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होम्योपैथिक चिकित्सक डॉ. द्विवेदी ने एमजीएम मेडिकल कॉलेज के एमबीबीएस के प्रथम वर्ष के विद्यार्थियों को होम्योपैथी का बताया महत्व
डॉ. द्विवेदी ने नेशनल मेडिकल कमीशन के इस प्रयास को बहुत अच्छी शुरुआत बताया
इंदौर। शासकीय महात्मा गांधी स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय (एमजीएम मेडिकल कॉलेज) के एमबीबीएस प्रथम वर्ष के विद्यार्थियों के लिए फाउंडेशन कोर्ष के अंतर्गत बुधवार को एक विशेष तरह का लेक्चर आयोजित किया गया। स्वास्थ्य में वैकल्पिक स्वास्थ्य देखभाल प्रणाली (होम्योपैथी) का महत्व विषय पर आयोजित इस लेक्चर के वक्ता वैज्ञानिक सलाहाकर बोर्ड, केंद्रीय होम्योपैथिक अनुसंधान परिषद, आयुष मंत्रालय भारत सरकार के सदस्य एवं सुप्रसिद्ध होम्योपैथिक चिकित्सक डॉ. एके द्विवेदी थे।
डॉ. द्विवेदी ने अपने संबोधन में नेशनल मेडिकल कमीशन को एमबीबीएस के कोर्ष में इस तरह के फाउंडेशन कोर्स के अंतर्गत सभी प्रकार की चिकित्सा पद्धतियों की जानकारी विद्यार्थियों को देने के इस प्रयास को एक बहुत अच्छी शुरुआत बताई।
डॉ. द्विवेदी ने आगे कहा कि चिकित्सा विद्यार्थियों के लिए जिस तरह से मेडिकल के विभिन्न विषयों की जानकारी होना आवश्यक है उसी तरह से उन्हें विभिन्न चिकित्सा पद्धतियों की भी जानकारी होना भी अति आवश्यक है। एक परिपक्व चिकित्सक को यह समझ होना जरूरी है कि उनके सामने बैठा मरीज किस चिकित्सा पद्धति द्वारा शीघ्रता से ठीक हो सकता है।

डॉ. द्विवेदी ने बताया कि सभी चिकित्सा पद्धतियों का अपना-अपना महत्व है। सभी के मेरिट-डीमेरिट ( गुण एवं दोष) है। आपने बताया कि योग और आयुर्वेद को अपनाने से हम लंबे समय तक निरोगी रह सकते हैं। हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ती है। वहीं एलोपैथी के साथ होम्योपैथिक एवं फिजियोथैरेपी अपनाने से हम शीघ्र ही स्वस्थ हो सकते हैं। डॉ. द्विवेदी ने सर्वाइकल की परेशानियों से पीड़ित लोगों के लिए भुजंगासन, लंबर की परेशानी से पीड़ित के लिए सेतुबंधासन, वैरिकोज वेन के लिए अर्द्ध सर्वांगासन (सर्वांग) तथा विद्यार्थियों को शीर्षासन करने की सलाह दी।
डॉ. द्विवेदी ने बताया कि होम्योपैथिक चिकित्सा का अविष्कार डॉ सैम्युअल हैनिमेन ने किया था जो स्वयं एक एलोपैथी चिकित्सक थे। जिन्होंने मरीजों के शीघ्र स्वास्थ लाभ के लिए चिकित्सकों को समूल प्रयास करने की बात कही। डॉ. द्विवेदी ने बताया कि जहां होम्योपैथिक दवाई मीठी होने के कारण बच्चों को अति प्रिय लगती है वहीं शुगर के मरीजों को यही दवाइयां डिस्टिल वाटर में दी जाती है।
होम्योपैथिक दवाइयां किस तरह बनाई जाती है यह भी बताया
डॉ. द्विवेदी ने अपने सम्बोधन में होम्योपैथिक दवाइयां किस तरह बनाई जाती है तथा डेसिमल स्केल, सेंटिसिमल स्केल व 50 मिलिसिमल स्केल के बारे में छात्रा-छात्राओं को अवगत कराया। साथ ही डॉ. द्विवेदी ने बताया कि होम्योपैथिक दवाइयां पोटेंटाइस होने की वजह से इनका कोई साइड इफेक्ट शरीर पर नहीं होता है। कार्यक्रम का संचालन और आभार एमजीएम मेडिकल कॉलेज इंदौर में बॉयोकैमेस्ट्री विभाग की प्राध्यापक डॉ. संगीता पानेरी ने माना। एमजीएम मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. संजय दीक्षित ने होम्योपैथिक चिकित्सक डॉ. एके द्विवेदी का स्वागत किया।


