सुपर किड्स में आजादी का जश्न, बच्चों ने दिखाया अपना हुनर

सुपर किड्स स्पेशल स्कूल के सुपर बच्चों ने गायन, नृत्य, भाषण और अभिनय से बांधा समां

आयोजन में अभिनेता क्षितिज पवार और कंटेंट क्रिएटर ‘अनऑफिशियल हिमांशु’ भी मौजूद रहे

इंदौर। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर सुपर किड्स एकेडमी एवं सुपर किड्स स्पेशल स्कूल, इंदौर में देशभक्ति और समावेशन से जुड़ा विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में विशेष आवश्यकता वाले बच्चों ने गायन, नृत्य, भाषण और अभिनय की शानदार प्रस्तुतियां देकर अपनी प्रतिभा और आत्मविश्वास का परिचय दिया। बच्चों की प्रस्तुतियों ने अभिभावकों और अतिथियों को भावुक करने के साथ ही उनका उत्साह भी बढ़ाया।

बच्चों की प्रतिभा को मिला सम्मान

कार्यक्रम में बॉलीवुड अभिनेता क्षितिज पवार और डिजिटल कंटेंट क्रिएटर ‘अनऑफिशियल हिमांशु’ विशेष रूप से मौजूद रहे। दोनों अतिथियों ने बच्चों की प्रस्तुतियों की सराहना करते हुए उनका उत्साहवर्धन किया। उन्होंने कहा कि बच्चों को मंच और अवसर मिलने से उनके आत्मविश्वास में बढ़ोतरी होती है।

समान अवसर देना संस्था का उद्देश्य

अविप्र सोशल वेलफेयर सोसाइटी की प्रेसीडेंट वर्षा कोसरवाल ने कहा कि संस्था का उद्देश्य न्यूरोडाइवर्स बच्चों को समाज में समान रूप से स्वीकार करना और उन्हें सामान्य शैक्षणिक व सामाजिक गतिविधियों में भाग लेने के अवसर देना है। उन्होंने कहा कि समावेशी व्यवस्था के लिए अभिभावकों, शिक्षकों और समाज के सहयोग की आवश्यकता है।

‘मदर फिटनेस प्रोग्राम’ की तैयारी

अविप्र सोशल वेलफेयर सोसाइटी के सेक्रेटरी अमितराज शर्मा ने कहा कि विशेष बच्चों में क्षमता की कोई कमी नहीं होती। जरूरत केवल उनकी प्रतिभा को पहचानकर सही दिशा देने की है। उन्होंने बताया कि संस्था जल्द ही ‘मदर फिटनेस प्रोग्राम’ शुरू करने की योजना पर काम कर रही है। इसके माध्यम से बच्चों के साथ उनकी माताओं के स्वास्थ्य और फिटनेस पर भी ध्यान दिया जाएगा।

आत्मनिर्भर बनाने पर जोर

स्पेशल एजुकेशन हेड जागृति ने कहा कि बच्चों ने मंच पर पूरे आत्मविश्वास के साथ अपनी प्रतिभा दिखाई। उन्होंने बताया कि संस्था में बच्चों की क्षमताओं को पहचानकर उन्हें विकसित करने के लिए संचार कौशल, दैनिक जीवन कौशल, सामाजिक व्यवहार और आत्मनिर्भरता जैसे क्षेत्रों में प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

‘सीमाएं नहीं, क्षमताएं बनें पहचान’

कार्यक्रम के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि समावेशन का अर्थ केवल विशेष बच्चों को साथ रखना नहीं, बल्कि उन्हें समान अवसर और समान भागीदारी देना है। बच्चों की सीमाओं को उनकी पहचान नहीं बनाया जाना चाहिए। सही मार्गदर्शन, सहयोग और विश्वास मिलने पर वे अपनी प्रतिभा को बेहतर तरीके से सामने ला सकते हैं।

कार्यक्रम का समापन इस संदेश के साथ हुआ कि न्यूरोडाइवर्स बच्चों को सम्मान, विश्वास और समान अवसर देकर उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ना हम सभी की जिम्मेदारी है।

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