- Riteish Deshmukh takes a leap into Telugu cinema with Ram Pothineni’s RAPO23
- From Ananya Panday to Kashika Kapoor to Janhvi Kapoor - 5 OG Bollywood Beauties Who Will Give You the Perfect Garba Looks You Need This Navratri
- From Reena Malhotra to Kamalpreet Dhanoa: 25 Years of Dia Mirza and Her Evolution as an Actor
- Who is Pragati Srivastava? The Fresh Face Set for a Promising Bollywood Debut with Aanand L Rai’s Nakhrewaalii
- Mia by Tanishq Launches "Lightscapes": A Jewellery Collection Inspired by the Magic of Festive Lights
स्ट्रोक से लिवर ट्यूमर तक बिना बड़े ऑपरेशन इलाज की ट्रेनिंग, सीवीआईसी समिट के पहले दिन देशभर के विशेषज्ञ इंदौर में जुटे
स्ट्रोक, ब्रेन ब्लॉकेज और लिवर ट्यूमर के इलाज पर विशेषज्ञों ने सिखाईं अत्याधुनिक तकनीकें
छोटा चीरा, कम दर्द और तेज़ रिकवरी: इंटरवेंशनल रेडियोलॉजी से मरीजों को मिल रही नई उम्मीद
इंदौर, 7 फरवरी 2026। मध्य भारत में आधुनिक और कम दर्द वाले इलाज को बढ़ावा देने की दिशा में इंदौर में आयोजित सीवीआईसी इंटरवेंशनल रेडियोलॉजी समिट 2026 का पहला दिन चिकित्सा क्षेत्र के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित हुआ। अरबिंदो परिसर स्थित इरकैड इंडिया में देशभर से आए इंटरवेंशनल रेडियोलॉजिस्ट और सुपर स्पेशलिस्ट डॉक्टरों ने स्ट्रोक, ब्रेन ब्लॉकेज, लिवर ट्यूमर और किडनी से जुड़ी जटिल बीमारियों के बिना बड़े ऑपरेशन वाले इलाज पर गहन चर्चा की और नई तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण लिया।
दिनभर चले वैज्ञानिक सत्रों में यह बताया गया कि आज इंटरवेंशनल रेडियोलॉजी की मदद से कई गंभीर बीमारियों का इलाज केवल एक छोटे से पंचर या कैथेटर के जरिए संभव है। इससे मरीज को बड़े चीरे, लंबे अस्पताल में भर्ती और ज्यादा दर्द से राहत मिलती है। विशेषज्ञों ने कहा कि समय पर सही तकनीक अपनाने से स्ट्रोक और ट्यूमर जैसी जानलेवा स्थितियों में भी जीवन बचाया जा सकता है।
न्यूरो इंटरवेंशन सत्र में ब्रेन एन्यूरिज्म के लिए एनेयूरिज्म कोइलिंग, ब्लॉकेज हटाने के लिए मैकेनिकल थ्रोम्बेक्टॉमी, फ्लो डाइवर्टर डिप्लॉयमेंट और कैरोटिड आर्टरी स्टेंटिंग जैसी प्रक्रियाओं पर लाइव केस डिस्कशन हुए। डॉक्टरों ने बताया कि इन तकनीकों से लकवे का खतरा कम होता है और मरीज जल्दी सामान्य जीवन में लौट सकता है।
इसके बाद हेपेटोबिलियरी इंटरवेंशन सत्र में TIPS प्रक्रिया, लिवर ट्यूमर के लिए TACE थेरेपी, बाइल डक्ट ड्रेनेज और पोर्टल वेन थ्रोम्बोसिस मैनेजमेंट जैसे विषयों पर विस्तार से जानकारी दी गई। इन तकनीकों में दवा सीधे प्रभावित हिस्से तक पहुंचाई जाती है, जिससे इलाज अधिक सटीक और असरदार होता है।
नेफ्रोलॉजी इंटरवेंशन सत्र में फिस्टुलोप्लास्टी और सेंट्रल वेनस स्टेंटिंग जैसी प्रक्रियाओं पर प्रशिक्षण दिया गया, जो डायलिसिस मरीजों के लिए काफी फायदेमंद साबित होती हैं। इससे बार-बार सर्जरी की जरूरत कम होती है और मरीजों को बेहतर जीवन गुणवत्ता मिलती है।
सीवीआईसी इंदौर के इंटरवेंशनल रेडियोलॉजिस्ट एवं समिट ऑर्गनाइजिंग फैकल्टी सदस्य डॉ. निशांत भार्गव ने कहा, “हमारा उद्देश्य है कि मध्य भारत के डॉक्टरों को वही तकनीक और ट्रेनिंग मिले जो बड़े महानगरों में उपलब्ध है। जब डॉक्टर आधुनिक उपकरणों और प्रक्रियाओं में दक्ष होंगे, तभी मरीजों को बिना बड़े ऑपरेशन सुरक्षित और तेज़ इलाज मिल सकेगा। इस समिट के जरिए हम विश्वस्तरीय ज्ञान को इंदौर तक ला रहे हैं।”
इंटरवेंशनल रेडियोलॉजिस्ट एवं एंडोवैस्कुलर स्पेशलिस्ट डॉ. आलोक उडिया ने बताया, “आज स्ट्रोक या ट्यूमर जैसी बीमारियों में ओपन सर्जरी ही एकमात्र विकल्प नहीं है। कैथेटर आधारित तकनीकों से ब्लॉकेज हटाना या दवा सीधे ट्यूमर तक पहुंचाना संभव है। इससे मरीज को कम दर्द, कम खर्च और जल्दी रिकवरी मिलती है। यही भविष्य की चिकित्सा है, और हम चाहते हैं कि यह सुविधा हर मरीज तक पहुंचे।”
सीनियर इंटरवेंशनल रेडियोलॉजिस्ट एवं वैस्कुलर इंटरवेंशन विशेषज्ञ डॉ. शैलेश गुप्ता ने कहा, “इंटरवेंशनल रेडियोलॉजी मरीजों के लिए गेम-चेंजर साबित हो रही है। कई प्रक्रियाओं में मरीज उसी दिन घर जा सकता है। संक्रमण और जटिलताओं का खतरा भी कम रहता है। इस तरह की ट्रेनिंग से मध्य भारत में ही बड़े शहरों जैसा इलाज संभव होगा, जिससे मरीजों को बाहर जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।”


