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रिश्तों, बिछड़ने और उम्मीद की कहानी कहता है ‘मैक्स, मिन एंड म्याऊज़ाकी’ का ट्रेलर
कुछ फिल्में बड़े पैमाने और भव्यता के साथ आती हैं, तो कुछ अपनी सादगी और सच्चाई से दिल जीत लेती हैं। ऐसे समय में, जब ज़िंदगी नोटिफिकेशन, तुरंत बनने वाली राय और पलभर के रिश्तों के बीच सिमटती जा रही है, अवॉर्ड विनिंग फिल्म ‘मैक्स, मिन एंड म्याऊज़ाकी’ एक शांत लेकिन दिल को छू लेने वाली कहानी लेकर आई है। अभिनेत्री और निर्माता समीक्षा ओसवाल द्वारा प्रस्तुत यह फिल्म उन रिश्तों की बात करती है जो धीरे-धीरे टूटने लगते हैं, उन लोगों की जो एक-दूसरे से दूर हो जाते हैं और उस ज़िंदगी की जो हमेशा हमारी योजनाओं के मुताबिक नहीं चलती। आसान जवाब ढूंढने की बजाय यह फिल्म उस सफर को दिखाती है, जिसमें इंसान धीरे-धीरे, मुश्किलों के बीच खुद को फिर से संभालना और आगे बढ़ना सीखता है।
अब फिल्म का ट्रेलर रिलीज़ कर दिया गया है, जो प्यार, बिछड़ने, साथ और उन छोटे-छोटे पलों से बनी इस कहानी की एक खूबसूरत झलक दिखाता है, जो चुपचाप हमारी ज़िंदगी बदल देते हैं। फिल्म को दुनिया भर में खूब सराहना मिली है। इसका प्रीमियर बुसान इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में हुआ था और इसे पाम स्प्रिंग्स इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल के ‘बेस्ट ऑफ फेस्ट’ चयन में भी जगह मिली। हिंदी और अंग्रेज़ी भाषा में बनी इस फिल्म को सोनोमा सैन फ्रांसिस्को और ओसाका में दर्शकों का सम्मान मिला, जबकि स्टटगार्ट, सिनसिनाटी, बर्लिन इंडो-जर्मन फिल्म वीक और कनाडा के RIFFA में इसे बेस्ट फीचर फिल्म का पुरस्कार मिला।
फिल्म में मेधा शंकर, सिद्धार्थ मेनन, आदिल हुसैन, मंदिरा बेदी, नासर, नफीसा अली और विधात्री बांदी अहम भूमिकाओं में नज़र आएंगे।
कहानी मैक्स और मिन की है, जो एक युवा कपल हैं। जब ज़िंदगी उनसे एक-दूसरे का साथ देने की सबसे ज़्यादा उम्मीद करती है, तभी उनके रिश्ते में दरार आने लगती है। मिन के चले जाने के बाद भी मैक्स उसकी यादों और उसके बिना आए खालीपन के साथ जीना सीखने की कोशिश करता है। इसी दौरान उसे सहारा मिलता है ‘म्याऊज़ाकी’ नाम की उस बिल्ली से, जिसे दोनों ने कभी साथ मिलकर पाला था। माना जाता है कि इस बिल्ली का नाम मशहूर फिल्मकार हायाओ मियाज़ाकी से प्रेरित है। यह सिर्फ एक ब्रेकअप की कहानी नहीं है, बल्कि खोने के दर्द के साथ जीना सीखने, खुद को फिर से संभालने और यह समझने की कहानी है कि प्यार हमेशा खत्म नहीं होता, बस उसकी जगह और रूप बदल जाता है।
इस फिल्म में न कोई बड़े-बड़े ट्विस्ट हैं और न ही ज़रूरत से ज़्यादा नाटकीय घटनाएं। यह अधूरी रह गई बातों, असहज खामोशियों, अचानक चेहरे पर मुस्कान ले आने वाले पलों, अलग-अलग पीढ़ियों की सोच और उन एहसासों को जोड़ती है, जहां लोग समझते हैं कि आगे बढ़ने का मतलब हमेशा सब कुछ पीछे छोड़ देना नहीं होता। इस पूरे सफर में म्याऊज़ाकी हर पल का गवाह बनता है और यह एहसास दिलाता है कि सुकून हमें सबसे अनपेक्षित जगहों पर भी मिल सकता है।
फिल्म की कहानी बारिशों वाली मुंबई की गलियों में आगे बढ़ती है और रोज़मर्रा की उन छोटी-छोटी बातों में खूबसूरती ढूंढ़ती है, जिन्हें हम अक्सर नज़रअंदाज़ कर देते हैं। यह फिल्म परफेक्ट रिश्तों की नहीं, बल्कि सच्चे रिश्तों की बात करती है। यह सिर्फ खुशहाल अंत की कहानी नहीं, बल्कि दोबारा शुरुआत करने का हौसला देने वाली कहानी है। और शायद इसी सफर के दौरान, जब इसके किरदार धीरे-धीरे खुद को संभालते हैं, तब यह फिल्म अपने दर्शकों के दिलों को भी थोड़ा सुकून देने की कोशिश करती है।
पद्मकुमार नरसिम्हमूर्ति द्वारा लिखित और निर्देशित ‘मैक्स, मिन एंड म्याऊज़ाकी’ में सिद्धार्थ मेनन, मेधा शंकर, आदिल हुसैन, मंदिरा बेदी, नासर, नफीसा अली और विधात्री बांदी मुख्य भूमिकाओं में हैं। फिल्म के संगीत को शेल ओसवाल ने अपनी आवाज़ दी है। SSO प्रोडक्शंस प्रस्तुत इस फिल्म का निर्माण समीक्षा ओसवाल और उद्योगपति-गायक शेल ओसवाल ने किया है।
‘मैक्स, मिन एंड म्याऊज़ाकी’ 24 जुलाई को सिर्फ सिनेमाघरों में रिलीज़ होगी।


