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होम्योपैथी एनीमिया के सभी प्रकारों के उपचार में प्रभावी- डॉ. ए. के. द्विवेदी
सोलन / इंदौर | हिमाचल प्रदेश के सोलन स्थित होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज एवं हॉस्पिटल में आयोजित कंटिन्यूइंग मेडिकल एजुकेशन (CME) कार्यक्रम में इंदौर के वरिष्ठ एवं सुप्रसिद्ध होम्योपैथिक चिकित्सक डॉ. ए.के. द्विवेदी ने “Anemia in Pregnancy” विषय पर विस्तार से व्याख्यान दिया। यह सीएमई कार्यक्रम राष्ट्रीय स्तर का रहा, जिसमें देश के अनेक राज्यों से बड़ी संख्या में चिकित्सकों एवं विद्यार्थियों ने सहभागिता की।
इस CME में विशेष रूप से जम्मू-कश्मीर, झारखंड, राजस्थान, नई दिल्ली, गोवा, महाराष्ट्र, तेलंगाना, गुजरात, पंजाब, हरियाणा, मध्य प्रदेश, हिमाचल प्रदेश एवं उत्तर प्रदेश से प्रतिभागियों ने भाग लिया, जिससे कार्यक्रम की गरिमा और प्रभाव और अधिक बढ़ गया।
व्याख्यान के दौरान डॉ. द्विवेदी ने कहा कि होम्योपैथी एनीमिया के सभी प्रकारों के उपचार में सफल है। शरीर में रक्त की मात्रा बढ़ने से न केवल कार्यक्षमता बढ़ती है, बल्कि रोग प्रतिरोधक क्षमता भी मजबूत होती है। एनीमिया मुक्त समाज ही सशक्त भारत की वास्तविक नींव है। उन्होंने बताया कि गर्भावस्था के दौरान महिला शरीर में रक्त की मात्रा लगभग 20 से 30 प्रतिशत तक बढ़ जाती है, जिससे आयरन एवं विटामिन की आवश्यकता भी बढ़ जाती है। यदि यह आवश्यकता पूरी न हो तो एनीमिया की स्थिति उत्पन्न हो जाती है, जिसका सीधा प्रभाव मां एवं गर्भस्थ शिशु के स्वास्थ्य पर पड़ता है।
डॉ. द्विवेदी ने एनीमिया के प्रमुख कारणों पर भी प्रकाश डालते हुए बताया कि महिलाओं में माहवारी के दौरान अत्यधिक रक्तस्राव, नाक से बार-बार खून आना (नकसीर), ब्लीडिंग पाइल्स, तथा प्रतिदिन ब्रश करते समय मसूड़ों से खून आना भी एनीमिया के प्रमुख कारण हो सकते हैं, जिन्हें अक्सर लोग गंभीरता से नहीं लेते।
एनीमिया की रोकथाम पर बल देते हुए उन्होंने कहा कि एनीमिया न केवल रोका जा सकता है, बल्कि सही समय पर पहचाना जाए तो ठीक भी किया जा सकता है। उन्होंने सभी चिकित्सकों एवं विद्यार्थियों से आग्रह किया कि वे इस मिशन से जुड़कर भारत सरकार के एनीमिया मुक्त भारत अभियान को सफल बनाने में सक्रिय भूमिका निभाएं।
डॉ. द्विवेदी ने विशेष रूप से किशोरावस्था (Adolescence) से ही एनीमिया पर ध्यान देने की आवश्यकता बताई। उन्होंने दैनिक आहार में ग्रीन लीफी वेजिटेबल, लाल फल एवं लाल सब्जियों को शामिल करने पर जोर देते हुए कहा कि दिन में यह अवश्य सुनिश्चित करें कि कुछ हरा और कुछ लाल आहार अवश्य लिया जाए। उन्होंने आंवले को शरीर के लिए अमृत बताते हुए किसी भी रूप में आंवला सेवन करने की सलाह दी।
उन्होंने घर से ही स्वस्थ आदतों की शुरुआत करने पर जोर देते हुए कहा कि बच्चों को गुड़, चना, बादाम, मुनक्का, पिंड खजूर, गाजर, चीकू, चुकंदर, अनार जैसे प्राकृतिक खाद्य पदार्थ खाने की आदत डालें। सर्दियों में घर पर बनाए जाने वाले गुड़-ड्राई फ्रूट के लड्डू, गुड़-तिल की गजक एवं चिक्की को भी रक्त बढ़ाने वाला बताया। उन्होंने कहा कि जो भी आहार हड्डियों को मजबूत बनाता है, वही शरीर में रक्त निर्माण में भी सहायक होता है।
व्याख्यान के दौरान प्रतिभागियों ने खुलकर प्रश्न पूछे, जिनका डॉ. द्विवेदी ने अत्यंत सरल एवं व्यावहारिक समाधान प्रस्तुत किया। उनकी एक-एक बात श्रोताओं को न केवल रुचिकर लगी, बल्कि उनके दैनिक जीवन से भी गहराई से जुड़ी हुई महसूस हुई।
कार्यक्रम के दौरान डॉ. द्विवेदी ने एक ऐसे मरीज को भी देखा, जिसका हीमोग्लोबिन मात्र 3.6 ग्राम था और जो लंबे समय से अप्लास्टिक एनीमिया से पीड़ित है। मरीज पूर्व में ATG ट्रीटमेंट भी करा चुका था, लेकिन संतोषजनक लाभ नहीं मिला। जैसे ही उसे जानकारी मिली कि डॉ. ए.के. द्विवेदी सोलन आ रहे हैं, वह विशेष रूप से उनसे परामर्श हेतु कार्यक्रम स्थल पर पहुंचा।
कार्यक्रम का सफल संचालन डॉ. वसुंधरा मेहरोत्रा ने किया। इस अवसर पर महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. पवन द्विवेदी एवं सीएमई की कोऑर्डिनेटर डॉ. अर्चना शर्मा ने डॉ. ए.के. द्विवेदी का मोमेंटो एवं प्रमाण-पत्र भेंट कर स्वागत किया तथा उनके प्रति आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम के तकनीकी संचालन में डॉ. तरुण राजपूत, डॉ. सुरभि एवं विशाल शर्मा का महत्वपूर्ण सहयोग रहा, जिसके कारण सीएमई अत्यंत सुव्यवस्थित एवं सफल रही। विशेष रूप से चंडीगढ़ से पधारे डॉ. विकास सिंघल भी पूरे कार्यक्रम के दौरान डॉ. द्विवेदी के साथ मंच पर उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के समापन पर सभी प्रतिभागियों एवं आयोजकों ने इस CME को अत्यंत ज्ञानवर्धक, प्रेरणादायक एवं जनस्वास्थ्य के लिए उपयोगी बताते हुए डॉ. ए.के. द्विवेदी के प्रति आभार व्यक्त किया।


