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दांतों की सफाई में लापरवाही, पड़ सकती है बहुत भारी
प्रमुख स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ. सोनिया दत्ता द्वारा विशेष ओरल हेल्थ विश्लेषण
नई दिल्ली, 20 मई 2026: प्रमुख स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ. सोनिया दत्ता द्वारा विशेष ओरल हेल्थ विश्लेषण से पता चलता है की अक्सर लोग दांतों के डॉक्टर के पास तभी जाते हैं जब दर्द असहनीय हो जाता है, लेकिन विशेषज्ञ इसे एक बड़ी गलती मानते हैं। दांतों की अधिकांश समस्याएं, जैसे कैविटी और मसूड़ों की बीमारी, बिना किसी दर्द के शुरू होती हैं। इसी वजह से लोग इनकी सफाई और देखभाल को नजरअंदाज करते रहते हैं।
यह लापरवाही मामूली समस्या को भविष्य में एक गंभीर और बड़े नुकसान में बदल देती है, जिसका पता व्यक्ति को तब चलता है जब स्थिति काफी बिगड़ चुकी होती है। लापरवाही का यह सिलसिला तब शुरू होता है जब हम रोजाना ठीक से दांत साफ नहीं करते। दांतों पर जमने वाली परत (प्लाक) कुछ ही दिनों में सख्त होकर ‘टार्टर’ बन जाती है, जिसे साधारण ब्रशिंग से नहीं हटाया जा सकता। यही टार्टर मसूड़ों में सूजन और दांतों की सड़न का मुख्य कारण बनता है। इस गंभीर स्थिति से बचने के लिए आयुर्वेद और आधुनिक विज्ञान का मेल सबसे प्रभावी साबित हो रहा है।
आयुर्वेद में नीम और लौंग जैसी चीजों को उनके एंटी-बैक्टीरियल गुणों के लिए जाना जाता है, जो बैक्टीरिया को खत्म करने और मसूड़ों को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं। डाबर रेड पेस्ट इन्हीं प्राकृतिक गुणों को आधुनिक विज्ञान के साथ जोड़ता है। इसे इंडियन डेंटल एसोसिएशन द्वारा भी प्रमाणित किया गया है, जो यह साबित करता है कि यह पेस्ट दांतों की गंदगी को रोकने और बीमारियों से बचाने में पूरी तरह सक्षम है।
दांतों के लंबे स्वास्थ्य के लिए केवल इलाज पर निर्भर रहने के बजाय अच्छी आदतें अपनाना जरूरी है। डाबर रेड पेस्ट जैसे भरोसेमंद टूथपेस्ट से दिन में दो बार ब्रश करना, मीठा कम खाना और नियमित रूप से डॉक्टर से जांच करवाना बेहद जरूरी है। अगर हम अपनी दिनचर्या में इन छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखें, तो हम भविष्य में होने वाले दांतों के बड़े दर्द और इलाज के भारी खर्च, दोनों से बच सकते हैं। अपनी मुस्कान को सुरक्षित रखने का सबसे सही तरीका समय पर की गई देखभाल ही है।


