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मणिपाल हॉस्पिटल सॉल्टलेक में पहली बार सफलतापूर्वक ‘ऑर्बिटल एथरेक्टॉमी’ की गई, गंभीर हृदय रोगी की जान बचाई गई
कोलकाता, 30 जून 2025: हृदय रोग उपचार में एक बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए, मणिपाल हॉस्पिटल सॉल्टलेक — जो कि भारत के प्रमुख हेल्थकेयर नेटवर्क मणिपाल हॉस्पिटल्स का हिस्सा है — ने पहली बार ‘ऑर्बिटल एथरेक्टॉमी’ नामक एक अत्याधुनिक प्रक्रिया को सफलतापूर्वक अंजाम दिया। यह तकनीक हृदय की धमनियों (आर्टरीज़) में जमा सख्त कैल्शियम ब्लॉकेज को हटाने के लिए की जाती है।
यह जीवनरक्षक प्रक्रिया डॉ. (प्रो.) पार्थ सारथी बनर्जी, सीनियर कंसल्टेंट – कार्डियोलॉजी, और डॉ. अरिंदम पांडे, सीनियर कंसल्टेंट, इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट, मणिपाल हॉस्पिटल सॉल्टलेक की देखरेख में 65 वर्षीय एक पुरुष मरीज (नाम बदला हुआ), जो अनियंत्रित डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर से पीड़ित थे, पर की गई। मरीज को पहले दिसंबर 2024 में एंजियोप्लास्टी की गई थी, लेकिन कुछ महीनों बाद ही सामान्य गतिविधियों के दौरान उन्हें फिर से सीने में दर्द होने लगा।
मरीज को भर्ती कर लिया गया और डॉ. बनर्जी और डॉ. पांडे द्वारा किए गए कोरोनरी एंजियोग्राफी में तीन नई ब्लॉकेज पाई गईं। पहली, बाईं एंटीरियर डिजेंडिंग आर्टरी (LAD) में, जो दिल के सामने के हिस्से को रक्त पहुंचाती है। दूसरी, बाईं सर्कमफ्लेक्स आर्टरी (LCX) में, जो दिल के बाईं ओर और पीछे के हिस्से में खून पहुंचाती है। तीसरी, दाहिनी कोरोनरी आर्टरी (RCA) में, जो दिल के दाहिने और निचले हिस्से को ऑक्सीजन देती है।
जांच में RCA में बेहद सख्त और कैल्शियम जमी हुई ब्लॉकेज मिली, जो साधारण एंजियोप्लास्टी उपकरणों से खोली नहीं जा सकती थी। डॉक्टर्स ने बायपास सर्जरी की सलाह दी, लेकिन मरीज ने इसकी इनवेसिव प्रकृति के कारण मना कर दिया।
इसके बाद मरीज की दो दिन की एंजियोप्लास्टी प्रक्रिया की योजना बनाई गई। पहले दिन LAD और LCX में ब्लॉकेज सफलतापूर्वक खोली गई। दूसरे दिन RCA की सख्त ब्लॉकेज को हटाने के लिए ‘ऑर्बिटल एथरेक्टॉमी’ नामक विशेष तकनीक का उपयोग किया गया। इस प्रक्रिया में हीरे की नोक वाला एक घूमने वाला उपकरण उपयोग किया जाता है, जो ब्लॉकेज के अंदर मौजूद कैल्शियम को तोड़ देता है। ब्लॉकेज साफ करने के बाद वहां तीन स्टेंट लगाए गए और रक्त प्रवाह को 100% बहाल कर दिया गया। मरीज की हालत स्थिर रही और ICU में वह तेजी से स्वस्थ हो गए।
इस बारे में जानकारी देते हुए डॉ. (प्रो.) पार्थ सारथी बनर्जी ने कहा, “इस मरीज के मामले में ऑर्बिटल एथरेक्टॉमी का उपयोग सिर्फ एक क्लिनिकल जरूरत नहीं थी, बल्कि यह एक रणनीतिक निर्णय भी था ताकि हम मरीज के दीर्घकालिक स्वास्थ्य लाभ को सुनिश्चित कर सकें। आज के समय में, जब मेडिकल तकनीक तेजी से बदल रही है, ऐसे उन्नत विकल्पों को अपनाना बहुत जरूरी है, खासकर जटिल और उच्च जोखिम वाले मामलों में।”
डॉ. अरिंदम पांडे ने बताया, “इस मरीज की दाहिनी कोरोनरी आर्टरी में ब्लॉकेज बेहद सख्त थी और पारंपरिक एंजियोप्लास्टी उपकरणों से उसका इलाज संभव नहीं था। ऑर्बिटल एथरेक्टॉमी की मदद से हम सुरक्षित रूप से कैल्शियम को तोड़कर आर्टरी को स्टेंटिंग के लिए तैयार कर सके। मरीज की सफल रिकवरी इस तकनीक की उपयोगिता को दर्शाती है। यह हमारे अस्पताल के लिए ऐसे हाई-रिस्क मरीजों के इलाज की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।”


