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भक्षक के 2 साल: भूमि सतीश पेडनेकर बोलीं, दुनिया आज भी बच्चों के लिए असुरक्षित
दो साल पहले भूमि सतीश पेडनेकर ने भक्षक के साथ अपने करियर में एक साहसिक फिल्म जोड़ी थी। यह एक क्राइम थ्रिलर फिल्म थी, जो बालिकाओं के साथ होने वाले यौन शोषण पर आधारित थी। आज जब भक्षक को रिलीज़ हुए 2 साल पूरे हो चुके हैं, भूमि इस उपलब्धि का जश्न मनाने के साथ-साथ “दिल टूटने” की भावना भी ज़ाहिर कर रही हैं, क्योंकि यह कहानी आज भी उतनी ही सच्ची और प्रासंगिक है। भूमि कहती हैं कि बीते कुछ हफ्तों ने एक बार फिर यह याद दिला दिया है कि दुनिया बच्चों के लिए कितनी असुरक्षित है, और आगे जोड़ती हैं कि “महिलाओं और बच्चों के खिलाफ यौन हिंसा हमारे समाज की बुनियादी सच्चाई बनती जा रही है।”
अपने हालिया इंस्टाग्राम पोस्ट में भूमि लिखती हैं,
“दो साल पहले भक्षक ने सीमाओं से परे सफर किया। दुनिया के हर कोने से संदेश आए—इसलिए नहीं कि लोगों ने इसे सिर्फ देखा, बल्कि इसलिए कि लोगों ने इसे महसूस किया। तब मैं अभिभूत थी। आज मेरा दिल टूटा हुआ है। क्योंकि सच्चाई यह है कि यह कहानी आज भी उतनी ही प्रासंगिक है। महिलाओं और बच्चों के खिलाफ यौन हिंसा हमारे समाज की बुनियादी डोर बनती जा रही है।”
वह आगे जोड़ती हैं,
“बीते कुछ हफ्तों ने हमें याद दिलाया है कि दुनिया बच्चों के लिए कितनी असुरक्षित हो सकती है। किसी भी बच्चे को इतनी छोटी उम्र में खतरे के प्रति सतर्क होकर नहीं जीना चाहिए। यह बोझ हमारा है, उनका नहीं। बच्चों को आज़ादी मिलनी चाहिए—खेलने की, अपनी पसंद के कपड़े पहनने की। उन्हें सुरक्षित, स्वीकार किया गया और तब सहारा दिया जाना चाहिए, जब उनके पास कोई न हो। कुछ फिल्में क्रेडिट रोल होने के साथ खत्म हो जाती हैं। और कुछ हमें नज़रें चुराने नहीं देतीं। भक्षक मेरे लिए हमेशा वैसी ही फिल्म रहेगी।”
भूमि ने अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी पर भी एक नोट लिखा, जिसे भक्षक के निर्देशक और लेखक पुलकित ने रीपोस्ट किया। भूमि ने लिखा,
“भक्षक के 2 साल। इस फिल्म का आखिरी मोनोलॉग आज भी मुझे डराता है। हर गुजरते साल के साथ यह और ज़्यादा प्रासंगिक होता जा रहा है, और ऐसा नहीं होना चाहिए। सिर्फ बीते कुछ हफ्तों में ही हमने कई ऐसे मामले देखे हैं, जहां बहुत छोटे बच्चों के साथ यौन शोषण हुआ है। हम अपने बच्चों को बचाने में असफल हो रहे हैं। हम एक टूटी हुई व्यवस्था हैं, जिसे अब ठीक करना ज़रूरी है। किसी भी छोटे बच्चे को इतनी कम उम्र में अपने शरीर और उस पर मंडराते खतरे के बारे में जागरूक होने की ज़रूरत नहीं होनी चाहिए। थोड़ी तो शर्म करो। अपराधियों को बेनकाब करो। उनकी सज़ा के लिए आवाज़ उठाओ।”
वहीं निर्देशक पुलकित ने भूमि के लिए एक भावुक नोट लिखा,
“धन्यवाद भूमि, वैषाली के किरदार को जिस तरह तुमने निभाया, उसके लिए। तुम थीं, हो और हमेशा मेरी पसंदीदा कलाकारों में से एक रहोगी, जिनके साथ मैं कहानियां कहना चाहता हूं। ढेर सारा प्यार।”
भूमि ने भी सोशल मीडिया स्टोरी के ज़रिए निर्देशक का शुक्रिया अदा किया।
भक्षक के साथ भूमि ने एक ऐसी फिल्म की अगुवाई की, जो आज की दुनिया में लगातार घट रही डरावनी सच्चाइयों और घटनाओं को दर्शाती है। इस फिल्म में भूमि ने न सिर्फ एक रोंगटे खड़े कर देने वाली कहानी का बोझ अपने कंधों पर उठाया, बल्कि अपने दमदार अभिनय से उसे पूरी तरह विश्वसनीय भी बनाया। यह पहली बार नहीं है जब भूमि ने सामाजिक मुद्दों पर खुलकर अपनी आवाज़ उठाई हो। जब कई कलाकार राष्ट्रीय मुद्दों से दूरी बनाए रखते हैं, तब भूमि अक्सर यौन शोषण और हिंसा से जुड़ी खबरों पर अपनी राय सामने रखती रही हैं।
उनकी फिल्मों का चुनाव भी उनकी सोच का ही विस्तार है—महिलाओं के पक्ष में खड़े होने वाली फिल्में जैसे टॉयलेट: एक प्रेम कथा, बाला, दम लगा के हईशा, बधाई दो, थैंक यू फॉर कमिंग और कई अन्य इसका उदाहरण हैं।
उन्होंने तब भी यह किया था, और आज भी कर रही हैं—अपनी हालिया सफल सीरीज़ दलदल के साथ, जो इस समय ग्लोबली ट्रेंड कर रही है।


