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मरीज के अस्पताल पहुंचने से पहले ही एम्बुलेंस से एआई बताएंगी इलाज के लिए किन चीजों की है जरूरत
चोइथराम कॉलेज ऑफ नर्सिंग में आयोजित दो दिनी राष्ट्रीय सम्मेलन ‘Synergy-2K25’ के अंतिम दिन हुए पेपर और पोस्टर प्रेजेंटेशन
इंदौर। मेडिकल सेक्टर में हर स्टेप में अब एआई मददगार साबित हो रहा है। एम्बुलेंस में लगा एआई सेटअप मरीज के हॉस्पिटल पहुंचने से पहले ही इमरजेंसी रिस्पांस टीम को सचेत कर देता है कि मरीज के इलाज में उन्हें किन-किन चीजों की जरूरत होगी। इस तरह मरीज के लिए ब्लड और ऑक्सीजन जैसी महत्वपूर्ण सुविधाएँ पहले ही तैयार रखी जा सकती है। इलाज में बचने वाला समय मरीज की जान बचा सकता है। चोइथराम कॉलेज ऑफ नर्सिंग में अयोजित दो दिनी राष्ट्रीय सम्मेलन ‘Synergy-2K25’ के अंतिम दिन यह बात हैदराबाद से आए एआई एक्सपर्ट जुदीश राज ने कही।
उन्होंने बताया कि अब लगभग सभी बड़े हॉस्पिटल एआई इनबिल्ड हो रहे हैं। ओपीडी में मरीज और डॉक्टर की बातचीत को सुनकर एआई टूल डाइनोसिस रिपोर्ट, टेस्ट की लिस्ट और ट्रीटमेंट भी प्लान कर देते हैं। हालांकि इसका उपयोग जिम्मेदार और अनुभवी डॉक्टर्स द्वारा किया जाना जरुरी है क्योंकि ज्यादातर टूल्स विदेश में बने हैं इसलिए उनके पास भारतीय डाटा बेस की कमी है। कई बीमारियां जो भारत में हैं वो विदेश में नहीं होती इसलिए सिर्फ एआई टूल्स के भरोसे इलाज नहीं किया जा सकता है। जबकि दूर-दराज के क्षेत्रों में जहां उचित चिकित्सा सुविधाओं का आभाव है यह किसी वरदान से कम नहीं है इनकी मदद से प्राप्त डाटा को विशेषज्ञ से साझा करके ग्रामीण इलाकों में भी बेहतर चिकित्सा सुविधाएँ उपलब्ध कराई जा सकती हैं। भविष्य में हर हॉस्पिटल के पास चैट जीपीटी की तरह अपना एआई सेटअप होगा, जिसमें हॉस्पिटल के सभी मरीजों और स्टाफ की जानकारी होगी। इससे इलाज जल्दी और सटीकता से करना संभव होगा। भारत जैसे देश में जहां मरीज ज्यादा और डॉक्टर कम है, इलाज मिलने के समय में कमी आने से बड़े पैमाने पर लोगों को चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध करवाना संभव हो पाएगा।
जल्द ही शुरू होगी एआई लैब
कांफ्रेंस के दूसरे दिन स्टूडेंट्स ने पेपर और पोस्टर प्रेजेंट किए। प्रिंसिपल और ऑर्गेनाइसिंग चेयरपर्सन प्रो. श्रीजा विजयन और सचिव डॉ. प्रो. शीतल सक्सेना ने कहा कि इस दो दिनी कांफ्रेंस में सभी मेडिकल प्रोफेशनल्स को एआई और मेडिकल सेक्टर में इसके उपयोग की काफी विस्तृत जानकारी मिली। हम इससे जुड़े फीडबैक भी आमंत्रित करते हैं ताकि आगे मेडिकल सेक्टर में एआई की पढाई को बेहतर बनाया जा सकें। एजुकेशन सर्विस यूनिट के डायरेक्टर राजेश अवस्थी ने कहा कि हम चोइथराम हॉस्पिटल में भी जल्द ही एआई लैब बनाएंगे, जिससे मरीज और स्टूडेंट्स दोनों लाभान्वित होंगे।

मेडिकल सेक्टर में इस तरह हो रहा है एआई का उपयोग –
बिलकुल। मेडिकल सेक्टर में आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस (AI) के उपयोग को लेकर खबर में शामिल करने लायक कुछ पॉइंटर्स इस तरह रखे जा सकते हैं—
- बीमारियों की शुरुआती पहचान: एक्स-रे, सीटी स्कैन और एमआरआई जैसे मेडिकल इमेज की एआई से जांच कर कैंसर, हार्ट डिज़ीज़ और न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर्स जैसी बीमारियों का जल्दी पता लगाया जा रहा है।
- डायग्नोसिस में सटीकता: एआई टूल्स डॉक्टरों को अधिक सटीक डायग्नोसिस करने में मदद करते हैं, जिससे गलतियों की संभावना घटती है।
- पर्सनलाइज्ड ट्रीटमेंट: मरीज के जीन, लाइफस्टाइल और मेडिकल हिस्ट्री का विश्लेषण कर एआई से कस्टमाइज्ड ट्रीटमेंट प्लान बनाए जाते हैं।
- ड्रग डिस्कवरी: नई दवाओं की खोज और उनके क्लिनिकल ट्रायल की प्रक्रिया को तेज़ करने के लिए एआई का उपयोग किया जा रहा है।
- वर्चुअल हेल्थ असिस्टेंट: मरीजों को दवा लेने की याद दिलाने, रिपोर्ट समझाने और बेसिक कंसल्टेशन देने में चैटबॉट्स और एआई हेल्थ असिस्टेंट का सहारा लिया जा रहा है।
- रिमोट पेशेंट मॉनिटरिंग: स्मार्ट डिवाइस और एआई एल्गोरिद्म से मरीज की हार्टबीट, शुगर लेवल और ब्लड प्रेशर की लगातार निगरानी संभव है।
- सर्जरी में सहायता: रोबोटिक सर्जरी में एआई तकनीक का इस्तेमाल डॉक्टरों को जटिल ऑपरेशन अधिक सटीक और सुरक्षित ढंग से करने में मदद करता है।
- हॉस्पिटल मैनेजमेंट: बेड मैनेजमेंट, मरीजों का डेटा रिकॉर्ड और अपॉइंटमेंट शेड्यूल करने में एआई सिस्टम अस्पतालों की कार्यक्षमता बढ़ा रहे हैं।


