इलाज से नहीं, बल्कि रोजाना की सही आदतों से भी मिलती है। साइंटिफिक चेयरपर्सन डॉ. शालीन खेत्रपाल और डॉ दीपक अग्रवाल ने बताया आयोजन में एडवांस्ड इंप्लांट्स के साथ ही नवीन तकनीक युक्त मशीनों का डेमोंसट्रेशन डॉक्टर्स को दिया जा रहा है।


