- राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित हुई 'श्रीकांत'; भावुक हुए तुषार हीरानंदानी और निधि परमार बोले – "यह जीत हर उस इंसान की है जिसने अपनी सीमाओं के आगे हार नहीं मानी"
- सही देखभाल से 80 साल की उम्र में भी बच सकते हैं आपके प्राकृतिक दांत
- Award-winning Film Max, Min & Meowzaki Unveils sensuous Spanish Track ‘Ariva’, a nod to modern day romantic escapades.
- Tom Cruise aka Digger Rockwell Has a Message for Pelé, Maradona, Cristiano and Messi
- Zee 5 Unveils Its Biggest Multilingual Slate Yet Across Seven Languages
सही देखभाल से 80 साल की उम्र में भी बच सकते हैं आपके प्राकृतिक दांत
ISOI मिड टर्म कॉन्फ्रेंस एवं प्रथम पीजी कन्वेंशन का समापन, इंदौर में तीन दिन तक चली विशेषज्ञों की राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस
इंदौर। “उम्र बढ़ने पर दांत गिरना स्वाभाविक है” अगर आप भी ऐसा मानते हैं तो विशेषज्ञ इसे सबसे बड़ा भ्रम बताते हैं। उनका कहना है कि सही देखभाल, नियमित जांच और अच्छी ओरल हाइजीन अपनाई जाए तो 80-100 साल की उम्र तक भी प्राकृतिक दांत सुरक्षित रह सकते हैं। इंडियन सोसाइटी ऑफ ओरल इम्प्लांटोलॉजिस्ट (ISOI) की मिड टर्म कॉन्फ्रेंस एवं प्रथम पीजी कन्वेंशन के समापन दिवस पर देशभर के विशेषज्ञों ने ओरल हेल्थ से जुड़े ऐसे कई मिथकों को तोड़ा और लोगों को दांतों की देखभाल के आसान तरीके बताए।
इंप्लांट अब सिर्फ दांत लगाना नहीं, जटिल मामलों का भी समाधान
मुंबई की इंप्लांट विशेषज्ञ डॉ. कोमल मजूमदार ने बताया कि कई मरीज वर्षों तक दांत नहीं लगवाते, जिससे जबड़े की हड्डी कम हो जाती है। ऐसे मामलों में ‘साइनस लिफ्ट’ जैसी एडवांस प्रक्रिया के जरिए कृत्रिम हड्डी तैयार कर इंप्लांट लगाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि यह अब नियमित रूप से की जाने वाली सुरक्षित प्रक्रिया है और हर इंप्लांट विशेषज्ञ को इसे सीखना चाहिए ताकि जटिल मरीजों का भी इलाज किया जा सके।
विदेश नहीं, भारत में भी मिल रही विश्वस्तरीय स्माइल डिजाइनिंग
डॉ. कोमल मजूमदार ने कहा कि अच्छी स्माइल के लिए विदेश जाने की जरूरत नहीं है। भारत में भी विश्वस्तरीय स्माइल डिजाइनिंग और इंप्लांट उपचार उपलब्ध हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय डॉक्टर अंतरराष्ट्रीय स्तर का काम कर रहे हैं और कम खर्च में बेहतर इलाज दे रहे हैं। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि स्माइल डिजाइनिंग का उद्देश्य चेहरा प्राकृतिक दिखाना होना चाहिए, न कि कृत्रिम।
उम्र नहीं, मसूड़ों की सेहत तय करती है इंप्लांट
उन्होंने बताया कि इंप्लांट कराने की कोई अधिकतम उम्र नहीं होती। अगर मसूड़े स्वस्थ हैं और मुंह की सफाई अच्छी है तो 80 वर्ष की उम्र में भी इंप्लांट लगाए जा सकते हैं। वहीं 25 साल का व्यक्ति भी खराब ओरल हाइजीन होने पर इसके लिए उपयुक्त नहीं हो सकता।
चार-पांच घंटे में अस्थायी दांत, लेकिन हर मरीज के लिए नहीं
