- This independence day, india is celebrating the heroes of operation safed sagar
- डी बीयर्स साइटहोल्डर अंकित जेम्स ने ‘Eyora Jewels’ के साथ रिटेल सेक्टर में किया प्रवेश
- Back to Class! Prime Video Announces Seasons 2 and 3 of Fan-Favorite Adarsh Baal Vidyalaya
- इस स्वतंत्रता दिवस पर केनस्टार लेकर आया ‘नो फोन ऑवर 2.0’, पिछले साल से 3 गुना अधिक भागीदारी का लक्ष्य
- ऑपरेशन सफेद सागर की सफलता के बीच दीया मिर्ज़ा ने बताया, उनके लिए देशभक्ति के क्या मायने हैं
समय रहते अगर हो जाए लक्षणों की पहचान; तो कैंसर जैसे रोगों का उपचार भी संभव
चौथी ब्रोन्कोपल्मोनरी वर्ल्ड कांग्रेस 2026 का सन्देश:
इंदौर, 04 जुलाई 2026। ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में शनिवार से चौथी ब्रोंकोपल्मोनरी वर्ल्ड कांग्रेस 2026 की मुख्य कॉन्फ्रेंस की शुरुआत हुई। कॉन्फ्रेंस में देश और विदेश से आए पल्मोनोलॉजिस्ट, क्रिटिकल केयर विशेषज्ञ, थोरासिक सर्जन, मेडिकल रिसर्चर और युवा चिकित्सक शामिल हुए। पहले दिन फेफड़ों की बीमारियों के आधुनिक उपचार, नई रिसर्च और उन्नत तकनीकों पर विशेषज्ञों ने अपने अनुभव साझा किए। कॉन्फ्रेंस में 700 से अधिक प्रतिभागियों ने पंजीयन कराया है।
पहले दिन पल्मोनरी मेडिसिन, इंटरवेंशनल पल्मोनोलॉजी, क्रिटिकल केयर, स्लीप मेडिसिन, पल्मोनरी रिहैबिलिटेशन, थोरासिक सर्जरी और रेस्पिरेटरी रिसर्च जैसे विषयों पर साइंटिफिक सेशंस आयोजित किए गए। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों ने फेफड़ों की जटिल बीमारियों के निदान और उपचार में हो रहे नए बदलाव, आधुनिक तकनीक और क्लिनिकल अनुभव प्रतिभागियों के साथ साझा किए। कॉन्फ्रेंस का इनोग्रेशन पहले दिन शाम 07 बजे इंडेक्स ग्रुप के चेयरमैन श्री सुरेश सिंह भदोरिया, डॉ राजेंद्र प्रसाद एवं डॉ अतुल सी मेहता द्वारा किया गया ।
कॉन्फ्रेंस में देश के विभिन्न राज्यों से आए श्वसन रोग विभाग के 100 से अधिक पोस्ट ग्रेजुएट विद्यार्थियों ने अपने रिसर्च पेपर प्रस्तुत किए। वहीं 30 से अधिक टीमों ने पोस्ट ग्रेजुएट क्विज प्रतियोगिता में भाग लेकर अपनी एकेडमिक और क्लिनिकल जानकारी का प्रदर्शन किया। रिसर्च पेपर और पोस्टर प्रेजेंटेशन, क्लिनिकल केस डिस्कशन तथा वैज्ञानिक संवाद के जरिए युवा चिकित्सकों को वरिष्ठ विशेषज्ञों से सीखने और अपने शोध प्रस्तुत करने का अवसर मिला।
कॉन्फ्रेंस में भारत के विभिन्न राज्यों के साथ-साथ अमेरिका, ब्रिटेन, नेपाल, श्रीलंका, बांग्लादेश, मालदीव एवं अन्य देशों की अंतरराष्ट्रीय फैकल्टी, पद्मश्री सम्मानित विशेषज्ञ और देश के वरिष्ठ चिकित्सकों ने विभिन्न साइंटिफिक सेशंस को संबोधित किया। इस दौरान यूएस में अपना लोहा मनवा चुके डॉ अतुल सी मेहता को लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड से सम्मानित किया गया। विशेषज्ञों ने फेफड़ों की बीमारियों के इलाज में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, आधुनिक डायग्नोस्टिक तकनीक, इंटरवेंशनल प्रक्रियाओं और मरीज केंद्रित उपचार पद्धतियों की भूमिका पर भी विस्तार से चर्चा की।
कॉन्फ्रेंस के ऑर्गेनाइजिंग सेक्रेटरी प्रो. डॉ. रवि डोसी ने कहा कि “बदलती जीवनशैली, बढ़ता वायु प्रदूषण, धूम्रपान, प्रदूषण, संक्रमण और एलर्जी फेफड़ों की बीमारियों के प्रमुख कारण बन रहे हैं। अस्थमा, सीओपीडी, फेफड़ों का संक्रमण और लंग कैंसर जैसी बीमारियों के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। विशेषज्ञों ने कहा कि समय पर जांच, शुरुआती पहचान और आधुनिक उपचार से इन बीमारियों पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है। अगर लक्ष्णों को जांच कर समय पर उपचार प्राप्त हो जाए तो कैंसर जैसी बीमारियों को भी हराना संभव है । धूम्रपान से दूरी, स्वच्छ वातावरण, नियमित व्यायाम, संतुलित आहार, टीकाकरण और जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ चिकित्सक से परामर्श फेफड़ों को स्वस्थ रखने के लिए जरूरी है।”
डॉ डोसी ने बताया, “कॉन्फ्रेंस के पहले दिन साइंटिफिक सेशंस में विशेषज्ञों और प्रतिभागियों की उत्साहजनक भागीदारी रही। विभिन्न विषयों पर हुए विचार-विमर्श से चिकित्सकों को नवीनतम वैज्ञानिक जानकारी और आधुनिक उपचार पद्धतियों को समझने का अवसर मिला। कोविड के बाद उत्पन्न होने वाली श्वसन संबंधी जटिलताओं, टीबी के बाद फेफड़ों पर पड़ने वाले प्रभाव तथा पल्मोनरी हाइपरटेंशन जैसी गंभीर बीमारियों की समय पर पहचान और वैज्ञानिक उपचार आज की आवश्यकता है। वहीं ब्रोंकोस्कोपी एवं नेविगेशन तकनीकों में हो रहे नवाचार फेफड़ों की बीमारियों के सटीक निदान में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। बड़ी संख्या में पोस्ट ग्रेजुएट विद्यार्थियों ने अपने शोध प्रस्तुत किए और क्विज प्रतियोगिता में भी उत्साह के साथ भाग लिया। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन चिकित्सा शिक्षा, शोध और मरीजों की बेहतर देखभाल को नई दिशा देते हैं। कॉन्फ्रेंस के दूसरे दिन भी वैज्ञानिक सत्र, क्लिनिकल केस डिस्कशन, विशेषज्ञ व्याख्यान और रिसर्च प्रेजेंटेशन होंगे, जिनमें देश और विदेश के विशेषज्ञ फेफड़ों की बीमारियों के उपचार से जुड़े नवीनतम शोध और अनुभव साझा करेंगे।“


