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एनिमल लिबरेशन कॉन्फ्रेंस इंडिया 2026 के दूसरे दिन डिजिटल एक्टिविज़्म, मीडिया, पर्यावरण और युवाओं की भूमिका पर चर्चा
इंदौर, 10 जनवरी 2026 : इंदौर में आयोजित एनिमल लिबरेशन कॉन्फ्रेंस इंडिया 2026 के दूसरे दिन एनिमल एक्टिविज़्म को डिजिटल माध्यम, मीडिया संवाद, पर्यावरणीय प्रभाव और युवाओं की भागीदारी से जोड़ने पर विशेष फोकस रहा। इंदौर स्थित क्राउन पैलेस में चल रही इस तीन दिवसीय राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस का आयोजन इंदौर एनिमल लिबरेशन द्वारा किया जा रहा है। कॉन्फ्रेंस के दूसरे दिन देश के विभिन्न हिस्सों से आए लगभग 170 से 200 एनिमल एक्टिविस्ट, सामाजिक कार्यकर्ता और जागरूक नागरिक शामिल हुए।
दिन के पहले सत्र में “फुटेज से प्रभाव तक: एक्टिविज़्म के लिए एडिटिंग” विषय पर विस्तृत चर्चा की गई। इस सत्र को अजय किरडिया, को-फाउंडर एवं कोर ऑर्गनाइज़र, इंदौर एनिमल लिबरेशन ने संबोधित किया। उन्होंने बताया कि जानवरों से जुड़े मामलों में सही विज़ुअल डॉक्यूमेंटेशन, स्पष्ट फ्रेमिंग और जिम्मेदार एडिटिंग एनिमल एक्टिविज़्म की प्रभावशीलता को कई गुना बढ़ा देती है। उन्होंने कहा कि किसी भी घटना को रिकॉर्ड करते समय तथ्य, संदर्भ और संवेदनशीलता का ध्यान रखना बेहद आवश्यक है, ताकि जानवरों की वास्तविक स्थिति को बिना सनसनी फैलाए सामने लाया जा सके। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि डिजिटल कंटेंट आज एनिमल राइट्स से जुड़े अभियानों का सबसे सशक्त माध्यम बन चुका है, क्योंकि इसके ज़रिये सोशल मीडिया और अन्य प्लेटफॉर्म्स पर बड़ी संख्या में लोगों तक पहुँचना संभव हो पाया है।
इसके बाद “एनिमल राइट्स के मुद्दों पर प्रेस कवरेज कैसे हासिल करें” विषय पर सत्र आयोजित किया गया। इस सत्र में नितिन जैन, कोर ऑर्गनाइज़र, वीगन इंडिया मूवमेंट एवं बेंगलुरु ब्रिगेड फॉर एनिमल लिबरेशन ने मीडिया के साथ काम करने के अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि एनिमल एक्सप्लॉइटेशन से जुड़े मामलों को मुख्यधारा की मीडिया तक पहुँचाने के लिए स्पष्ट तथ्यों, भरोसेमंद जानकारी और निरंतर संवाद की आवश्यकता होती है, ताकि जानवरों की स्थिति को सार्वजनिक विमर्श का हिस्सा बनाया जा सके।
कॉन्फ्रेंस के दौरान वन जस्ट वर्ल्ड संस्था की को-फाउंडर वर्दा मेहरोत्रा ने एनिमल एक्सप्लॉइटेशन पर विस्तार से बात की। उन्होंने बताया कि देश के अलग-अलग शहरों से आए 170 से 200 प्रतिभागियों की उपस्थिति यह दर्शाती है कि एनिमल राइट्स को लेकर एक संगठित राष्ट्रीय कम्युनिटी तैयार हो रही है। उन्होंने कहा कि जानवरों का शोषण केवल एक नैतिक मुद्दा नहीं है, बल्कि इसका सीधा असर जलवायु परिवर्तन, प्रदूषण और पर्यावरणीय असंतुलन पर भी पड़ता है। उन्होंने जानवरों पर हो रही हिंसा के खिलाफ रणनीतिक सोच, दीर्घकालिक योजना और संगठित प्रयासों की आवश्यकता पर ज़ोर दिया।
दूसरे दिन युवाओं की भूमिका पर भी विशेष चर्चा हुई। डॉ. विजया ब्रह्मा, पीएचडी ने कहा कि युवा वर्ग एनिमल एक्टिविज़्म की सबसे बड़ी ताकत है। उन्होंने बताया कि युवाओं के माध्यम से एनिमल राइट्स का संदेश तेज़ी से और बड़ी संख्या में लोगों तक पहुँचाया जा सकता है। उन्होंने पॉटलक जैसे सामुदायिक आयोजनों का उल्लेख करते हुए बताया कि पॉटलक के ज़रिये लोगों को व्यावहारिक रूप से वीगन और प्लांट-बेस्ड भोजन से जोड़ा जा सकता है। उन्होंने कहा कि पॉटलक में लोग अपने-अपने घर से तैयार किए गए वीगन व्यंजन साझा करते हैं, जिससे न केवल सामूहिकता की भावना बढ़ती है, बल्कि यह भी दिखाया जा सकता है कि बिना पशु उत्पादों के भी स्वादिष्ट, पौष्टिक और सुलभ भोजन संभव है। उन्होंने सोया मिल्क, प्लांट-बेस्ड दही, प्लांट प्रोटीन और अन्य रिप्लिकेटेड फूड विकल्पों का उदाहरण देते हुए बताया कि ऐसे भोजन विकल्प जानवरों के शोषण को कम करने के साथ-साथ पर्यावरण पर पड़ने वाले दबाव को भी घटाते हैं। डॉ. विजय ब्रह्मा ने कहा कि युवाओं के बीच पॉटलक जैसे आयोजनों के माध्यम से वीगन भोजन को सामान्य और स्वीकार्य बनाया जा सकता है, जिससे एनिमल एक्टिविज़्म को रोज़मर्रा की ज़िंदगी से जोड़ा जा सके।
कॉन्फ्रेंस के अंतिम सत्र में “एक्टिविज़्म में बर्नआउट से कैसे निपटें” विषय पर काउंसलिंग साइकोलॉजिस्ट, पोस्ट ग्रेजुएट टीचर एवं एनिमल राइट्स एक्टिविस्ट साक्षी रहेजा ने मानसिक स्वास्थ्य पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि लगातार जानवरों पर हो रही हिंसा और अन्याय से जुड़े मामलों पर काम करते हुए एनिमल एक्टिविस्ट्स के लिए मानसिक संतुलन बनाए रखना बेहद ज़रूरी है। उन्होंने सेल्फ-केयर, आपसी सहयोग और संतुलित कार्यशैली अपनाने पर ज़ोर दिया।
कॉन्फ्रेंस के दूसरे दिन की चर्चाओं से यह स्पष्ट हुआ कि एनिमल एक्टिविज़्म को प्रभावी और टिकाऊ बनाने के लिए डिजिटल कौशल, मीडिया रणनीति, पर्यावरणीय समझ, युवाओं की भागीदारी और मानसिक मजबूती — सभी पहलुओं पर समान रूप से काम करना आवश्यक है। एनिमल लिबरेशन कॉन्फ्रेंस इंडिया 2026 का तीसरा और अंतिम दिन 11 जनवरी 2026 को राष्ट्रीय पशु अधिकार मार्च के साथ संपन्न होगा।


