आईआईएम इंदौर ने मनाया 30वां स्थापना दिवस

भारतीय प्रबंध संस्थान इंदौर (आईआईएम इंदौर) ने अपनी संस्थागत यात्रा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव को चिह्नित करते हुए आज, 3 अक्टूबर 2026 को अपना 30वाँ स्थापना दिवस मनाया। इस अवसर पर प्रबंध शिक्षा, अनुसंधान, नेतृत्व विकास और सामाजिक प्रभाव के क्षेत्र में उत्कृष्टता के तीन दशकों की यात्रा का उत्सव मनाया गया।

इस महत्वपूर्ण स्थापना दिवस समारोह में भारतीय प्रबंध संस्थान इंदौर के संकाय सदस्य, कर्मचारी, और विद्यार्थी एकत्रित हुए। समारोह में आईआईएम इंदौर के विकास और विस्तार का उत्सव मनाया गया, जिसने अपनी मूल भावना और उद्देश्य से जुड़े रहते हुए वैश्विक मंच पर लगातार अपना प्रभाव और विस्तार बढ़ाया है।

कार्यक्रम का उद्घाटन निदेशक, प्रो. हिमांशु राय ने किया। अपने स्थापना दिवस संबोधन में उन्होंने 30 वर्ष पूरे होने के महत्व और इसके साथ आने वाली जिम्मेदारी पर विचार व्यक्त किया। उन्होंने कहा, “तीस वर्ष हमें भविष्य के लिए तीन अनिवार्य दिशाएँ देते हैं: ऐसा ज्ञान सृजित करना जो सार्थक हो, ऐसे नेतृत्वकर्ताओं का निर्माण करना जो प्रभाव उत्पन्न करें, और ऐसी संस्थाओं का निर्माण करना जो समाज और राष्ट्र की सेवा करें। साथ ही, हमारे मूल्यों से कोई समझौता नहीं होना चाहिए, बहिष्कार के प्रति हमारी शून्य सहनशीलता होनी चाहिए और उत्कृष्टता तथा जिम्मेदारी के बीच कोई दूरी नहीं होनी चाहिए। आने वाले वर्षों में आईआईएम इंदौर की महत्वाकांक्षा केवल विस्तार करना नहीं, बल्कि उद्देश्य के साथ आगे बढ़ना है।” उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि किसी संस्थान की वास्तविक पहचान केवल इस बात से निर्धारित नहीं होती कि उसने कितने वर्ष पूरे किए हैं, बल्कि इससे होती है कि उन वर्षों में उसने कितना मूल्य सृजित किया है और कितने लोगों, संगठनों तथा समुदायों के जीवन को प्रभावित किया है। आईआईएम इंदौर के चौथे दशक में प्रवेश के साथ यह पड़ाव उपलब्धियों से आगे बढ़कर आकांक्षाओं की ओर देखने और यह विचार करने का अवसर प्रदान करता है कि संस्थान अब तक क्या बन चुका है और आगे उसे क्या बनना है, उन्होंने कहा।

स्थापना दिवस समारोह में उन व्यक्तियों के योगदान को विशेष रूप से सम्मानित किया गया, जिनकी प्रतिबद्धता और समर्पण ने वर्षों से भारतीय प्रबंध संस्थान इंदौर को सशक्त बनाया है।
वर्ष 2026 का सर्वश्रेष्ठ शिक्षक पुरस्कार प्रो. उदयन शर्मा को प्रदान किया गया। यह सम्मान शिक्षण के क्षेत्र में उनके योगदान तथा विद्यार्थियों के लिए सार्थक और प्रभावी सीखने के अनुभव तैयार करने के प्रति उनकी प्रतिबद्धता के लिए दिया गया।

शैक्षणिक शिक्षण-पद्धति में उत्कृष्टता को भी सम्मानित किया गया। वर्ष 2026 का सर्वश्रेष्ठ केस पुरस्कार प्रो. रंजीत नंबुदिरी को उनके केस, “एपिगी: पीपल मैनेजमेंट प्रैक्टिसेज एंड द चैलेंज ऑफ ग्रोथ”, के लिए प्रदान किया गया। यह केस आइवी पब्लिशिंग द्वारा प्रकाशित है। यह सम्मान प्रासंगिक, कठोर और व्यवहारिक केस-आधारित शिक्षण की भूमिका को रेखांकित करता है, जो प्रबंध शिक्षा को तेजी से बदलती दुनिया में संगठनों के सामने आने वाली चुनौतियों से जोड़ता है।

