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चरित्र निर्माण और अनुशासन ही राष्ट्र निर्माण की कुंजी: एमआईटी-डब्ल्यूपीयू के दीक्षांत समारोह में राज्यपाल आर्लेकर ने युवाओं को किया प्रेरित
• 17 पीएचडी शोधार्थियों सहित 7,806 छात्रों को दी गई उपाधि; 345 छात्र उत्कृष्ट शैक्षणिक प्रदर्शन के लिए सम्मानित
• मेधावी विद्यार्थियों को 135 स्वर्ण, 105 रजत और 105 कांस्य पदक प्रदान किए गए
पुणे, 26 अक्टूबर 2026: “शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री हासिल करना, नौकरी पाना या एक सफल करियर बनाना नहीं है। शिक्षा को पाठ्यपुस्तकों और कक्षाओं से आगे बढ़कर अनुशासन, समर्पण और सबसे महत्वपूर्ण, चरित्र का निर्माण करना चाहिए। जब हम चरित्र का निर्माण करते हैं, तो हम जिम्मेदार नागरिकों का निर्माण करते हैं, और राष्ट्र निर्माण स्वतः ही होता है,” यह बात तमिलनाडु के राज्यपाल श्री राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने एमआईटी वर्ल्ड पीस यूनिवर्सिटी (MIT-WPU), पुणे के 8वें दीक्षांत समारोह में स्नातकों को संबोधित करते हुए कही।
श्री आर्लेकर इस दीक्षांत समारोह के मुख्य अतिथि थे। समारोह में वर्ल्ड पीस यूनिवर्सिटी गोवा के मानद कुलाधिपति एवं यूनिवर्सिटी एट बफ़ेलो (यूएसए) के अध्यक्ष प्रो. डॉ. सतीश के. त्रिपाठी; माईर्स एमआईटी ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस के प्रबंध न्यासी व कार्यकारी अध्यक्ष और एमआईटी वर्ल्ड पीस यूनिवर्सिटी के कार्यकारी अध्यक्ष डॉ. राहुल वी. कराड; तथा एमआईटी-डब्ल्यूपीयू के कुलपति प्रो. (डॉ.) रविराजा एन. सीताराम सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।
भारत के भविष्य को आकार देने में युवाओं की भूमिका पर जोर देते हुए श्री आर्लेकर ने आगे कहा, “आज की ‘जेन जेड’ (Gen Z) हमारे देश की वास्तविक युवा शक्ति का प्रतिनिधित्व करती है। भारत का भविष्य आपके हाथों में है, और आपके ज्ञान, कौशल, अनुभव तथा विशेषज्ञता का योगदान समाज और राष्ट्र को मिलना चाहिए। जैसे-जैसे भारत ‘विकसित भारत 2047’ के दृष्टिकोण की ओर बढ़ रहा है, हर युवा को खुद से पूछना चाहिए कि वे इस परिवर्तन में कैसे अपना योगदान दे सकते हैं। यदि हम अपना जीवन न केवल अपने लिए बल्कि समाज और देश के बड़े हित के लिए समर्पित करते हैं, तभी शिक्षा सही मायनों में अपना उद्देश्य पाती है।”
एमआईटी-डब्ल्यूपीयू के 8वें दीक्षांत समारोह में स्नातक छात्रों की शैक्षणिक उपलब्धियों का जश्न मनाने और उनकी शैक्षिक यात्रा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर अंकित करने के लिए विश्वविद्यालय नेतृत्व, संकाय सदस्य, स्नातक छात्र, अभिभावक और विशिष्ट अतिथि एक साथ आए। इस समारोह ने शिक्षा, नवाचार, नेतृत्व और विश्व शांति के प्रति विश्वविद्यालय की प्रतिबद्धता को दोहराया।
समारोह का मुख्य आकर्षण 17 पीएचडी शोधार्थियों सहित 7,806 स्नातक छात्रों को उपाधि प्रदान करना था, जिसमें विभिन्न संकायों में उनके शैक्षणिक योगदान को मान्यता दी गई। डॉक्टरेट स्नातकों को उनके शोध योगदान के लिए सम्मानित किया गया। समारोह में 345 पदक विजेताओं का भी सम्मान किया गया, जिनमें 135 स्वर्ण पदक विजेता, 105 रजत पदक विजेता और 105 कांस्य पदक विजेता शामिल थे। स्कूल ऑफ साइंस एंड एनवायरनमेंटल स्टडीज की सुश्री धनश्री राजेंद्र म्हसे को उनकी उत्कृष्ट शैक्षणिक उपलब्धि के लिए ‘फाउंडर प्रेसिडेंट मेडल’ से सम्मानित किया गया।
