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मध्य प्रदेश में सस्ती आयातित शराब से भारतीय ब्रांडों पर दबाव, आबकारी नीति पर उद्योग ने उठाए सवाल
CIABC ने समान मूल्य श्रेणी में लग्जरी भारतीय स्पिरिट्स और BIO उत्पादों पर राज्य के कुल कर व नियामकीय बोझ की समीक्षा कर अनुचित असमानताएं दूर करने की मांग की
भोपाल: मध्य प्रदेश में आयातित शराब की कीमतों में आई कमी ने भारतीय अल्कोहलिक बेवरेज उद्योग की चिंता बढ़ा दी है। घरेलू निर्माताओं को आशंका है कि सस्ता आयात IMFL और वाइन की प्रीमियम तथा उससे ऊपर की श्रेणियों में भारतीय ब्रांडों को प्रतिस्पर्धा में नुकसान की स्थिति में ला सकता है।
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, भारत-ब्रिटेन मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के तहत टैरिफ में कटौती के बाद भोपाल में कुछ आयातित शराब ब्रांडों की कीमतें 15 से 40 प्रतिशत तक कम हुई हैं। इससे उपभोक्ताओं को अधिक विकल्प मिल सकते हैं, लेकिन घरेलू निर्माताओं का कहना है कि इस बदलाव के बाद राज्य की आबकारी नीति की समीक्षा और सभी कंपनियों के लिए समान प्रतिस्पर्धी अवसर सुनिश्चित करना जरूरी हो गया है।
भारतीय निर्माता आयात पर पाबंदी की मांग नहीं कर रहे हैं। उनका कहना है कि गुणवत्ता, तकनीक और प्रीमियम उत्पादों में भारी निवेश करने वाली घरेलू कंपनियों को कर व्यवस्था, नियामकीय बाधाओं या नीतिगत असमानता के कारण नुकसान नहीं होना चाहिए।
सस्ता आयात, बढ़ती प्रतिस्पर्धा
आयातित शराब की कीमतों में कमी ने घरेलू और विदेशी उत्पादों के बीच मूल्य असमानता को चर्चा में ला दिया है। सीमा शुल्क कम होने से विदेशी उत्पाद सस्ते हो सकते हैं, हालांकि उनकी अंतिम कीमत लागू करों, वितरण लागत और खुदरा मार्जिन पर निर्भर करती है।
दूसरी ओर, भारतीय निर्माता राज्य स्तर की जटिल आबकारी व्यवस्था के तहत काम करते हैं। उनकी लागत में उत्पादन, वित्तपोषण, अनुपालन, वितरण और विभिन्न नियामकीय शुल्क शामिल हैं। खुदरा कीमतों पर राज्य के कर और मूल्य निर्धारण नीतियों का भी असर पड़ता है।
उद्योग का कहना है कि जब टैरिफ रियायतों से आयातित उत्पादों की मूल्य प्रतिस्पर्धा बेहतर होती है और घरेलू निर्माता नियामकीय तथा लागत संबंधी दबावों का सामना करते रहते हैं, तब समान अवसर का मुद्दा महत्वपूर्ण हो जाता है। उद्योग प्रतिस्पर्धा से संरक्षण नहीं, बल्कि निष्पक्ष और पारदर्शी नियम चाहता है।
BIO नीति भी सवालों के घेरे में
मध्य प्रदेश में Bottled-in-Origin (BIO) स्पिरिट्स के साथ होने वाला व्यवहार भी उद्योग की चिंता का विषय है। भारतीय अल्कोबेव उद्योग ने BIO उत्पादों के साथ कथित अलग व्यवहार पर सवाल उठाते हुए राज्य सरकार से लागू शुल्क, फीस, लाइसेंसिंग शर्तों और मूल्य निर्धारण नियमों की समीक्षा की मांग की है।
उद्योग का कहना है कि वैध नियामकीय अंतर का सम्मान किया जाना चाहिए, लेकिन नीतियां ऐसी नहीं होनी चाहिए जिनसे भारतीय विनिर्माण की तुलना में आयातित उत्पादों को अनजाने में भी अनुचित लाभ मिले।
भारतीय प्रीमियम ब्रांडों ने वैश्विक स्तर पर बनाई पहचान
