इंदौर में एच-ए-एल एवं एम-पी-एल-यू-एन द्वारा विक्रेता विकास कार्यक्रम आयोजित, रक्षा विनिर्माण क्षेत्र में मध्यप्रदेश के एमएसएमईज़ के लिए नए अवसर

एच-ए-एल की विभिन्न इकाइयों ने खरीद, आउटसोर्सिंग एवं स्वदेशीकरण से जुड़ी संभावनाओं की जानकारी दी; रक्षा क्षेत्र के वरिष्ठ अधिकारियों, उद्योग प्रतिनिधियों एवं एमएसएमईज़ के बीच सीधा संवाद

इंदौर, 27 अक्टूबर 2026: रक्षा मंत्रालय के अंतर्गत महारत्न केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रम हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एच-ए-एल) द्वारा मध्यप्रदेश शासन के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विभाग के उपक्रम मध्यप्रदेश लघु उद्योग निगम लिमिटेड (एम-पी-एल-यू-एन) के सहयोग से एसेंशिया लग्जरी होटल, इंदौर में विक्रेता विकास कार्यक्रम (वेंडर डेवलपमेंट प्रोग्राम) आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य मध्यप्रदेश के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमईज़) को एयरोस्पेस एवं रक्षा विनिर्माण क्षेत्र की आपूर्ति श्रृंखला से जोड़ना तथा उनके लिए नए व्यावसायिक अवसर उपलब्ध कराना था।

यह कार्यक्रम भारत सरकार के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय की विश्व बैंक समर्थित रेजिंग एंड एक्सेलरेटिंग एमएसएमई परफॉर्मेंस (रैम्प) योजना के उद्देश्यों के अनुरूप आयोजित किया गया। मध्यप्रदेश में रैम्प योजना की राज्य नोडल एजेंसी एम-पी-एल-यू-एन के सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम में प्रदेश के उद्यमियों को एच-ए-एल की विभिन्न इकाइयों से सीधे संवाद करने तथा उनकी खरीद आवश्यकताओं, तकनीकी मानकों, गुणवत्ता प्रबंधन, विक्रेता पंजीयन, आउटसोर्सिंग, स्वदेशीकरण एवं आपूर्ति श्रृंखला से संबंधित अवसरों की जानकारी प्राप्त करने का अवसर मिला।

कार्यक्रम में एच-ए-एल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (मिग कॉम्प्लेक्स) श्री एस. के. पात्रा ने मुख्य उद्बोधन देते हुए देश की बढ़ती एयरोस्पेस एवं रक्षा विनिर्माण आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए सक्षम घरेलू विक्रेता तंत्र विकसित करने के महत्व पर प्रकाश डाला। एच-ए-एल के स्वतंत्र निदेशक श्री राकेश भावसार ने आत्मनिर्भर भारत अभियान में एमएसएमईज़ की भूमिका तथा स्वदेशी विनिर्माण को सुदृढ़ करने एवं आयात पर निर्भरता कम करने की आवश्यकता पर अपने विचार रखे। एयरोनॉटिकल क्वालिटी एश्योरेंस, नासिक के अतिरिक्त महानिदेशक श्री एस. सी. करण ने रक्षा विनिर्माण क्षेत्र में गुणवत्ता प्रबंधन, तकनीकी अनुपालन एवं विश्वसनीय उत्पादन मानकों के महत्व पर जानकारी दी।

कार्यक्रम में कंसोर्टियम समन्वयक श्री सिद्धार्थ धवले ने एमएसएमईज़ के लिए कंसोर्टियम निर्माण एवं सामूहिक सहभागिता के माध्यम से बड़े औद्योगिक अवसरों का लाभ उठाने की संभावनाओं पर चर्चा की। वहीं, आईआईटी इंदौर के निदेशक डॉ. सुहास जोशी ने उद्योग एवं शैक्षणिक संस्थानों के बीच सहयोग, नवाचार, अनुसंधान तथा तकनीकी विकास की संभावनाओं पर प्रकाश डाला।

कार्यक्रम में एच-ए-एल के डिप्टी चीफ जनरल मैनेजर श्री अनिल थागले, संयुक्त संचालक, एमएसएमई इंदौर श्री एस. एस. मंडलोई, महाप्रबंधक, डी-टी-आई-सी श्री स्वप्निल गर्ग तथा ई-वाई से रैम्प टीम के सदस्य श्री मिहिर आनंद, श्री अभिनम पटेल एवं सुश्री एनोशा अरशद भी उपस्थित रहे।

कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण एच-ए-एल की नासिक, कोरवा, हैदराबाद एवं लखनऊ इकाइयों द्वारा प्रस्तुत तकनीकी एवं व्यावसायिक सत्र रहे। एच-ए-एल नासिक इकाई के प्रतिनिधियों ने आउटसोर्सिंग, स्वदेशीकरण एवं इंटीग्रेटेड मटेरियल मैनेजमेंट (आई-एम-एम) से संबंधित आवश्यकताओं एवं अवसरों की जानकारी दी। इसी प्रकार कोरवा, हैदराबाद एवं लखनऊ इकाइयों के प्रतिनिधियों ने अपने उत्पादों, विनिर्माण आवश्यकताओं एवं एमएसएमईज़ के लिए संभावित आपूर्ति अवसरों पर प्रस्तुतियां दीं।

इसके अतिरिक्त, रक्षा विनिर्माण क्षेत्र में आवश्यक नियामकीय अनुपालन, गुणवत्ता आश्वासन एवं निर्धारित तकनीकी मानकों के संबंध में डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ एयरोनॉटिकल क्वालिटी एश्योरेंस (डी-जी-ए-क्यू-ए) के प्रतिनिधि द्वारा विस्तृत जानकारी प्रदान की गई।

कार्यक्रम के अंतर्गत उत्पाद प्रदर्शन, बिजनेस-टू-बिजनेस (बी-टू-बी) बैठकें एवं विक्रेता पंजीयन सहायता की व्यवस्था भी की गई। इन गतिविधियों के माध्यम से एमएसएमईज़ को अपनी विनिर्माण क्षमताओं एवं उत्पादों का प्रदर्शन करने, एच-ए-एल के प्रतिनिधियों से सीधे संवाद स्थापित करने, विक्रेता पंजीयन प्रक्रिया को समझने तथा कंपोनेंट सप्लाई, उत्पाद विकास, खरीद एवं आयात प्रतिस्थापन से जुड़े संभावित व्यावसायिक अवसरों की जानकारी प्राप्त हुई।

एच-ए-एल एवं एम-पी-एल-यू-एन के इस संयुक्त प्रयास से मध्यप्रदेश के एमएसएमईज़ को रक्षा एवं एयरोस्पेस जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों की आपूर्ति श्रृंखला से जुड़ने के अवसरों की जानकारी मिली। कार्यक्रम ने आत्मनिर्भर भारत एवं मेक इन इंडिया के उद्देश्यों को आगे बढ़ाते हुए स्वदेशी विनिर्माण, तकनीकी उन्नयन, गुणवत्ता संवर्धन तथा रक्षा क्षेत्र में प्रदेश के उद्यमों की भागीदारी बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की।

यह आयोजन मध्यप्रदेश शासन के एमएसएमई विभाग द्वारा एम-पी-एल-यू-एन एवं रैम्प योजना के माध्यम से प्रदेश के उद्यमों को बड़े सार्वजनिक उपक्रमों, संस्थागत खरीदारों एवं नए बाजारों से जोड़ने के निरंतर प्रयासों का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा।

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