पुणे के पीरियोडॉन्टिस्ट डॉ. ऋतुज प्रदीप सुराना ने बताया कि डिजिटल तकनीक और आधुनिक इंप्लांट सिस्टम की मदद से कई मामलों में चार से पांच घंटे के भीतर अस्थायी दांत लगाए जा सकते हैं। हालांकि शुरुआती तीन महीने मरीज को नरम भोजन ही लेने की सलाह दी जाती है। इसके बाद हड्डी और इंप्लांट पूरी तरह जुड़ने पर सामान्य भोजन किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि यूवी एक्टिवेशन जैसी नई तकनीक इंप्लांट की सतह को अधिक सक्रिय बनाती है, जिससे हड्डी जल्दी जुड़ने में मदद मिलती है। हालांकि यह तकनीक हर मरीज पर समान रूप से लागू नहीं होती। इलाज का निर्णय मरीज की हड्डी की गुणवत्ता और स्वास्थ्य के आधार पर लिया जाता है।
इंदौर बना आधुनिक इंप्लांटोलॉजी का राष्ट्रीय मंच
कॉन्फ्रेंस के ऑर्गेनाइजिंग चेयरमैन डॉ. मनीष वर्मा ने बताया कि तीन दिन के सम्मेलन का उद्देश्य केवल वैज्ञानिक व्याख्यान कराना नहीं था, बल्कि देशभर के दंत चिकित्सकों और पोस्ट ग्रेजुएट विद्यार्थियों तक इंप्लांटोलॉजी की नवीनतम तकनीकों को पहुंचाना था। कॉन्फ्रेंस के ऑर्गेनाइजिंग सेक्रेटरी डॉ. गगन जायसवाल
ने कहा इस सम्मेलन में देशभर के विशेषज्ञों ने डिजिटल इंप्लांटोलॉजी, जटिल मामलों के उपचार और नई तकनीकों का अनुभव साझा किया। इससे मध्यप्रदेश सहित देश के युवा डॉक्टरों को एक ही मंच पर सीखने का अवसर मिला। ट्रेजरार डॉ. राजीव श्रीवास्तव कहा कि सम्मेलन का अंतिम लक्ष्य सिर्फ नई तकनीक सीखना नहीं, बल्कि उसे आम मरीज तक पहुंचाना है, ताकि बेहतर इलाज बड़े शहरों तक सीमित न रहे।साइंटिफिक चेयरपर्सन डॉ. शालीन खेत्रपाल ने बताया उपस्थित डॉक्टर्स व पीजी स्टूडेंट्स ने स्पीकर्स द्वारा जो प्रेजेंटेशन देखी उसमें सिर्फ सक्सेस स्टोरी नहीं स्पीकर्स ने अपने फैलियर से क्या सीखा उनके वीडियो प्रदर्शन के साथ भी स्टूडेंट्स को अच्छी सीख दी। को- चेयरमेन डॉ. दीपक अग्रवाल और डॉ.साहा ने बताया कॉन्फ्रेंस में स्टूडेंट्स को सीनियर से सीखने की इतनी ललक थी कि कांफ्रेंस हॉल के अलावा ट्रेड में भी छोटे-छोटे ग्रुप में स्टूडेंट्स ने सीनियर से लाइव डेमोंसट्रेशन लेकर अपने ज्ञान को अपग्रेड किया।
मिथक बनाम सच्चाई
- मिथक: उम्र बढ़ने पर दांत गिरना तय है।
सच्चाई: सही देखभाल और स्वस्थ मसूड़ों के साथ प्राकृतिक दांत जीवनभर सुरक्षित रह सकते हैं। - मिथक: इंप्लांट सिर्फ बुजुर्गों के लिए हैं।
सच्चाई: इंप्लांट की जरूरत उम्र नहीं, दांत की स्थिति और ओरल हेल्थ तय करती है। - मिथक: ज्यादा चाय या कॉफी पीने से दांत खराब हो जाते हैं।
सच्चाई: चाय-कॉफी केवल दाग छोड़ सकती है, नियमित सफाई से यह हटाए जा सकते हैं। - मिथक: दांतों की सफाई (स्केलिंग) कराने से दांत कमजोर हो जाते हैं।
सच्चाई: हर छह महीने में प्रोफेशनल क्लीनिंग दांतों और मसूड़ों को स्वस्थ रखने के लिए जरूरी है। - मिथक: इंप्लांट और टीथ ज्वेलरी एक ही चीज हैं।
सच्चाई: इंप्लांट खोए हुए दांत की जगह लगाया जाता है, जबकि टीथ ज्वेलरी केवल सौंदर्य से जुड़ी प्रक्रिया है।
ओरल हेल्थ के लिए 5 जरूरी टिप्स
- हर छह महीने में दंत चिकित्सक से जांच और जरूरत हो तो प्रोफेशनल क्लीनिंग कराएं।
- दिन में दो बार सही तरीके से ब्रश करें।
- चिप्स, कुरकुरे, बिस्किट और ज्यादा चिपकने वाले खाद्य पदार्थों का सेवन सीमित करें, खासकर बच्चों में।
- तंबाकू, गुटखा, सुपारी और उंगली या नमक से दांत साफ करने जैसी आदतों से बचें।
- मुंह में किसी भी समस्या का इंतजार न करें, समय पर जांच कराना ही दांतों को लंबे समय तक सुरक्षित रखने का सबसे आसान तरीका है।


