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आज एक बीमारी के लिए कई सर्जरी विकल्प उपलब्ध, मरीज की स्थिति के अनुसार किया जाता है चयन
एमपीएएसआई कॉन (MPASICON) 2026 के दूसरे दिन 60 लेक्चर और 80 पोस्टर प्रेजेंटेशन, रोबोट पर लाइव हैंड्स ऑन ट्रेनिंग
इंदौर। गॉल ब्लैडर हमारे शरीर का बहुत छोटा-सा अंग है, जो लिवर के नीचे होता है। इसमें कई बार स्टोन्स बन जाते हैं, जिससे दर्द और इन्फेक्शन हो जाता है। हमारे देश में 100 में से 5 लोगों को गॉल ब्लैडर स्टोन होता है, खासतौर पर महिलाओं में। किडनी का स्टोन यूरिन के रास्ते से निकल सकता है परंतु गॉल ब्लैडर स्टोन के लिए सर्जरी ही एक मात्र तरीका होता है, इसे आज डेमोस्ट्रेट किया गया। पहले एक बीमारी होने पर सिर्फ ओपन सर्जरी का विकल्प होता था परंतु आज तकनीक बेहतर होने से हमारे पास लेप्रोस्कोपी, रोबोटिक्स सहित कई प्रकार की सर्जरी करने के ऑप्शन होते हैं। एसोसिएशन ऑफ सर्जन्स ऑफ इंडिया के मध्यप्रदेश स्टेट चैप्टर और इंदौर सिटी चैप्टर के संयुक्त तत्वावधान में एमपी चैप्टर की 43 वीं एमपीएएसआई कॉन (MPASICON) 2026 के दूसरे दिन यह बात जयपुर से आए डॉ वीके कपूर ने कही।
उन्होंने किडनी और गॉल ब्लैडर स्टोन को लेकर चली आ रही पुरानी मान्यताओं पर भी बात की। उन्होंने बताया कि पीढ़ियों से चली आ रही कई धारणाओं का कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है। किडनी स्टोन से बचाव के लिए रोजाना पर्याप्त मात्रा में पानी पीना जरूरी है। गॉल ब्लैडर स्टोन के कारणों पर चर्चा करते हुए बताया गया कि यह समस्या ओवरवेट होने, ज्यादा फैटी फूड खाने और महिलाओं में हार्मोनल बदलाव के कारण अधिक देखने को मिलती है। ऐसे में संतुलित आहार और स्वस्थ जीवनशैली अपनाना जरूरी है।
रोबोट पर लाइव हैंड्स ऑन ट्रेनिंग
तीन दिवसीय एमपीएएसआई कॉन 2026 के दूसरे दिन चार हॉल में एक साथ शैक्षणिक सत्र आयोजित हुए। कॉन्फ्रेंस के सेक्रेटरी डॉ अक्षय शर्मा ने बताया कि दूसरे दिन करीब 60 लेक्चर हुए और 80 से ज्यादा पोस्टर प्रेजेंटेशन किए गए। इनमें जनरल सर्जरी से जुड़े विभिन्न विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। कॉन्फ्रेंस में रोबोट पर लाइव हैंड्स ऑन ट्रेनिंग भी कराई गई, जिससे सर्जनस को रोबोटिक सर्जरी का प्रैक्टिकल अनुभव मिला। इससे भविष्य में रोबोट्स की मदद से सर्जरी को और अधिक सुरक्षित और सटीक बनाने में मदद मिलेगी।
ओवरवेट होने पर भी हो सकते हैं स्टोन
कॉन्फ्रेंस के प्रेसिडेंट डॉ राकेश शिवहरे ने बताया कि गॉल ब्लैडर सर्जरी भले ही आम हो, लेकिन इसके लिए सही ट्रेनिंग बेहद जरूरी है। यदि सर्जरी के दौरान लिवर और गॉल ब्लेडर को जोड़ने वाला डक्ट क्षतिग्रस्त हो जाए तो मरीज के शरीर में पित्त फैल सकता है। इसी वजह से कॉन्फ्रेंस में इस सर्जरी को निपुणता और सुरक्षा के साथ करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
छत्रपति संभाजी नगर से आए डॉ प्रवीण सूर्यवंशी ने बताया कि लिवर में एक वर्म घर बना लेता है, जो जानवरों विशेषकर डॉग्स से मनुष्यों में आ सकता है। इससे मरीजों को पेट में काफी दर्द और भारीपन लगता है। इसके लक्षण काफी कॉमन हैं, इसलिए मरीज समझ नहीं पाते हैं। यह सिर्फ सोनोग्राफी में ही पता लगता है। इसे लेप्रोस्कोपी के जरिए निकाला जाता है। आज हमने इसी सर्जरी को डेमोस्ट्रेट किया।