वर्ष 2026 का सर्वश्रेष्ठ शिक्षण नवाचार पुरस्कार प्रो. सौरभ कुमार को प्रदान किया गया। यह सम्मान शिक्षण और अधिगम में ऐसे नवाचारी दृष्टिकोणों के लिए दिया गया, जो विद्यार्थियों की सहभागिता को मजबूत करते हैं और कक्षा में सीखने के अनुभव को अधिक प्रभावी बनाते हैं।

दीर्घ अवधि के डिग्री प्रदान करने वाले कार्यक्रमों में प्रतिभागियों से प्राप्त फीडबैक के आधार पर शीर्ष 5 प्रतिशत में स्थान बनाने वाले संकाय सदस्यों को भी सम्मानित किया गया। इनमें प्रो. हर्षल लोवालेकर, प्रो. मित वच्छराजानी, प्रो. सायंतन बैनर्जी, प्रो. मनोज मोतियानी, प्रो. संजीव त्रिपाठी और प्रो. उदयन शर्मा शामिल रहे।
संस्थान ने अपने कर्मचारियों के योगदान को भी सर्वश्रेष्ठ कर्मचारी पुरस्कारों के माध्यम से सम्मानित किया। वर्ष 2026 के सर्वश्रेष्ठ कर्मचारी पुरस्कार निम्नलिखित को प्रदान किए गए:

  • पियूष त्रिवेदी
  • नेहा गुप्ता
  • पुनीत मिश्रा
  • अभिषेक विजय
  • अरुण कुमार सिंह

स्थापना दिवस पर संकाय सदस्यों और कर्मचारियों का यह सम्मान संस्थान-निर्माण की एक महत्वपूर्ण सच्चाई को रेखांकित करता है। भवन, रैंकिंग और कार्यक्रम किसी संस्थान को बाहर से परिभाषित कर सकते हैं, लेकिन संस्थान का चरित्र, संस्कृति और स्थायी विरासत उसके भीतर काम करने वाले लोग ही निर्मित करते हैं।

30वें स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में एक कॉफी-टेबल पुस्तक का भी विमोचन किया गया। इस पुस्तक में संस्थान की तीन दशकों की यात्रा, महत्वपूर्ण पड़ावों, उससे जुड़े लोगों और उसकी पहचान बनाने वाले महत्वपूर्ण क्षणों की झलकियाँ प्रस्तुत की गई हैं। साथ ही 10, 20 और 25 वर्षों की सेवा पूरी करने वाले कर्मचारियों को भी उनकी दीर्घकालिक प्रतिबद्धता, समर्पण और भारतीय प्रबंध संस्थान इंदौर के विकास में उनके योगदान के लिए सम्मानित किया गया।

30वाँ स्थापना दिवस भारतीय प्रबंध संस्थान इंदौर की उस महत्वपूर्ण यात्रा को भी रेखांकित करता है, जिसकी शुरुआत वर्ष 1998 में प्रबंध में स्नातकोत्तर कार्यक्रम के पहले बैच के केवल 37 विद्यार्थियों के साथ हुई थी और जो आज प्रबंध शिक्षा, अनुसंधान और कार्यकारी शिक्षा के क्षेत्र में एक अग्रणी संस्थान के रूप में विकसित हो चुका है।

तीन दशकों के दौरान आईआईएम इंदौर ने अपने शैक्षणिक कार्यक्रमों का विस्तार किया है, जिनमें प्रबंध, मानव संसाधन प्रबंधन, एकीकृत प्रबंध शिक्षा, कार्यकारी शिक्षा और शोधपरक कार्यक्रम शामिल हैं। संस्थान ने एएमबीए, एएसीएसबी और इक्विस जैसी अंतरराष्ट्रीय मान्यताएँ प्राप्त कर अपनी वैश्विक शैक्षणिक सहभागिता को भी मजबूत किया है। इसके साथ ही संस्थान ने 28 देशों के 72 संस्थानों तथा देश और दुनिया भर के अनेक संगठनों के साथ साझेदारियाँ विकसित की हैं।

भारतीय प्रबंध संस्थान इंदौर की 30 वर्षों की यात्रा शिक्षण, अनुसंधान और संस्थान-निर्माण में निरंतर उत्कृष्टता की खोज से आकार लेती रही है। इसमें संकाय सदस्यों, कर्मचारियों, विद्यार्थियों और पूर्व विद्यार्थियों की पीढ़ियों का योगदान रहा है। संस्थान के विकास के साथ उद्योग, अकादमिक जगत और वैश्विक साझेदारों के साथ उसका जुड़ाव भी लगातार बढ़ा है, जिससे भारत की प्रबंध शिक्षा व्यवस्था और उससे आगे वैश्विक स्तर पर उसकी भूमिका और मजबूत हुई है।

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