- Toxics Link Welcomes CDSCO’s Nationwide Action Against Toxic Skin-Lightening Products
- bajaj Electricals comes on board as co-Powered by sponsor for Bigg Boss Hindi Season 20
- Rupali Suri, Manushi Chhillar and Malaika Arora Rule the Fashion Game: 3 Style Icons Who Continue to Turn Heads
- From Hathoda Tyagi to Jana: 7 Roles That Show Abhishek Banerjee’s Range
- Rohit Saraf on Undergoing 15-Months of Physical Transformation for The Revolutionaries: I was active, I was fit, but I was definitely not Brad Pitt from Fight Club
देशभर में छात्र प्रदर्शनों के बीच, शीना चौहान का संदेश: “अपने अधिकार जानिए। उनके लिए आवाज़ उठाइए।”
संयुक्त राष्ट्र में ह्यूमन राइट्स हीरो अवॉर्ड से सम्मानित मानवाधिकार राजदूत शीना चौहान ने भारत के सभी स्कूलों में मानवाधिकारों की अनिवार्य और व्यापक शिक्षा लागू करने की मांग की है, ताकि हर छात्र अपने शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार और यातना से मुक्त रहने के अधिकार सहित अपने सभी संवैधानिक एवं मानवाधिकारों से पूरी तरह परिचित हो सके।
शीना चौहान कहती हैं:
“शिक्षा का अधिकार आज इसलिए हमारे पास है क्योंकि भारत के स्वतंत्रता सेनानियों ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, विचारों की स्वतंत्रता और शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार का उपयोग करते हुए इसके लिए संघर्ष किया था। इसलिए जब हमारे देश के छात्र अपनी शिक्षा के अधिकार की रक्षा के लिए शांतिपूर्ण विरोध करते हैं, तो वे अपने संवैधानिक अधिकार का ही प्रयोग कर रहे होते हैं।”
“पिछले एक दशक से मैं लगातार यह मांग कर रही हूँ कि छात्रों को मानवाधिकारों की संपूर्ण शिक्षा दी जाए—जिसमें भारत का संविधान और संयुक्त राष्ट्र की यूनिवर्सल डिक्लेरेशन ऑफ ह्यूमन राइट्स (Universal Declaration of Human Rights) दोनों शामिल हों। इससे वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपने अधिकारों को समझ सकेंगे, उनके लिए खड़े हो सकेंगे और अपने कर्तव्यों को भी बेहतर ढंग से जान पाएँगे। अगर हमें अपने अधिकारों की जानकारी ही नहीं होगी, तो हम उनके लिए आवाज़ कैसे उठाएँगे?”
देशभर में चल रहे छात्र आंदोलनों के बीच शीना चौहान ने अपने सोशल मीडिया पर भी छात्रों के शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार का समर्थन करते हुए संदेश साझा किया:
“अपने अधिकार जानिए। उनके लिए आवाज़ उठाइए। उठिए, बोलिए। हर आवाज़ मायने रखती है।”
शीना चौहान को अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडेन द्वारा प्रेसिडेंशियल वॉलंटियर अवॉर्ड से सम्मानित किया जा चुका है। वह सोशल मीडिया पर संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय द्वारा फॉलो की जाने वाली एकमात्र भारतीय कलाकार हैं। उन्होंने अब तक लगभग 12 करोड़ लोगों तक बुनियादी मानवाधिकारों और समानता का संदेश पहुँचाया है तथा 130 से अधिक स्कूलों और विश्वविद्यालयों के पाठ्यक्रम में निःशुल्क मानवाधिकार शिक्षा को शामिल कराने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
शिक्षा के अधिकार पर चल रही राष्ट्रीय चर्चा के बीच शीना चौहान का मानना है कि वर्तमान समय में संविधान और मानवाधिकारों की शिक्षा अभी भी पर्याप्त नहीं है।
वह कहती हैं:
“सरकार की नई शिक्षा नीति (NEP) एक उत्कृष्ट पहल है। इसका उद्देश्य रटने की संस्कृति को समाप्त कर ऐसी शिक्षा देना है जो समझ, व्यावहारिक कौशल और वास्तविक जीवन में उपयोग की क्षमता विकसित करे। मानवाधिकारों की शिक्षा भी बिल्कुल ऐसी ही होनी चाहिए। केवल अधिकारों को याद कर लेना पर्याप्त नहीं है, बल्कि यह समझना जरूरी है कि वे हमारे जीवन और दूसरों के जीवन में कैसे लागू होते हैं और सबसे महत्वपूर्ण बात—उनका सही उपयोग कैसे किया जाए।”
“भारत के संविधान और संयुक्त राष्ट्र की यूनिवर्सल डिक्लेरेशन ऑफ ह्यूमन राइट्स की व्यावहारिक शिक्षा छात्रों को वह शक्ति और समझ देती है जिसकी एक जिम्मेदार नागरिक को एक न्यायपूर्ण, समान और लोकतांत्रिक समाज के निर्माण के लिए आवश्यकता होती है। आज के समय की यह सबसे बड़ी जरूरत है।”