दीक्षांत समारोह के दूसरे दिन के मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित न्यायमूर्ति उदय ललित, भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश ने कहा, “शिक्षा केवल डिग्री हासिल करना नहीं है, बल्कि यह समाज के प्रति एक जिम्मेदारी भी है। MIT-WPU के स्नातक होने के नाते, आप उस संस्थान की विरासत को आगे बढ़ाने वाले हैं, जिसकी नींव ज्ञान की परिवर्तनकारी शक्ति पर रखी गई है। आप जिस भी पेशे को चुनें, उसमें ईमानदारी, सत्यनिष्ठा और उत्कृष्टता के मूल्यों को बनाए रखें और अपने कौशल का उपयोग सार्थक बदलाव लाने के लिए करें। देश और समाज आपसे उम्मीदें लगाए हुए हैं। आत्मविश्वास के साथ दुनिया में आगे बढ़ें, हर चुनौती का सकारात्मक तरीके से सामना करें और अपने विश्वविद्यालय का नाम रोशन करें।”
डॉ. अशोक खेमका, IAS (सेवानिवृत्त), हरियाणा सरकार के पूर्व अतिरिक्त मुख्य सचिव, जो समारोह में विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित थे, उन्होंने कहा, “डिग्री हासिल करना अंत नहीं, बल्कि जिम्मेदारी की शुरुआत है। तकनीक, प्रतिस्पर्धा और बदलाव से आकार ले रही दुनिया में कदम रखते हुए, नए प्रयोग करने का साहस, बदलाव लाने की रचनात्मकता और हर परिस्थिति में कायम रहने वाली ईमानदारी विकसित करें। पेशेवर योग्यता आपको आगे बढ़ने में मदद कर सकती है, लेकिन सत्यनिष्ठा आपको सिर ऊंचा करके जीने का आत्मविश्वास देती है। प्रचलित धारणाओं पर सवाल उठाएं, आलोचना से सीखें और ऐसे फैसले लें, जिन्हें आप ईमानदारी और अपनी अंतरात्मा के आधार पर सही ठहरा सकें। आपकी सफलता से आपके परिवार को गर्व महसूस हो और समाज के विकास में आपका सार्थक योगदान हो।”
दीक्षांत समारोह के सम्मानित अतिथि प्रो. डॉ. सतीश के. त्रिपाठी ने कहा, “आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) हमारे जीवन के लगभग हर पहलू को नया आकार दे रही है, और आपकी पीढ़ी को यह तय करना होगा कि इसका जिम्मेदारी से उपयोग कैसे किया जाए। जैसे ही आप तेजी से बदलती दुनिया में कदम रखते हैं, महत्वाकांक्षी लेकिन अनुकूलनशील बनें, दूसरों से सीखें और सार्थक जोखिम लेने के लिए तैयार रहें। अपने ज्ञान, रचनात्मकता और विशेषज्ञता का उपयोग बुद्धिमत्ता, नैतिक उद्देश्य और लोक कल्याण को बढ़ावा देने के लिए करें।”
माईर्स एमआईटी ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस के प्रबंध न्यासी एवं कार्यकारी अध्यक्ष डॉ. राहुल वी. कराड ने कहा, “आज जब आप स्नातक हो रहे हैं, तो आपकी जिम्मेदारी केवल नौकरी पाने, उद्यमिता अपनाने या व्यक्तिगत सफलता हासिल करने तक सीमित नहीं है। एमआईटी वर्ल्ड पीस यूनिवर्सिटी के राजदूत के रूप में, आपको यह सोचना होगा कि आप समाज में कैसे योगदान दे सकते हैं और हमारे देश के भविष्य को आकार देने में कैसे मदद कर सकते हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और तीव्र तकनीकी परिवर्तन के इस दौर में, अधिक शांतिपूर्ण और जिम्मेदार दुनिया के निर्माण के लिए विज्ञान, आध्यात्मिकता और मानवीय मूल्यों का समन्वय आवश्यक है।”