भारतीय अल्कोहलिक बेवरेज निर्माताओं की शीर्ष संस्था कॉन्फेडरेशन ऑफ इंडियन अल्कोहलिक बेवरेज कंपनीज (CIABC) ने कहा, “भारतीय प्रीमियम स्पिरिट्स ने गुणवत्ता के मामले में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने की अपनी क्षमता साबित की है। आयातित स्कॉच से मुकाबला करने वाले घरेलू ब्रांडों में अंतरराष्ट्रीय निर्णायकों से मान्यता प्राप्त पुरस्कार विजेता सिंगल माल्ट और लग्जरी स्पिरिट्स शामिल हैं।”
Indri Diwali Collector’s Edition 2025 ने International Whisky Competition 2026 में Best Indian Whisky और Best Single Malt Indian Whisky पुरस्कार जीते और प्रतियोगिता में Dewar’s Double 21 Year Old तथा Aberfeldy Sherry Cask 25 Year Old को पीछे छोड़ा। इसी तरह Indri Agneya को London Spirits Competition 2026 में Indian Single Malt Whiskey of the Year चुना गया। Amrut Indian Single Malt Cask Strength ने USA Spirits Ratings 2026 में गोल्ड जीता, जबकि Rampur Asava को 2023 John Barleycorn Awards में Best World Whisky का खिताब मिला।
CIABC के अनुसार, ये उपलब्धियां डिस्टिलेशन, मैच्युरेशन, कास्क चयन और उत्पाद विकास में भारतीय कंपनियों के लगातार निवेश का परिणाम हैं।
CIABC ने कहा, “निर्माताओं को गुणवत्ता और उत्पादन दक्षता में लगातार सुधार करना चाहिए। लेकिन उत्पादन दक्षता कर व्यवस्था से पैदा हुई असमानता को दूर नहीं कर सकती। केवल खुदरा कीमतों के आधार पर तुलना अधूरी है। समान श्रेणी के भारतीय और आयातित उत्पादों पर लागू कुल राज्य कर, शुल्क और नियामकीय लागत को भी देखना जरूरी है। यदि नीति घरेलू विनिर्माण को नुकसान की स्थिति में डालती है तो इसे ठीक करने के लिए सरकार को कदम उठाने होंगे।”
संस्था के मुताबिक, भारतीय कंपनियों से केवल उत्पादन लागत घटाकर असमान कर बोझ की भरपाई करने की उम्मीद करने से मैच्युरेशन, तकनीक और कुशल मानव संसाधन में होने वाला निवेश प्रभावित हो सकता है।
मध्य प्रदेश सरकार से नीति की समीक्षा की मांग
CIABC ने मध्य प्रदेश सरकार से समान मूल्य श्रेणी के भारतीय निर्मित स्पिरिट्स और BIO उत्पादों पर राज्य स्तर के कुल कर तथा नियामकीय बोझ की समीक्षा करने और किसी भी अनुचित असमानता को दूर करने का आग्रह किया है।
CIABC ने कहा, “Make in India और आत्मनिर्भर विकसित भारत का अर्थ भारतीय विनिर्माण के साथ निष्पक्ष व्यवहार भी होना चाहिए। घरेलू निर्माता रोजगार पैदा करते हैं, स्थानीय आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत करते हैं और वैश्विक बाजार के लिए भारतीय ब्रांड तैयार करते हैं। विदेशों में पहचान हासिल करने वाली भारतीय स्पिरिट्स को अपने देश में भी प्रतिस्पर्धा का उचित अवसर मिलना चाहिए।”
उद्योग का कहना है कि आत्मनिर्भर भारत केवल भारतीय कंपनियों को उत्पादन के लिए प्रोत्साहित करने तक सीमित नहीं रह सकता। मध्य प्रदेश सरकार को BIO उत्पादों के साथ व्यवहार, कर भार, खुदरा मूल्य निर्धारण और नियामकीय लागत कीसमीक्षा करनी चाहिए, ताकि घरेलू निर्माताओं के लिए समान प्रतिस्पर्धी माहौल सुनिश्चित किया जा सके।


