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बहुत हुई बाहर की सफाई, अब अंदर की ओर ध्यान दें: साध्वी मयणाश्रीजी
इंदौर। हम सबने बाहर की सफाई तो बहुत कर ली, करते ही रहते हैं, लेकिन चातुर्मास ऐसा अवसर है, जब हमें अंदर की सफाई पर भी ध्यान देना पड़ेगा। काम, क्रोध, माया, निंदा, राग और द्वेष जैसे अंदर के कचरे को जब तक हम बाहर नहीं निकालेंगें, तब तक हमारी बाहर की सफाई का कोई मतलब नहीं। चातुर्मास का एक क्षण ही जीवन की दशा और दिशा को संवार सकता है, यदि हम पूरी निष्ठा और ईमानदारी से यहां आकर इस सत्संग का लाभ उठाएं.
ये दिव्य विचार हैं साध्वी मयणाश्रीजी के, जो उन्होंने रेसकोर्स रोड स्थित पार्श्वनाथ आगमोद्धारक आराधना भवन पर आयोजित धर्मसभा में व्यक्त किए. इस मौके पर श्वेतांबर जैन तपागच्छ उपाश्रय ट्रस्ट के अध्यक्ष डॉ. प्रकाश बांगानी ने बताया कि साध्वीश्रीजी की प्रेरणा से पांच अगस्त से प्रत्येक रविवार को बास्केटबॉल काम्प्लेक्स में पांच जैन जागरण शिविर भी आयोजित किए जाएंगे. इनमें ‘जैन धर्म, कल आज और कल, ‘शिक्षा, संस्कार और सदाचार, ‘जीवन के दो अनमोल रत्न – माता-पिता, ‘जिन शासन की सफलता का राजमार्ग एवं ‘कैसे रहे खुशहाल परिवार जैसे विषय शामिल किए गए है।
शिविर प्रति रविवार प्रात: 10 से 12 बजे तक होंगे। समय की पाबंदी इन शिविरों में सख्ती से पालन की जाएगी. धर्मसभा में साध्वी प्रीतवर्षाश्रीजी, मोक्षवर्षाश्रीजी, साध्वी सिद्धिमयणा श्रीजी एवं अर्हममयणाश्रीजी आदिठाणा भी उपस्थित थे. श्रावक-श्राविकाओं की अगवानी संयोजक दिलीप सी. जैन, महेंद्र बांगानी, हेमंत जैन डिंगडांग, भरत कोठारी, कीर्तिभाई डोसी, पुखराज बंडी, प्रवीण श्रीश्रीमाल आदि ने की. संचालन यशवंत जैन ने किया. आराधना भवन पर साध्वी मयणाश्रीजी के प्रवचनों की अमृत वर्षा प्रतिदिन प्रात: 9.15 से 10.15 बजे तक होगी.
कर्मों का बहुत महत्व
साध्वी मयणाश्रीजी ने कहा कि जीवन में हमारे कर्मों का बहुत महत्व है. राजा हो या रंक, कर्मफल तो सबको भुगतना ही पड़ेंगे. हम रोज दूसरों की शवयात्राएं देखने के बाद भी यही सोचते हैं कि हम नहीं मरेंगे. मरना तो सबको ही है, चिंतन यह करें कि मृत्यु के बाद हमें नारकीय यातनाएं नहीं झेलना पड़ें, इसके लिए अपने कर्म कैसे सुधारें. यह तय है कि हमारे जैसे कर्म होंगे, फल भी वैसा ही मिलेगा. चातुर्मास के मौके पर चिंतन करें कि हमारे कर्मों से हम दूसरों को कैसे सुख और आनंद की अनुभूति करा सकते हैं।


